असाधारण उपासकਨਮੂਨਾ

यशायाह 6:2-4
"उस से ऊंचे पर साराप दिखाई दिए; उनके छ: छ: पंख थे; दो पंखों से वे अपने मुंह को ढांपे थे और दो से अपने पांवों को, और दो से उड़ रहे थे।" 3"और वे एक दूसरे से पुकार पुकारकर कह रहे थे: सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है।" 4 "और पुकारनेवाले के शब्द से डेवढ़ियों की नेवें डोल उठीं, और भवन धूंए से भर गया।"
यशायाह ने परमेश्वर की महिमा को देखा और उसकी पवित्रता की एक झलक देखी। साराप तीन बार घोषणा करते है की यहोवा पवित्र है। यह इस बात को दर्शाता है की परमेश्वर हमारी दुनिया से इतना अलग है और उसमे ज़रा भी बुराई नहीं है। इस तरह की पवित्रता के लिए आवश्यक है कि सेराफिम (जलने वाले) भी उसकी उपस्थिति में अपने चेहरे या पैरों को उजागर न करें । परमेश्वर की आपार महिमा मंदिर चौखट और दहलीज को हिला देती है ,और उसकी उपस्थिति घने धुएं में से प्रकट होती है।
क्या आप ऐसी शानदार मगर डरावनी स्थिति में होने की कल्पना कर सकते हैं? मुझे यकीन है की यशायाह यदि वहाँ होता तो कब्र पर पहरेदारों की तरह गिर गया होता और यीशु के पुनरुत्थान को देखकर मृत लोगों की तरह बन गया होता । शायद आप सोच रहे होंगे की अगर मुझे ऐसा अनुभव होता तो मेरी भी जिंदगी बदल जाती। लेकिन जब हम अपने उद्धार के समय परमेश्वर से मिलते हैं, तो हम भी उनकी महिमा और उनकी पवित्रता का अनुभव करते हैं। 2 कुरिन्थियों 3:18 परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं॥
आज यीशु के बलिदान के द्वारा हम सब निडरता और विश्वास के साथ परमेश्वर की उपस्थिति में आ सकते हैं। वह वही महिमामय और पवित्र परमेश्वर है, परन्तु अब जब हमें मसीह में क्षमा किया गया और पवित्र बनाया है, तो हम उसकी महिमा को देख सकते हैं और उसके स्वरूप में परिवर्तित हो सकते हैं। क्या आप आज परमेश्वर को उसकी महिमा और उसकी पवित्रता के लिए धन्यवाद देंगे? क्या आप उसका धन्यवाद करेंगे की आप मसीह में उन के साथ शरीक हैं? आप असाधारण उपासक होने के मार्ग पर चलने लगेंगे॥
ਪਵਿੱਤਰ ਸ਼ਾਸਤਰ
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यशायाह 6:1-8 पर 5 दिन का अध्याय जो उसके एक भविष्यवक्ता से असाधारण उपासक होने की यात्रा को दर्शाती है।
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