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मत्ती 24:12-13
jivən səndesh
mai
अधर्मक वृद्धि भेला सँ अनेक लोकक आपसी प्रेम मन्द पड़ि जायत। मुदा जे केओ अन्त धरि स्थिर रहत से उद्धार पाओत।
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मत्ती 24:14
परमेश्वरक राज्यक ई शुभ समाचारक प्रचार सम्पूर्ण संसार मे कयल जायत जाहि सँ एकरा सम्बन्ध मे सभ जातिक लोक गवाही सुनय; तखन अन्तक समय आबि जायत।
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मत्ती 24:6
अहाँ सभ लड़ाइक समाचार आ लड़ाइक हल्ला सभ सुनब। मुदा देखू, ताहि सँ घबड़ायब नहि। ई सभ होयब आवश्यक अछि, मुदा संसारक अन्त तहियो नहि होयत।
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मत्ती 24:7-8
एक देश दोसर देश सँ लड़ाइ करत, और एक राज्य दोसर राज्य सँ। बहुतो ठाम मे अकाल पड़त आ भूकम्प होयत। ई सभ बात तँ कष्टक शुरुआते होयत।
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मत्ती 24:35
आकाश और पृथ्वी समाप्त भऽ जायत, मुदा हमर वचन अनन्त काल तक रहत।
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मत्ती 24:5
बहुतो लोक हमर नाम लऽ कऽ आओत आ कहत जे, ‘हमहीं उद्धारकर्ता-मसीह छी,’ आ बहुतो लोक केँ बहका देत।
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मत्ती 24:9-11
“ओहि समय मे लोक सभ अहाँ सभ पर अत्याचार करयबाक लेल अहाँ सभ केँ अधिकारी सभक जिम्मा मे लगा देत आ मरबा देत। अहाँ सभ सँ सभ देशक लोक सभ एहि लेल घृणा करत जे अहाँ सभ हमर लोक छी। ओहि समय मे बहुतो लोक अपन विश्वास छोड़ि देत। ओ सभ एक-दोसर केँ पकड़बाओत आ एक-दोसर सँ घृणा करत। एहन बहुतो लोक सभ प्रगट भऽ जायत जे झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्वरक प्रवक्ता कहत आ बहुतो लोक केँ बहका देत।
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मत्ती 24:4
यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “होसियार रहू जे अहाँ सभ केँ केओ बहकाबऽ नहि पाबय।
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मत्ती 24:44
तेँ अहूँ सभ सदिखन तैयार रहू, कारण मनुष्य-पुत्र एहने समय मे आबि जयताह जाहि समयक लेल अहाँ सभ सोचबो नहि करब जे ओ एखन औताह।
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मत्ती 24:42
“तेँ अहाँ सभ चौकस रहू, कारण अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक प्रभु कोन दिन आबि जयताह।
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मत्ती 24:36
“मुदा एहि घटना सभक दिन वा समय केओ नहि जनैत अछि, स्वर्गदूतो सभ नहि आ पुत्रो नहि—मात्र पिता जनैत छथि।
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मत्ती 24:24
कारण, ओहि समय मे झुट्ठा मसीह आ झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्वरक प्रवक्ता कहऽ वला सभ प्रगट होयत, और एहन अजगूत बात आ चमत्कार सभ देखाओत जे, जँ सम्भव रहैत, तँ परमेश्वरक चुनल लोक सभ केँ सेहो बहका दैत।
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मत्ती 24:37-39
जहिना नूहक समय मे भेल तहिना ओहि समय मे होयत जहिया मनुष्य-पुत्र फेर औताह। जल-प्रलय होमऽ सँ पहिने लोक सभ खाय-पिबऽ मे आ विवाह करऽ-कराबऽ मे लागल छल। नूह जाहि दिन जहाज मे चढ़ि गेलाह ताहि दिन तक लोक सभ एहि सभ काज मे मस्त रहल। ओकरा सभ केँ किछु बुझऽ मे नहि अयलैक जे कोन बात सभ होमऽ वला अछि, ताबत जल-प्रलयक बाढ़ि आबि कऽ ओकरा सभ केँ बहा कऽ लऽ गेलैक। मनुष्य-पुत्र जहिया फेर औताह, तहिया ओहिना होयत।
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