परमेश्वर हमारे साथ – आगामी बाइबल योजनाਨਮੂਨਾ

लूका रचित सुसमाचार
हमें बचाने के लिए परमेश्वर हमारे साथ है।
मैक्स लूकाडो कहते हैं “बाइबल का उद्देश्य परमेश्वर की सन्तानों को बचाने के लिए उसकी योजना की उदघोषणा करना है। बाइबल बताती है कि मनुष्य भटका हुआ है और उसे उद्धार प्राप्त करने की ज़रुरत है। यह हमें बताती है कि यीशु वह परमेश्वर है जिसे अपनी सन्तानों को बचाने के लिए मनुष्यों के रूप में इस संसार में भेजा गया है।”
यीशु के इस संसार में आने से जुड़ी हर बात इस तथ्य के आप पास घूमती है कि वह हमें बचाना चाहता है। लूका उन अलग अलग लोगों के बारे में वर्णन करता है जिनकी मुलाकात प्रतिज्ञा किये हुए मसीह से हुई थी।
यीशु की माता मरियम ने यीशु को जन्म देने और उसका पालन पोषण करने की आज्ञा का पालन किया। मरियम अपने गीत में परमेश्वर का धन्यवाद देती है कि यह बच्चा बड़ा होकर यहूदियों का उद्धार करेगा। यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले का पिता, जकर्याह यह कहते हुए आने वाले मसीह के लिए आनन्दित होता है कि वह अभिषिक्त जन उसके लोगों का उद्धार व उन पर दया करेगा। शिमौन, जिसने बालक यीशु को मन्दिर में देखा, वह अपने उस उद्धार के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करता है जो यहूदियों और यूनानियों दोनों के लिए ही उपलब्ध था। आपको आश्चर्य हो सकता है कि “उद्धार” शब्द पर आखिरकार ज़ोर क्यों नहीं दिया गया और उसकी व्याख्या क्यों नहीं की गयी। क्या आपको वास्तव में उद्धार की आवश्यकता है? क्या यह वास्तव में इतना महत्वपूर्ण है? परमेश्वर का वचन स्पष्ट तौर पर कहता है कि सबने पाप किया है और सब लोग परमेश्वर की महिमा से रहित हो गये हैं। चाहे हम ने व्यभिचार किया हो, अपने पड़ोसी से झूठ बोला हो, परीक्षा में नकल की हो या फिर किसी लाल बत्ती को पार किया हो हम सभी पापी हैं। परमेश्वर की निगाहों में पाप तो पाप ही है। हम चाहे कितना भी अच्छा काम करने का प्रयास कर लें, हमारे जीवन का कोई न कोई हिस्सा टूटा रह जाता है जिसकी मरम्मत होने की आवश्यकता पड़ती है। परमेश्वर की उद्धार करने की शक्ति मसीह में होकर हमारे लिए सुधार और मरम्मत का वह सारा काम कर देती है। इच्छा शक्ति, आत्म-सहायता या सकारात्मक विचारों की कितनी भी मात्रा इस कार्य को नहीं कर सकती है। वे सहायता तो करते हैं लेकिन काम को पूरा नहीं करते - मसीह का वह लहू जो उसने मृत्यु के समय हमारे लिए बहाया था हमारे बीते काल में किये गये पापों और उन पापों से भी हमें शुद्ध करता है जो हम भविष्य में करेगें। क्या यह अद्भुत और आनन्द की बात नहीं है? जिस क्षण हम अपने मुंह से अंगीकार करते हैं कि यीशु ही प्रभु है - उसी क्षण हमारा उद्धार हो जाता है। इसका निश्चय तौर पर यह अर्थ नहीं है कि हम तुरन्त सन्त बन जाते हैं वरन इसका अर्थ है कि हमें अब हमारे पापी होने तथा परमेश्वर के पवित्र होने का बोध जाता है। इसके अलावा हमें क्रूस और इन दोनों तथ्यों के बीच की खाई के लिए सेतू बनाने हेतू उसके कार्य के बारे में पता चल जाता है। यीशु अब हमें धर्मी जन के रूप में घोषित करते हैं, हमारे पापों हेतु उसकी मृत्यु के लिए धन्यवाद करें। अतः इससे हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ना चाहिए? देखिये, प्रारम्भ में हमें परमेश्वर का धन्यवाद देना चाहिए कि उसने हमें हमारे पापों के परिणाम स्वरूप होने वाली अनन्त प्रतिक्रिया से बचा लिया है। हमें पश्चाताप को अपनी जीवनशैली का एक हिस्सा बना लेना चाहिए इसका अर्थ है कि हमें बिना किसी हिचकिचाहट के प्रतिदिन अपनी गलतियों को यह जानते हुए स्वीकार कर लेना चाहिए कि हमारा परमेश्वर हम से प्रेम करता तथा हमें क्षमा करता है। यह जानना हमारे लिए अति महत्वपूर्ण है कि बिना पश्चाताप के पापों की क्षमा नहीं है। उसके बाद हमें अपना जीवन इस वास्तविकता के साथ बिताना चाहिए कि अपना उद्धार कमाने के लिए हम ने कुछ नहीं किया है वरन यह हमें परमेश्वर की भलाई और उसके अनुग्रह से प्राप्त हुआ है। अन्त में, हमारा उद्धार केवल अपने आप को बचाने के लिए नहीं हुआ है वरन हमें दूसरों को भी यीशु के बारे में बताना है। यदि उसने हमें बचाया है तो वह दूसरों को भी बचा सकता है। वे उसे अभी नहीं पहिचान पाएंगे, लेकिन हमारे जीवन की गवाही और हमारा परिवर्तन लोगों के जीवन में एक उत्प्रेरक का कार्य कर सकता है।
जब आप अपने नवीन जीवन के नयेपन में होकर जीवन जीते हैं तो क्या आप प्रतिदिन इस ज्ञान के आनन्द के साथ जागेगें कि इस संसार के उद्धारकर्ता ने आपको आप से अपने लिए बचाया है। आप वास्तव में मृत्यु दण्ड के योग्य थे। यह बात अपने आपको स्मरण दिलाएं और दूसरों के सामने भी इसी बात की गवाही दें।
प्रार्थनाः
प्रिय परमेश्वर,
अपने पुत्र यीशु के द्वारा मुझे बचाने के लिए मैं आपका धन्यवाद देता हूं। मैं आपसे निवेदन करता हूं कि आप मेरे विचारों, बातों और कामों द्वारा किये गये पापों को क्षमा करें। मुझे अपने जीवन में और ज़्यादा आपकी आवश्यकता है। प्रभु आप मुझे अपने मधुर दया और उदार अनुग्रह का स्मरण कराते रहें।
होने दें कि मेरा जीवन, आपके द्वारा की गयी भलाई का गवाह बनने पाए।
यीशु के नाम में आमीन।
About this Plan

हमारा संसार ज़्यादातर समयों में अनिश्चित व उथल पुथल जान पड़ता है। यदि परमेश्वर के पुत्र, यीशु न होते तो, हमारे पास कोई आशा नहीं होती। हर एक क्रिसमस हमें इम्मानुएल रूपी उपहार की याद दिलाता है- परमेश्वर का हमारे साथ होना एक उपहार है जो हमेशा बना रहता है। हम अब से लेकर सर्वदा तक कभी भी अकेले नहीं हैं। यह हमारे लिए एक ख़ुशी की बात है।
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