जोना 3
3
खिरी किअ जोना ज़िहअ बिधाता बोलअ तिहअ ई
1बिधाता किई जोना संघै भिई गल्ला, 2“तूह डेऊ बडी नगरी निनबे लै। ज़ुंण समाद मुंह ताखा दैणअ, तूह खोज़ै तेता तिन्नां का।”
3जोना शूणअ ज़िहअ बिधाता बोलअ तिहअ संघा डेऊअ सह निनबे नगरी लै।
निनबे ती बडी नगरी, सह ती एतरी बडी नगरी कि तेते एकी पुंझ़ा का दुजै पुंझ़ा तैणीं डेऊंणा लै लागा तै पैदल हांढी चअन धैल़ै। 4जोना लागअ तैहा नगरी हांढदअ, एकी धैल़ी हांढी लागअ सह सोभी का इहअ समाद खोज़दअ, “सिधै च़ाल़्ही धैल़ै रहै, तेखअ हणअ निनबे नगरीओ बनाश!” 5निनबे नगरी बस्सै दै लोगै शूणअ परमेशरो समाद संघा किअ तिन्नां गल्ला दी विश्वास। तेखअ डाही तिन्नैं प्राश्त करना लै धैल़ी संघा रहै ब्रतू। निनबे नगरी होछ़ै का प्रोढै तैणीं ज़ेतरै बी मणछ थिऐ, तिन्नैं डाहै शोग करना लै घेरी खिंथल़ै बान्हीं।
6ज़ांऊं अह खबर निनबे नगरीए राज़ै सेटा बी पुजी। सह उझ़ुअ आपणीं राज़गाद्दी का तेभी, आपणअ राज़ैओ सुआब खोल्हअ पोर्ही संघा बेठअ घेरी खिंथल़ै बान्हीं छ़ारे रूल़ी प्रैंदै। 7राज़ै किअ निनबे नगरीए आपणीं सारी परज़ा लै इहअ हुकम ज़ारी, “राज़ै अर सोभी कार-करिंदै बाखा आसा सारी परज़ा लै इहअ हुकम कि तम्हैं निं नाज़ो दाणअ बी खाखा पाई, च़ाऐ सह मणछ होए, पशू होए, भेडा-बाकरी होए, गाऊई-बल्द होए ज़ाथी निं कोह किछ़ै खाई अर नां पाणीं झुटी।
8“सोभ मणछ डाहै घेरी खिंथल़ै बान्हीं, आपणैं पशू अर डागै-धणा लै बी डाहै खिंथल़ै पल़ेटी। सोभ मणछ लाऐ हिक्का पटाक्की लेरा संघा करै परमेशरा सेटा अरज़। तम्हैं सोभ छ़ाडा कदुष्ट काम अर पाप करनअ। 9तै झ़ाणीं इहअ होए कि परमेशर हाम्हां लै माफी छ़ाडे! अर सह आपणअ रोश्श फांभअ करे! झ़ाणीं इहअ करै सह म्हारअ बनाश करनै का पिछ़ू हटी जाए!”
10ज़ांऊं परमेशरै भाल़अ कि निनबे नगरीए सोभी मणछै किअ प्राश्त, तिन्नैं हेरै कदुष्ट अर पापी काम करनै छ़ाडी। तेखअ सोठअ परमेशरै इहअ कि ऐबै निं तेऊ निनबे नगरी लै आफ़त पाणीं ज़िहअ तेऊ बोलअ त कि निनबे नगरीओ करनअ बनाश।
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