बधान 30

30
बिधाता पजैल़णैं तम्हैं बापस
1मोसा बोलअ इज़राईली लै इहअ, “मंऐं हेरअ तम्हां का खोज़ी कि तम्हां बिधाता का केही बर्गत भेटणीं अर इहअ बी, ज़ै तम्हैं बिधाता नांईं मने, तै तम्हां लै किहै फिटक एछणैं। तम्हैं छिंगणैं तेऊ ज़ोरा-ज़ोरी दूर देशै-देशै, पर तेभै करै तम्हैं इना गल्‍ला आद। 2ज़ै तेभै तम्हैं अर थारै शोहरू-माठै आपणैं परमेशर बिधाता बाखा फिरे अर बिधाते ज़ुंण हुकम मंऐं आझ़ तम्हां का खोज़ै, ज़ै तम्हैं तिन्‍नां सारअ मन्‍न, प्राण अर आपणअ सारअ ज़ोर लाई मने, 3तेखअ हेरनी थारै परमेशर बिधाता तम्हां लै झींण करी। तेऊ आणनैं तम्हैं तिन्‍नां देशा का बापस फरेऊई ज़िधा-ज़िधा लै तम्हैं निंयैं तै। बिधाता करनै तम्हैं तेखअ भिई पैहलै ई ज़िहै भरपूर। 4च़ाऐ तेखअ तम्हैं धरतीए दुजै बाढै किल्है निं होए पुजै दै, परमेशर बिधाता झाल़णैं तम्हैं तिधा का बी, संघा आणनैं तैहा ज़ैगा लै बापस 5ज़िधी थारै दाद-बाब थिऐ बस्सै दै कि तम्हैं तैहा ज़ैगे भिई मालक बणें। तेखअ दैणीं बिधाता तम्हां लै भिई एही बर्गत कि तम्हैं हणैं आपणैं दादा-बाबा का बी खास्सै अर बलबान।
6“बिधाता करनअ थारी आद-लुआदे दिलो इहअ खतैर कि तिंयां बिधातो हुकम मने अर तिंयां झ़ूरनै बिधाता लै आपणअ सारअ मन्‍न, प्राण अर आपणअ सारअ ज़ोर लाई। तेखअ रहणैं तिंयां तैहा ई ज़ैगा ज़िऊंदै लागी।
7“तेखअ काढणैं थारै परमेशर बिधाता तिन्‍नां लै पल़ै दै सारै फिटक पोर्ही अर तिंयां फिटक पाणै तिन्‍नें दुशमणा लै ज़ुंणी तम्हैं हारै-मारै।
8“तेखअ मनणै तम्हां भिई आपणैं परमेशर बिधाते सारै हुकम ज़ेता आझ़ हुंह तम्हां का खोज़ा। 9बिधाता दैणीं तम्हां लै एही बर्गत कि थारै हणैं खास्सै शोहरू-शोहरी, खास्सै डागै-चैणैं अर खास्सी साल-फसल। बिधाता हणअ भिई थारअ भलअ करना लै खुश, ज़िहअ तेऊ थारै दादा-बाबा लै किअ त। 10पर तम्हां हुऐ बिधाते सोभै हुकम अर बिधी मनणी ज़ुंण ऐहा बधाने कताबा दी आसा लिखै दै अर तम्हां हुअ आपणैं बिधाता बाखा सारअ मन्‍न, प्राण अर आपणअ सारअ ज़ोर लाई फिरनअ।
11“बिधाते ज़ुंण बधान अर बिधी मनणैओ हुकम मंऐं आझ़ तम्हां लै किअ, ईंयां निं खास्सै कठण आथी अर नां एथ किज़ै इहअ आथी कि तम्हैं निं तेता करी सकदै! 12नां ईंयां इहै आथी कि तम्हां लागणअ एता लै सरगै उखल़णअ कि भेटणअ इहअ बोल़णैंओ भान्‍नअ, ‘उझै सरगा लै कुंण च़ाल्‍लअ उखल़ी ज़ुंण इना हाम्हां लै उंधै दैए आणी, ताकि हाम्हैं एता शुणें अर मने?’#रोम. 10:6-8 13नां ईंयां इहै आथी कि एता लै लागणअ तम्हां समुंदर पार टपी डेऊणअ अर तम्हैं इहअ बोले, ‘समुंदरा पार कुंण च़ाल्‍लअ डेऊई ज़ुंण इना हाम्हां लै ओर्ही दैए आणी, ताकि हाम्हैं एता शुणें अर मने?’ 14एता लै निं तम्हां किधी लागणअ डेऊणअ, ईंयां आसा इधी तम्हां संघै, तम्हां का आसा तेतो थोघ अर तिंयां आसा थारै दिलै। तम्हां हुई सोभै गल्‍ला तेही ई करनी अर मनणी।
15“आझ़ छ़ाडी मंऐं अह गल्‍ल तम्हां प्रैंदै, तम्हां भलअ लोल़ी होए या बूरअ, तम्हां ज़िन्दगी लोल़ी होए या मौत! सह आसा थारी मरज़ी। 16हुंह करा तम्हां लै हुकम कि तम्हैं झ़ूरै सदा बिधाता लै अर तेऊ लै रहै सदा शुचै-पाक्‍कै, तम्हैं ज़िऊऐ तेही ज़िन्दगी ज़िहअ सह बोला अर तेऊए बधान अर बिधी मनणैओ डाहै हर बगत खैल। 17तम्हैं आसा ऐबै जरदण नदी पार टपी तैहा ज़ैगा पुजी तेते मालक हणैं आल़ै ज़ुंण तेऊ तम्हां लै आसा लाई दी दैई, ज़ै तम्हैं बिधातो हुकम मने, तै दैणीं बिधाता तम्हां लै एही बर्गत कि तम्हैं हणैं तैहा ज़ैगा सफल अर बलबान।
18“पर ज़ै तम्हैं बिधातो नांईं शुणें अर तेऊ का दूर हई कबाता डेओए। तेता लै डाही मंऐं हेरे आझ़ तम्हां लै चतैनगी दैई कि होरी देअआ सेटा माथै टेक्‍कदै या तिन्‍नां पूज़दै निं लागी! इहअ निं हआ कि तम्हैं छ़ेक्‍कै खतम होए।
19“आझ़ छ़ाडी मंऐं ईंयां गल्‍ला तम्हां प्रैंदै, तम्हां ज़िन्दगी लोल़ी कि मौत, बिधाते बर्गत लोल़ी कि फिटक। आझ़ ज़ुंण बी तम्हैं आप्पू छ़ांटे, सरग अर धरती हणैं आझ़ तैहा गल्‍ले शाजत। हुंह ता च़ाहा इहअ कि तम्हां बिधाते बर्गत अर ज़िन्दगी छ़ांटे, ताकि तम्हैं अर आजू थारी आद-लुआद ज़िऊंदै रहे।
20“तम्हैं रहै आपणैं परमेशर बिधाता लै शुचै-पाक्‍कै, तम्हैं झ़ूरै सिधै तेऊ ई लै अर ज़िहअ सह बोले तम्हैं करै तिहअ। सह आसा बिधाता ई ज़ुंण ज़िन्दगी दैआ, तेऊ दैणअ तम्हां तैहा ज़ैगा खास्सी साला बस्सणै ज़ेते करार तेऊ थारै दाद-बाब आबराम, इसहाक अर याकबा संघै आसा किई दी।”#मूल. 12:7; 26:3; 28:13

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