परमेश्वर हमारे साथ – आगामी बाइबल योजनाਨਮੂਨਾ

यूहन्ना रचित सुसमाचार
परमेश्वर हमें जीवन प्रदान करने के लिए हमारे साथ है
यूहन्ना रचित सुसमाचार का प्रारम्भ यीशु की पहिचान को एक काव्य के रूप में प्रस्तुत करने से होता है। प्रेरित अपने ही अद्वितिय शैली में घोषणा करता है कि यीशु प्रभु है और जगत में पायी जाने वाली हर एक सृष्टि को उसी के द्वारा जीवन दिया गया है। वह आगे कहता है कि उसमें जीवन था और वह वह जीवन मनुष्यों की ज्योति बना (यूहन्ना 1:4)। वह यीशु की पहिचान का अपनी पत्री में उत्तम ढंग से वर्णन करने के लिए “ज्योति” शब्द का इस्तेमाल करता है और वह लिखता है कि यदि हम उसकी संगति में रहते हैं और फिर भी अन्धकार में चलते हैं तो सत्य हम में नहीं है (1यूहन्ना 1:6)। इस तरह से यीशु ज्योति लाने वाला और जीवन देने वाला है।
हमारी दुनिया में ज्योति का होना, सभी जीवनों प्राथमिक आवश्यकता है। पेड़ पौधों को सूरज की रौशनी से फोटोसिन्थेसिस की आवश्यकता होती है जिससे कि वे भोजन पैदा कर सकें, जिसका हम सेवन करते हैं। फोटोसिन्थेसिस की वही प्रक्रिया ऑक्सीजन का निर्माण करती है जो हम सभी मनुष्यों के लिए महत्वपूर्ण होती है। बिना प्रकाश या ज्योति के, पूरी धरती गीली और अंधकारमय और पूरी तरह से जीवन रहित होगी। प्राकृतिक संसार में जीवन और ज्योति साथ साथ चलते हैं, तो आत्मिक जीवन में कितना अधिक साथ चलेगें। यीशु इस निराशजनक संसार में ज्योति लेकर आये और उन्होंने लाखों करोड़ों लोगों के जीवन को बदल दिया। उसने केवल हमारे जन्म के समय में जीवन प्रदान करने के लिए हमें अपनी सांस नहीं दी वरन जब हम नया जन्म पाते हैं तो वह हमें यीशु के द्वारा ताज़ा और नया जीवन प्रदान करता है। वह लोगों के हृदयों को बदलने, उनके मनों को नया करने और उनके जीवनों को परिवर्तित करने के लिए आया। परमेश्वर का हमारे साथ होने पर हमारा जीवन उस दशा से भिन्न होना चाहिए जो परमेश्वर को न जानने पर था।
हम सभी ने उस पुरानी कहावत को सुना होगा जो कहती है “खीर का स्वाद तो उसे खाने पर पता चलता है” ठीक इसी प्रकार से, परमेश्वर के हमेशा हमारे साथ होने का प्रमाण इस बात से प्रमाणित होता है कि हमारा जीवन इस संसार को किस तरह का दिखाई देता है। यदि परमेश्वर हम में और हम परमेश्वर में रहते हैं तो क्या उसके गुण और उसकी पहिचान हमारे जीवन से प्रगट नहीं होनी चाहिए?यूहन्ना अध्याय 10 पद 10 में यीशु बताते हैं कि किस प्रकार से शत्रु अर्थात शैतान चुराने, हत्या करने और नाष करने के लिए आता है लेकिन वह (यीशु) हमें बहुतायत का जीवन देने के लिए आये हैं। यह बहुतायत का जीवन उस परमेश्वर का जीवित प्रमाण है जो हमेशा उपस्थित रहता और हमारे जीवन के हर एक क्षेत्र से सीधा जुड़ा है। बहुतायत के जीवन का समृद्ध,सफल या प्रभावशाली होना ज़रूरी नहीं है। यह ऐसा जीवन है जिसे क्लेशों में शान्ति, गिरने पर आनन्द और दर्द के बीच में भी उद्देश्य प्राप्त हो जाता है। इस जीवन में हमेशा मसीह की महक होती है जिसके कारण जब किसी व्यक्ति की मुलाकात हम से होती है तो वह पहले यीशु से मिलता है बाद में हम से। यह ऐसा जीवन होता है जो बहुत से प्रष्नों को पूछता और विश्वास पर आधारित जीवन पर गहन चर्चा करने के लिए रास्ता खोलता है। यह एक ऐसा जीवन होता है जिसका मकसद उसके जीवन काल के बाद भी आने वाली पीढ़ी को प्रभावित करना होता है।
होने दें कि हमारा जीवन सोशल मीडिया पर भेजी जाने वाले हमारे उन संदेशों से बढ़कर हो जो बताते हैं कि मसीह हमारे लिए क्या है। हमारे जीवन से सत्य का बखान सत्य की तस्वीर बनाने वाली प्रचलित संस्कृतियों की तुलना में अधिक होने पाये। होने दें हमारा जीवन शत्रु के उन झूठों से बढ़कर होने पाये जिसके द्वारा उसने हमारी पीढ़ी को भ्रमित कर दिया है। हो सकता है कि हमारा जीवन ही वह एकमात्र बाइबल हो जिसे कोई जन पढ़ सकता हो, इसलिए इस बात से बहुत फर्क पड़ता है कि हम क्या करते हैं और अभी हम अपने जीवन में कहां पर हैं।
इस तैयारी के दौर में हम परमेश्वर से हम में नया जीवन फूंकने के लिए प्रार्थना करें ताकि जब हम नये वर्ष में प्रवेश करें तो हम नये स्थानों लेने, नये क्षेत्रों पर कब्ज़ा करने, दानवों को जीतने और जिस किसी से भी हम मिले चाहे वह केवल एक ही मिनट के लिए क्यों न हो मसीह की सुगन्ध उत्सर्जित करने के लिए ताजा और बहाल हो जाएं।
प्रार्थनाः
प्रिय प्रभु
यीशु को हमारे साथ होने हेतू भेजने के लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। मैं पवित्र आत्मा के लिए आपका धन्यवाद देता हूं जो मुझे ताज़ा विश्वास उण्डेलता रहता है और मेरे हृदय को आपके प्रति उभारता है। मेरे स्वार्थ और घमण्ड के लिए आप मुझे क्षमा करें - मैं प्रार्थना करता हूं कि मैं आपके और केवल आपकी महिमा के लिए जिऊंगा।
यीशु के नाम में आमीन।
ਪਵਿੱਤਰ ਸ਼ਾਸਤਰ
About this Plan

हमारा संसार ज़्यादातर समयों में अनिश्चित व उथल पुथल जान पड़ता है। यदि परमेश्वर के पुत्र, यीशु न होते तो, हमारे पास कोई आशा नहीं होती। हर एक क्रिसमस हमें इम्मानुएल रूपी उपहार की याद दिलाता है- परमेश्वर का हमारे साथ होना एक उपहार है जो हमेशा बना रहता है। हम अब से लेकर सर्वदा तक कभी भी अकेले नहीं हैं। यह हमारे लिए एक ख़ुशी की बात है।
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