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असाधारण उपासकਨਮੂਨਾ

असाधारण उपासक

DAY 5 OF 5

यशायाह  6:8

8 तब मैं ने प्रभु का यह वचन सुना, मैं किस को भेंजूं, और हमारी ओर से कौन जाएगा? तब मैं ने कहा, मैं यहां हूं! मुझे भेज ।

जैसा की हम एक और बढ़ते संकट का सामना कर रहे हैं, हमारे दिल उन सभी के लिए दुखित होता है  जो पीड़ित हैं और इस कोरोना की दूसरी लहर की कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस बीच, परमेश्वर हमारी कलीसिया से उपासक होने और उपासना करने को बात कर रहे है ।वह 'असाधारण' प्रकार के उपासकों की तलाश में है। क्या आप इन चुनौतियों के बीच में आराधना करने को तैयार है।  क्या परमेश्वर आप को  पाएंगे जब वह उपासको को तलाश रहे होंगे?

यशायाह हाँ में  जवाब देने, हाथ उठाने और यह कहने को जल्दी में था की  ,"हाँ प्रभु मैं उपलब्ध हूं।” वह अपनी आराधना में इतना लापरवाह और इतना परित्यक्त कैसे हो सकता है?

उसको तो निश्चित रूप से पूछना ही चाहिए था की इसकी क्या शर्त है , आगे और क्या होगा , कितने दिन चलेगा और मुझे क्या मिलेगा ? यशायाह ने तो शायद बिना शर्त के ही अपना जवाब दे दिया।

आज, परमेश्वर सेवकाई  के लिए लोगों को ढूंढ रहा है। इस अनिश्चितित्ता, विपदा और संकट के समय में वह पुकार रहा है।  कौन मेरे लिए आगे बढ़ेगा ? कौन मेरे हाथ और पैर बनेंगे को मेरा प्रेम का सन्देश उन दुखी लोगो तक पहुचाएंगे। शारीरिक दूरी सामाजिक दूरी न बन जाए।  आज जब हम भी कही नहीं जा पा रहे है हम दूसरे माध्यम से लोगों के पास सन्देश पंहुचा सकते है। मोबाइल से सन्देश या कॉल कर सकते है , घर में बैठे ही कुछ अच्छा काम कर सकते है इंटरनेट का इस्तेमाल करके।  आज एक असाधारण उपासक बनने के लिए मेरा जवाब क्या होगा ? आपका क्या होगा ?


ਪਵਿੱਤਰ ਸ਼ਾਸਤਰ

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असाधारण उपासक

यशायाह 6:1-8 पर 5 दिन का अध्याय जो उसके एक भविष्यवक्ता से असाधारण उपासक होने की यात्रा को दर्शाती है।

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