मिका 7

7
इज़राईला जैंदरी निं नित-पत्त रही
1मुल्है आसा लानत! हुंह डेऊअ ज़ेठै-शाल़्हे फल़ा चोल़दअ तेभै ज़ांऊं तिंयां पठ मुक्‍कै! हुंह डेऊअ दाखा काढदअ ज़ेभै तेते लुम्बर चोल़ी आसा हेरै दै। नां मुंह दाखो लुम्बर भेटअ नां फेडूओ एक दाणअ भेटअ ज़ेता खाणां लै मेरअ दिल बोला त। 2तिहै ई ज़ुंण मणछ परमेशरा लै शुचै पाक्‍कै आसा, तिंयां निं ऐबै रहै आथी! धर्मीं मणछ गऐ सोभ डेऊई। ज़ुंण मणछ रहै दै आसा, तिंयां आसा घाती अर हत्या करनै आल़ै, तिन्‍नें हआ एकी-दुजै लै ज़ज़ाल़ डाहै दै छ़ैई। 3तिंयां ज़ाणा कदुष्ट काम करी। कार-करिंदै अर जज मांगा रेशपत! बडै लोगा भेटा ज़िहअ तिंयां च़ाहा तिहअ। ईंयां सोभ करा बूरअ करना लै एक्‍कअ। 4तिन्‍नां मांझ़ै सोभी का राम्बल़अ बी आसा बणैं तिछै कांडे ज़िहअ। तिन्‍नां जैंदरी सोभी का मानदार आसा झ़रीलै कांडे झ़ाकल़ा का बी बूरअ।
बिधाता आसा आपणैं गूरा बाती चतैनगी दैई हेरी दी कि सह एछणअ तम्हां लै सज़ा दैंदअ। सह बगत गअ पुजी! ऐबै हणअ इहअ बगत ज़ेथ तम्हां लै झाख अर आफ़त पल़णीं। 5ज़ुंण तम्हां का लोग खोज़े, तेतो विश्वास निं करी, आपणैं साथीए आसरै बी निं रही। एतो बी डाहै धैन कि तम्हैं आपणीं पैरी बेटल़ी का किज़ै गल्‍ला करा। 6किल्हैकि शोहरू समझ़ा आपणैं बाबा बृथा! शोहरी काढा माआ लै आछी अर नुश करा शाशुई लै द्रोह। मणछे दुशमण आसा तिन्‍नें आपणैं ई घअरे टबर।
7रही मेरी गल्‍ल, मुंह रहणअ तेता भाल़ै लागी ज़ुंण बिधाता करनअ। मुंह रहणअ बिधाता न्हैल़ै लागै ज़ुंण मुंह बच़ाऊआ। मुखा आसा थोघ कि सह हेरा मेरी गल्‍ला शूणीं।
दुशमण हणैं शर्मिंदै
8मेरै दुशमणो! एता लै निं खुश हंदै लागा कि मुल्है आसा आफ़त पल़ी दी। हुंह आसा धरनीं बधल़ुअ द पर हुंह जाणअ खल़अ बी उझ़ुई। हुंह आसा न्हैरै दी पर बिधाता हणअ मुल्है प्रैश्शअ। 9मंऐं किअ बिधाता लै पाप, तैही आसा तेऊ मुल्है रोश्शै आई दी। ज़ेभै तैणीं सह मेरअ पक्ष निं लए, तेभै तैणीं लागणअ मुंह तेऊओ रोश्श ज़िरनअ। तेखअ करनी तेऊ मुल्है सोभै गल्‍ला भली अर तेऊ पजैल़णअ हुंह प्रैश्शै दी। मुंह भाल़णअ आपणीं आछी कि तेऊ हेरअ हुंह बच़ाऊई। 10एता भाल़ी हणैं मेरै दुशमण शर्मिंदै ज़ुंण इहअ बोला तै, “तेरअ परमेशर बिधाता किधी आसा।” ज़ांऊं तिंयां बाते च़िक्‍करै ज़िहै घ्रोस्हणैं, तिन्‍नें एही बूरी दशा भाल़णीं मुंह आपणीं आछी।
11एरुशलेम नगरीऐ, सह बगत बी एछणअ ज़ेभै ताह फेर गहल़ भिई च़िणनअ। तेभै हणीं तेरै मुल्खे सिअं होर बी खास्सी दूर तैणीं। 12तेभै एछणैं अश्शूर अर मिसर देशा का लोग ताह सेटा लै। लोग एछणैं मिसर देश अर फरात दरैऊआ ओर्ही। ताह सेटा लै एछणैं सारी धरती समुंदर-समुंदरे टापू अर धारा-धारा बस्सै दै लोग। 13पृथूई हणीं एथ बस्सै दै लोगे कदुष्ट कामां करै उज़र अर शुन्‍नीं।
मिके बिधाता का अरज़
14हे बिधाता, तूह कर आपणीं परज़ा प्रैंदै राज़, तूह नढैऊ आपणीं परज़ा आप्पै संघा करै म्हारी फाज़त ज़िहअ फुआल आपणीं शोठी करै करा। हाम्हैं आसा तेरी आपणैं खास परज़ा ज़ुंण तंऐं आसा छ़ांटै दै। हाम्हैं आसा भेडे एही हेल़्ही ज़िहै ज़ुंण बणैं आसा अर रज़दी-पज़दी ज़िम्मींए हरै घाह जैंदरी आसा बस्सै दै। ज़िहै पैहलै हाम्हैं तेरी भेडा बाशान अर गलाद मुल्खै च़रा तै, तिहै च़राऊ हाम्हां ऐहा ज़ैगा बी।
15बिधाता दैनअ ज़बाब, “मुंह बिधाता रहैऊंणै तम्हां का च़मत्कार ज़िहै मंऐं तधू रहैऊऐ तै ज़ेऊ ज़मानै तम्हैं मंऐं मिसर देशा का आणै तै काढी। 16होरी देशे लोगा भाल़णअ कि तम्हैं किज़ै किअ। तेखअ एछणी तिन्‍नां समझ़ कि असली दी निं तिन्‍नां का किछ़ै बल आथी! तेखअ हणैं तिंयां शर्मिंदै अर तिंयां हणैं काल्‍लै अर टौणैं मणछा ज़िहै। 17तिंयां हणैं लरुगणैं आल़ै ज़ीबा ज़िहै, तिन्‍नां पल़णीं डअर अर तिन्‍नां लागणअ दानुईं ज़िहअ धूल़अ च़ाटणअ। निखल़णअ मुंह बिधाते डरै आपणैं गहल़ा-कोटा का डरदी-काम्बदी बागै।”
18म्हारै परमेशर, ताह ज़िहअ निं कोह आथी! तंऐं छ़ांटै हाम्हैं कि हाम्हैं तेरी खास परज़ा होए। तंऐं किऐ म्हारै पाप-दोश माफ। तूह निं सदा लै रोश्श करदअ। तूह हआ झींण करना लै खुश। 19ताह करनी हाम्हां लै भिई झींण, म्हारै ज़ुल्म चेल्हणैं ताह आपणैं खूरा हेठै, म्हारै सोभ पाप शोटणै ताह डुघै समुंदरे थाल्‍लै लै। 20ताह करनी कबल्‍ली हाम्हां लै झींण, किल्हैकि हाम्हैं आसा आबराम अर याकबे आद-लुआद। तंऐं आसा तेऊ ज़मानै इना म्हारै बाब-दादै लै एही ई ज़बान दैनी दी।

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