खास-चैले के काँम 10
10
कुरनेलियुस का संत्त-पतरस खे बुलावा
1कैसरिया नंगर दा कुरनेलियुस नाँव का ऐक आदमी थिया, जू इतालियान नाँव के पल़ट्ण का सुबेदार थिया। 2से अरह् तेस्का बादा कोड़बा धर्मी अरह् पंण्मिश्वर के डर-भय दे रंह् थिऐ, अरह् यहूदी लोगो खे बैजाऐ दाँण-दछ़्णाँ दियों थिया; अरह् हर बख्त्ते पंण्मिश्वर शी प्रार्थना करह् थिऐ। 3तेने ऐक देस के च़ैलवारंह् आरी साक्क्षात् दर्शण दो सुओं करियों साफ-साफ देखो, के पंण्मिश्वर का ऐक दूत्त तेस कैई आऐयों बुल्दा लागा; “ओ, कुरनेलियुस!” 4कुरनेलियुस ऐ तेसी स्वर्गदूत्त सुवाँ करियों ध्याँन शा देखा, अरह् डरियों बुलो, “हे प्रभू! का बुली लो?” तेने स्वर्गदूत्त ऐं तेस्खे बुलो, “तेरी प्रार्थना अरह् तेरे दाँण-दछ़णाँ पंण्मिश्वर के सहाँम्णिऐं पंह्ऊँची रूऐ; 5ऐबे तू याफा नंगर खे कोसी आदमी डेयाल़ अरह् शमौन, जेस्खे पतरस बुली, तेसी ऊडा बऐदियों आँण। 6से शमौन, नाँव के आदमी कागी, जुण्जा चाँम्बड़े का बंईपार कर्णों वाल़ा असो, से तेसी कागी असो; अरह् तेस्को घरह् संमुन्द्रो की टिराँव्टी दो असो।” 7अरह् जबे सेजा स्वर्गदूत्त, तेथै शा आगू हुटा, तअ तबे तेने कुरनेलियुस ऐ आप्णे दो दास जुण्जे तेस कैई हाजिर रंह् थिऐ, तिन मुझ्छ़ा ऐक भगत्त सपाँऐ बईदा। 8अरह् तेने तेसी भगत्त दास कैई सेजी बादी बातो बुली दिती, अरह् तबे तेने तेस्खे बुलो, तू याफा नंगर खे ज़ा।
पतरस खे साक्क्षात् दर्शण
9दुज़े देसे जबे से हाँडी-हाँडियों नंगर के नंजीक पंह्ईचे, तअ दोपारंह् आरी संत्त-पतरस छाप्रों गाशी प्रार्थना करदा हुटा। 10तेसी बख्त्ते संत्त-पतरस के भूख लागी, अरह् से किऐ खाँणों चहाँव थिऐ; तबे सेबक लोग भोजन तैयार कर्दे लागे, परह् तेतिऐखे संत्त-पतरस आत्त्मा दे बै-सुद्ध हऐ गुऐ। 11संत्त-पतरस ऐ देखो, के स्वर्ग खोली गुओं; अरह् ऐक बड़ी लाँम्बी-बीयूल़ी चादर जेऐ किऐ चींज स्वर्गो शी ऊदी आँदी लागी, अरह् तिन्दें के चारे कुँणें धर्त्ती गाशी थंऐ लुऐ थिऐ। 12तियों चादरी दे साँत्त-भाँत्ते चौपाऐ बंऐच़ी धर्त्ती गाशी, अरह् लूह्कणों वाल़े जीव-जन्तु अरह् अस्माँनों के पक्षी थिऐ। 13तबे: संत्त-पतरस के ऐशी धाव शुँणाई पड़ी, के “पतरस! बीऊँज; ईनू माँर, अरह् खा।” 14परह् संत्त-पतरस ऐ बुलो, “प्रभू! बिलकुल ने! मुँऐ कद्दी भे किऐ अ-शुद्ध गाँन्दी चींज ने खाऐ थई!” 15तबे सेजी धाव दुज़ाल़िऐं हजो शुँणाँई पड़ी, के “पंण्मिश्वर ऐ जिन्दें खे शुद्ध हंणों, के घोष्णा करी थंऐ; तिन्देंखे तुऐ कंद्दी भे अ-शुद्ध ने बुले।” 16तबे: च़ीज़ाल़िऐ भे ऐष्णी ही धाव पड़ी, अरह् तबे तिन्दें पाछ़ी सेजी चादर जैऐ चींज ऐक-दंम स्वर्गो दी ऊँबी थागी गऐ। 17तेख्णों संत्त-पतरस के ऐजो सहम्झ दो ने आऐ रंई थी, के तिन्ऐं ऐजा का नंजारा देंखी लुवा; ईन्देंका का मंतल्व असो, तेतिऐखे करनेलियुस के जाँणें डेयाल़े गुऐ आदमी शमौन के घरह् का पता लाऐयों तेस्की दुवारों-देऊँल़ी गाशी पंह्ईचें। 18तबे तेथै पंंह्ईचें अंदे आदमी ऐं धोवाऐयों पुछ़ो, “कियों शमौन, जेस्खे पतरस बुली, कियों से ऐसी ही घरह् दा पाँऊणा असो?” 19परह् संत्त-पतरस ऐं हेभी भी तेसी ही दर्शण के बारे दा सोंच-बिचार करी लुवा थिया, के आत्त्मा ऐं तेस्खे बुलो; “देख! च़ींनं आदमी ताँव जुह्दे आऐ रूऐ। 20बीऊँज, अरह् ऊँदा ज़ा, अरह् बिलकुल बै-झीझ्क हंऐयों ईनकी गईलो आगू ज़ाव; किन्देंखे के ईनू मुँऐ ही डेयाल़ी थुऐ।” 21तबे: संत्त-पतरस तिनू लोगों कैई ऊदे हुटियों बुल्दे लागे, “तुऐ जैसी जुह्दे आऐ रूऐ, सेजा हाँव ही असो; तुऐं कैई आऐ रूऐ?” 22तिन्ऐं ऐजा जबाब दिता, “सुबेदार कुरनेलियुस जुण्जा धर्मी, अरह् प्रभू! का भगत्त, अरह् पंण्मिश्वर का डर-भय माँनणों वाल़ा असो; अरह् तेस्का बादे यहूदी लोग, भे आदर-ईज्जत्त करह्, अरह् तेस्खे ऐक पबित्र स्वर्गदूत्त ऐं अज्ञाँ देऐ थंऐ; के से तुओं आप्णें कागी बंईदो, अरह् से तुओं कैई शे बचन की खुषख्बरी शुँणों।” 23तबे संत्त-पतरस ऐं तिनू भींटे बईदे, अरह् तिन्ऐ तिनका आछ़ा आदर-सत्त्कार करा।
कुरनेलियुस के घरह् दा संत्त-पतरस
तबे दुज़े का संत्त-पतरस जबे तिनू आरी याफा नंगर खे ज़ाँदे लागे, तअ किऐ बिश्वाषी भाऐ भी तिनकी गईलो हुटे। 24जबे से दुज़े देसे कैसरिया दे पंह्ईचे, तअ सुबेदार कुरनेलियुस आप्णें टाबरे-कुड़्बे अरह् आप्णें खास प्यारे दोस्तो आरी संत्त-पतरस की ठह्ल़णाँई दे तेथै कंट्ठै थिऐ। 25जबे संत्त-पतरस तेथै भिंठा ज़ाँणों ही वाल़ा थिया, तबे सेजा सुबेदार कुरलियुस तिन कैई शा भेंटिया, अरह् तेने संत्त-पतरस के लात्तो गाशी पंड़ियों प्रणाँम करी। 26परह् संत्त-पतरस ऐं तेसी ऐजो बुलियों ऊँबा थागा, के “ऊबा बीऊँज, हाँव भे आदमी ही असो।” 27अरह् तेसी आरी बातो कर्दे-कर्दे से घरह् दे भिटे हुटे, अरह् तेथै तिन्ऐं बैजाऐ भहित्ते लोग कंट्ठै हुऐ अंदे देखे; 28तबे: संत्त-पतरस ऐं तिनखे बुलो, “तुँऐं जाँणों ऐं के गऐर यहूदी की संगत्ती कर्णी, के तिनू कागी ज़ाँणों यहूदी निय्म के बिरूध असो; परह् पंण्मिश्वर ऐं मुँखे ऐजो बुली थो, के कोसी भे आदमी खे अ-शुद्ध के पापी ने बुल्दे। 29ईन्देंखे तुवाँरे बंईद्णों गाशी, हाँव बै-झीझ्क ईथै आऐ रूवा; अरह् ऐबे हाँव तुओं कैई शो ऐजो पुछ़णों चहाँऊँ; के तुऐं मुँह कैई बंऐदी थुवा?” 30सुबेदार कुरनेलियुस ऐ जबाब दिता, “चार देसो आगे ऐसी ही बख्त्ते मुँऐ आप्णें घरह् दी किऐ च़ीन बाजे की प्रार्थना करी लंऐ थी; के ऐक च़ींट्टै-ऊँज्ल़े खोट्णों बाँम्बियों कुँऐ मंरोद् मेरे सहाँम्णें ऐक-दमं खह्ड़ा हुवा। 31अरह् तेने मुँखे ऐशो बुलो, ‘हे कुरनेलियुस, तेरी प्रार्थना शुँणी थऐ, अरह् पंण्मिश्वर ऐं तेरे दिते अंदे दाँण-दछ़्णाँ भे चींत्तै करी थुऐं। 32ऐबे तू कोसी आदमी डेयाल़ियों याफा नंगर शा शमौन जैस्खे पतरस बुली, से शमौन नाँव के आदमी कागी, जुण्जा चाँम्बड़े का बंईपार करह्; अरह् तेस्को घरह् संमुन्द्रो के टिराँव्टी दो असो, से भे तेथी पाऊँणा असो।’ 33तबे मुँऐ तेख्णीं तुओं कैई लोग डेयाल़े, अरह् तुँऐं ऐजो बैगे ही आछो करो, के तुऐं ईथै ईनकी गईलो आऐ; अरह् प्रभू! ऐं तुओं खे जुण्जी-जुण्जी अज्ञाँ देऐ थंई, तिन्दें शुँण्णों खे आमें बादे झुणें, पंण्मिश्वर के सहाँम्णें हाजिर असो।”
संत्त-पतरस का भाष्ण
34तबे संत्त-पतरस ऐं बुल्णों शुरू करो, “ऐबे हाँव बिलकुल संहम्झीं गुवा; के पंण्मिश्वर कोसी आरी भी पक्षपात्त-अपणोंट ने करदा। 35आदमी भाँव कोसी भी जात्ती का हों, अरह् जे कुँऐ पंण्मिश्वर की भग्त्ति करह्, अरह् तिनू गाशी श्रदा थंह्; तअ तैसी गाशी पंण्मिश्वर की कृपा के नंजर सदा बंणाँऐ अंदी थंह्; अरह् तेस्का सभाव भे तेष्णाँ ही हऐ ज़ाँव। 36पंण्मिश्वर ऐं इस्राएलियों खे आप्णा आच्छ़ा शुझ़ा दिता, अरह् यीशू मसीया के जाँणें, जुण्जे सोभी के प्रभू! पंण्मिश्वर असो: तिन कैई ही शाँण्त्ति की खुषख्बरी शुँणाँणों खे दिती। 37नासरत के रंहणों वाल़े यीशू के बारे दो बादे यहूदा देश दो जुण्जो किऐ हुओं, सेजो तुऐं बादे लोग जाँणों ऐं; सेजो सब-कुछ गलील प्रदेश दो शुरू हुओं, अरह् संत्त-यूहन्ना नहाँण-कराँणों वाल़े के जाँणें जिन्ऐं आगे ही ईयों बातो का प्रचार करी थुवा थिया। 38पंण्मिश्वर ऐ तिनू ही नाँसरत गाँव के यीशू पबित्र-आत्त्मा अरह् शक्त्ति शे अभिषिक्त्त करे गुऐ; अरह् से घूम्मी-फीरियों भलाई कर्दे रूऐ; अरह् शैतान के सताँऐ अंदे लोग चाँग्गै करदा रूऐ; किन्देंखे के पंण्मिश्वर तिनकी गईलो आपु थिऐ। 39प्रभू यीशू ऐं जुण्जो किऐ यहूदा ईलाके अरह् यरूशलेम दो करो, तिन्दें के गुवाह्-शाज़्त्त आँमें असो; तिनू ही यीशू मसीया लोगें ऐ शुँल़ी-फ़ाँषी दे देऐयों माँरी दिते। 40परह् पंण्मिश्वर ऐं तिनू च़ीज़े देसे मंरे अंदे मुँझ्शे ऊबे जीऊँदे करे, अरह् सेजो आँमों कैई शो साक्षात्त देखाव; 41सोभी लोगो कैई शे ने परह् तिनू गुवाह्-शाज़्त्त कैई शे देखाई पड़े; जिनू पंण्मिश्वर ऐं च़ूणी-छ़ाँटी थुऐ थिऐ, सेजे गुवाह्-शाज़्त्त आँमें ही असो; अरह् दुज़ाल़िऐ तिन के ऊबे जीऊँणों गाशी, आँमें तिनकी गंईलो खाऐ-पीं थों। 42अरह् तिन्ऐ आँमों खे ऐजी अज्ञाँ दिती, के आँमें लोगो मुँझी ऐजा प्रचार करह्; अरह् ऐजी घोष्णाँ करी दियों, साफ-साफ गुवाऐ-शाज़्त्त दियों; के से ‘सेजा ही असो!’ जिनू पंण्मिश्वर ऐं जीऊँदे अरह् मंरे अंदे का नियाँव कर्णों वाल़ा, नींयाँईच़ू बंणाँऐ थुवा। 43प्रभू यीशू के बारे दी, तिनू ऋषी लोगे भे गुवाऐ-शाज़्त्त दिती, के जुण्जे कुँऐं यीशू मसीया दा बिश्वाष करला, तेस्खे तिनके नाँव शी तेस्के बादे पाप खे माँफी भेट्ली।”
गऐर यहूदी गाशी पबित्र-आत्त्मा ऊत्री
44संत्त-पतरस ऐ ऐजो बुली ही लो थियों, के पबित्र-आत्त्मा तिनू सोभी लोगो गाशी ऊदी ऊत्री; जिनू लोगें ऐ बचन शुँणी लुवा थिया। 45संत्त-पतरस की गंईलो आऐ अंदे, यहूदी बिश्वाषी लोगों के ऐजो देखियों; तूरंबाँणच़ूटे, के कियों पबित्र-आत्त्मा का बरदाँण गऐर-यहूदियों खे भे देऐ थुवा। 46किन्देंखे के गऐर-यहूदियों खे अपरियाँण भाषाओं दे बुल्दे, अरह् पंण्मिश्वर की बड़ियाऐ कर्दे शुँणियों, तबे: संत्त-पतरस ऐं बुलो, 47“ईन लोगो खे आँमों ही जेष्णीं पबित्र-आत्त्मा भेंटी रंऐ, तअ तबे कियों ईनू लोग कुँऐं नहाँण-नहाँणों शे रूकी सको, के पाँणी देंदे भाजी सको?” 48अरह् संत्त-पतरस ऐं अज्ञाँ दिती, के यीशू मसीया के नाँव शो ईनको नहाँण-कराव; तबे तिन्ऐं संत्त-पतरस शी ऐजी अरज करी, के “तुऐं कुछ देसो तोड़ी ईथी अमाँरी गंईलो रंह्।”
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खास-चैले के काँम 10: sri
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10
कुरनेलियुस का संत्त-पतरस खे बुलावा
1कैसरिया नंगर दा कुरनेलियुस नाँव का ऐक आदमी थिया, जू इतालियान नाँव के पल़ट्ण का सुबेदार थिया। 2से अरह् तेस्का बादा कोड़बा धर्मी अरह् पंण्मिश्वर के डर-भय दे रंह् थिऐ, अरह् यहूदी लोगो खे बैजाऐ दाँण-दछ़्णाँ दियों थिया; अरह् हर बख्त्ते पंण्मिश्वर शी प्रार्थना करह् थिऐ। 3तेने ऐक देस के च़ैलवारंह् आरी साक्क्षात् दर्शण दो सुओं करियों साफ-साफ देखो, के पंण्मिश्वर का ऐक दूत्त तेस कैई आऐयों बुल्दा लागा; “ओ, कुरनेलियुस!” 4कुरनेलियुस ऐ तेसी स्वर्गदूत्त सुवाँ करियों ध्याँन शा देखा, अरह् डरियों बुलो, “हे प्रभू! का बुली लो?” तेने स्वर्गदूत्त ऐं तेस्खे बुलो, “तेरी प्रार्थना अरह् तेरे दाँण-दछ़णाँ पंण्मिश्वर के सहाँम्णिऐं पंह्ऊँची रूऐ; 5ऐबे तू याफा नंगर खे कोसी आदमी डेयाल़ अरह् शमौन, जेस्खे पतरस बुली, तेसी ऊडा बऐदियों आँण। 6से शमौन, नाँव के आदमी कागी, जुण्जा चाँम्बड़े का बंईपार कर्णों वाल़ा असो, से तेसी कागी असो; अरह् तेस्को घरह् संमुन्द्रो की टिराँव्टी दो असो।” 7अरह् जबे सेजा स्वर्गदूत्त, तेथै शा आगू हुटा, तअ तबे तेने कुरनेलियुस ऐ आप्णे दो दास जुण्जे तेस कैई हाजिर रंह् थिऐ, तिन मुझ्छ़ा ऐक भगत्त सपाँऐ बईदा। 8अरह् तेने तेसी भगत्त दास कैई सेजी बादी बातो बुली दिती, अरह् तबे तेने तेस्खे बुलो, तू याफा नंगर खे ज़ा।
पतरस खे साक्क्षात् दर्शण
9दुज़े देसे जबे से हाँडी-हाँडियों नंगर के नंजीक पंह्ईचे, तअ दोपारंह् आरी संत्त-पतरस छाप्रों गाशी प्रार्थना करदा हुटा। 10तेसी बख्त्ते संत्त-पतरस के भूख लागी, अरह् से किऐ खाँणों चहाँव थिऐ; तबे सेबक लोग भोजन तैयार कर्दे लागे, परह् तेतिऐखे संत्त-पतरस आत्त्मा दे बै-सुद्ध हऐ गुऐ। 11संत्त-पतरस ऐ देखो, के स्वर्ग खोली गुओं; अरह् ऐक बड़ी लाँम्बी-बीयूल़ी चादर जेऐ किऐ चींज स्वर्गो शी ऊदी आँदी लागी, अरह् तिन्दें के चारे कुँणें धर्त्ती गाशी थंऐ लुऐ थिऐ। 12तियों चादरी दे साँत्त-भाँत्ते चौपाऐ बंऐच़ी धर्त्ती गाशी, अरह् लूह्कणों वाल़े जीव-जन्तु अरह् अस्माँनों के पक्षी थिऐ। 13तबे: संत्त-पतरस के ऐशी धाव शुँणाई पड़ी, के “पतरस! बीऊँज; ईनू माँर, अरह् खा।” 14परह् संत्त-पतरस ऐ बुलो, “प्रभू! बिलकुल ने! मुँऐ कद्दी भे किऐ अ-शुद्ध गाँन्दी चींज ने खाऐ थई!” 15तबे सेजी धाव दुज़ाल़िऐं हजो शुँणाँई पड़ी, के “पंण्मिश्वर ऐ जिन्दें खे शुद्ध हंणों, के घोष्णा करी थंऐ; तिन्देंखे तुऐ कंद्दी भे अ-शुद्ध ने बुले।” 16तबे: च़ीज़ाल़िऐ भे ऐष्णी ही धाव पड़ी, अरह् तबे तिन्दें पाछ़ी सेजी चादर जैऐ चींज ऐक-दंम स्वर्गो दी ऊँबी थागी गऐ। 17तेख्णों संत्त-पतरस के ऐजो सहम्झ दो ने आऐ रंई थी, के तिन्ऐं ऐजा का नंजारा देंखी लुवा; ईन्देंका का मंतल्व असो, तेतिऐखे करनेलियुस के जाँणें डेयाल़े गुऐ आदमी शमौन के घरह् का पता लाऐयों तेस्की दुवारों-देऊँल़ी गाशी पंह्ईचें। 18तबे तेथै पंंह्ईचें अंदे आदमी ऐं धोवाऐयों पुछ़ो, “कियों शमौन, जेस्खे पतरस बुली, कियों से ऐसी ही घरह् दा पाँऊणा असो?” 19परह् संत्त-पतरस ऐं हेभी भी तेसी ही दर्शण के बारे दा सोंच-बिचार करी लुवा थिया, के आत्त्मा ऐं तेस्खे बुलो; “देख! च़ींनं आदमी ताँव जुह्दे आऐ रूऐ। 20बीऊँज, अरह् ऊँदा ज़ा, अरह् बिलकुल बै-झीझ्क हंऐयों ईनकी गईलो आगू ज़ाव; किन्देंखे के ईनू मुँऐ ही डेयाल़ी थुऐ।” 21तबे: संत्त-पतरस तिनू लोगों कैई ऊदे हुटियों बुल्दे लागे, “तुऐ जैसी जुह्दे आऐ रूऐ, सेजा हाँव ही असो; तुऐं कैई आऐ रूऐ?” 22तिन्ऐं ऐजा जबाब दिता, “सुबेदार कुरनेलियुस जुण्जा धर्मी, अरह् प्रभू! का भगत्त, अरह् पंण्मिश्वर का डर-भय माँनणों वाल़ा असो; अरह् तेस्का बादे यहूदी लोग, भे आदर-ईज्जत्त करह्, अरह् तेस्खे ऐक पबित्र स्वर्गदूत्त ऐं अज्ञाँ देऐ थंऐ; के से तुओं आप्णें कागी बंईदो, अरह् से तुओं कैई शे बचन की खुषख्बरी शुँणों।” 23तबे संत्त-पतरस ऐं तिनू भींटे बईदे, अरह् तिन्ऐ तिनका आछ़ा आदर-सत्त्कार करा।
कुरनेलियुस के घरह् दा संत्त-पतरस
तबे दुज़े का संत्त-पतरस जबे तिनू आरी याफा नंगर खे ज़ाँदे लागे, तअ किऐ बिश्वाषी भाऐ भी तिनकी गईलो हुटे। 24जबे से दुज़े देसे कैसरिया दे पंह्ईचे, तअ सुबेदार कुरनेलियुस आप्णें टाबरे-कुड़्बे अरह् आप्णें खास प्यारे दोस्तो आरी संत्त-पतरस की ठह्ल़णाँई दे तेथै कंट्ठै थिऐ। 25जबे संत्त-पतरस तेथै भिंठा ज़ाँणों ही वाल़ा थिया, तबे सेजा सुबेदार कुरलियुस तिन कैई शा भेंटिया, अरह् तेने संत्त-पतरस के लात्तो गाशी पंड़ियों प्रणाँम करी। 26परह् संत्त-पतरस ऐं तेसी ऐजो बुलियों ऊँबा थागा, के “ऊबा बीऊँज, हाँव भे आदमी ही असो।” 27अरह् तेसी आरी बातो कर्दे-कर्दे से घरह् दे भिटे हुटे, अरह् तेथै तिन्ऐं बैजाऐ भहित्ते लोग कंट्ठै हुऐ अंदे देखे; 28तबे: संत्त-पतरस ऐं तिनखे बुलो, “तुँऐं जाँणों ऐं के गऐर यहूदी की संगत्ती कर्णी, के तिनू कागी ज़ाँणों यहूदी निय्म के बिरूध असो; परह् पंण्मिश्वर ऐं मुँखे ऐजो बुली थो, के कोसी भे आदमी खे अ-शुद्ध के पापी ने बुल्दे। 29ईन्देंखे तुवाँरे बंईद्णों गाशी, हाँव बै-झीझ्क ईथै आऐ रूवा; अरह् ऐबे हाँव तुओं कैई शो ऐजो पुछ़णों चहाँऊँ; के तुऐं मुँह कैई बंऐदी थुवा?” 30सुबेदार कुरनेलियुस ऐ जबाब दिता, “चार देसो आगे ऐसी ही बख्त्ते मुँऐ आप्णें घरह् दी किऐ च़ीन बाजे की प्रार्थना करी लंऐ थी; के ऐक च़ींट्टै-ऊँज्ल़े खोट्णों बाँम्बियों कुँऐ मंरोद् मेरे सहाँम्णें ऐक-दमं खह्ड़ा हुवा। 31अरह् तेने मुँखे ऐशो बुलो, ‘हे कुरनेलियुस, तेरी प्रार्थना शुँणी थऐ, अरह् पंण्मिश्वर ऐं तेरे दिते अंदे दाँण-दछ़्णाँ भे चींत्तै करी थुऐं। 32ऐबे तू कोसी आदमी डेयाल़ियों याफा नंगर शा शमौन जैस्खे पतरस बुली, से शमौन नाँव के आदमी कागी, जुण्जा चाँम्बड़े का बंईपार करह्; अरह् तेस्को घरह् संमुन्द्रो के टिराँव्टी दो असो, से भे तेथी पाऊँणा असो।’ 33तबे मुँऐ तेख्णीं तुओं कैई लोग डेयाल़े, अरह् तुँऐं ऐजो बैगे ही आछो करो, के तुऐं ईथै ईनकी गईलो आऐ; अरह् प्रभू! ऐं तुओं खे जुण्जी-जुण्जी अज्ञाँ देऐ थंई, तिन्दें शुँण्णों खे आमें बादे झुणें, पंण्मिश्वर के सहाँम्णें हाजिर असो।”
संत्त-पतरस का भाष्ण
34तबे संत्त-पतरस ऐं बुल्णों शुरू करो, “ऐबे हाँव बिलकुल संहम्झीं गुवा; के पंण्मिश्वर कोसी आरी भी पक्षपात्त-अपणोंट ने करदा। 35आदमी भाँव कोसी भी जात्ती का हों, अरह् जे कुँऐ पंण्मिश्वर की भग्त्ति करह्, अरह् तिनू गाशी श्रदा थंह्; तअ तैसी गाशी पंण्मिश्वर की कृपा के नंजर सदा बंणाँऐ अंदी थंह्; अरह् तेस्का सभाव भे तेष्णाँ ही हऐ ज़ाँव। 36पंण्मिश्वर ऐं इस्राएलियों खे आप्णा आच्छ़ा शुझ़ा दिता, अरह् यीशू मसीया के जाँणें, जुण्जे सोभी के प्रभू! पंण्मिश्वर असो: तिन कैई ही शाँण्त्ति की खुषख्बरी शुँणाँणों खे दिती। 37नासरत के रंहणों वाल़े यीशू के बारे दो बादे यहूदा देश दो जुण्जो किऐ हुओं, सेजो तुऐं बादे लोग जाँणों ऐं; सेजो सब-कुछ गलील प्रदेश दो शुरू हुओं, अरह् संत्त-यूहन्ना नहाँण-कराँणों वाल़े के जाँणें जिन्ऐं आगे ही ईयों बातो का प्रचार करी थुवा थिया। 38पंण्मिश्वर ऐ तिनू ही नाँसरत गाँव के यीशू पबित्र-आत्त्मा अरह् शक्त्ति शे अभिषिक्त्त करे गुऐ; अरह् से घूम्मी-फीरियों भलाई कर्दे रूऐ; अरह् शैतान के सताँऐ अंदे लोग चाँग्गै करदा रूऐ; किन्देंखे के पंण्मिश्वर तिनकी गईलो आपु थिऐ। 39प्रभू यीशू ऐं जुण्जो किऐ यहूदा ईलाके अरह् यरूशलेम दो करो, तिन्दें के गुवाह्-शाज़्त्त आँमें असो; तिनू ही यीशू मसीया लोगें ऐ शुँल़ी-फ़ाँषी दे देऐयों माँरी दिते। 40परह् पंण्मिश्वर ऐं तिनू च़ीज़े देसे मंरे अंदे मुँझ्शे ऊबे जीऊँदे करे, अरह् सेजो आँमों कैई शो साक्षात्त देखाव; 41सोभी लोगो कैई शे ने परह् तिनू गुवाह्-शाज़्त्त कैई शे देखाई पड़े; जिनू पंण्मिश्वर ऐं च़ूणी-छ़ाँटी थुऐ थिऐ, सेजे गुवाह्-शाज़्त्त आँमें ही असो; अरह् दुज़ाल़िऐ तिन के ऊबे जीऊँणों गाशी, आँमें तिनकी गंईलो खाऐ-पीं थों। 42अरह् तिन्ऐ आँमों खे ऐजी अज्ञाँ दिती, के आँमें लोगो मुँझी ऐजा प्रचार करह्; अरह् ऐजी घोष्णाँ करी दियों, साफ-साफ गुवाऐ-शाज़्त्त दियों; के से ‘सेजा ही असो!’ जिनू पंण्मिश्वर ऐं जीऊँदे अरह् मंरे अंदे का नियाँव कर्णों वाल़ा, नींयाँईच़ू बंणाँऐ थुवा। 43प्रभू यीशू के बारे दी, तिनू ऋषी लोगे भे गुवाऐ-शाज़्त्त दिती, के जुण्जे कुँऐं यीशू मसीया दा बिश्वाष करला, तेस्खे तिनके नाँव शी तेस्के बादे पाप खे माँफी भेट्ली।”
गऐर यहूदी गाशी पबित्र-आत्त्मा ऊत्री
44संत्त-पतरस ऐ ऐजो बुली ही लो थियों, के पबित्र-आत्त्मा तिनू सोभी लोगो गाशी ऊदी ऊत्री; जिनू लोगें ऐ बचन शुँणी लुवा थिया। 45संत्त-पतरस की गंईलो आऐ अंदे, यहूदी बिश्वाषी लोगों के ऐजो देखियों; तूरंबाँणच़ूटे, के कियों पबित्र-आत्त्मा का बरदाँण गऐर-यहूदियों खे भे देऐ थुवा। 46किन्देंखे के गऐर-यहूदियों खे अपरियाँण भाषाओं दे बुल्दे, अरह् पंण्मिश्वर की बड़ियाऐ कर्दे शुँणियों, तबे: संत्त-पतरस ऐं बुलो, 47“ईन लोगो खे आँमों ही जेष्णीं पबित्र-आत्त्मा भेंटी रंऐ, तअ तबे कियों ईनू लोग कुँऐं नहाँण-नहाँणों शे रूकी सको, के पाँणी देंदे भाजी सको?” 48अरह् संत्त-पतरस ऐं अज्ञाँ दिती, के यीशू मसीया के नाँव शो ईनको नहाँण-कराव; तबे तिन्ऐं संत्त-पतरस शी ऐजी अरज करी, के “तुऐं कुछ देसो तोड़ी ईथी अमाँरी गंईलो रंह्।”
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