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तेखअ हुऐ सैणैं, प्रोहत अर शास्त्री कठा संघा किई आप्पू मांझ़ै सलाह कि ऐबै आजू किज़ै करनअ। तिन्‍नैं दैनै तिन्‍नां समाद पजैल़ै सपाही लै खास्सी च़ंदीए ढब्बै रेशपत संघा डाहअ तिन्‍नां का इहअ बोली, “ऐहा गल्‍ला निं कोही का खोज़ी। तम्हैं बोलै हथू लोगा का इहअ कि राची तै हाम्हैं सुत्तै दै अर तेऊए च़ेल्‍लै पाई राची ईशूए ल्हास च़ोरी। ज़ै ऐहा गल्‍लो थोघ रोमी राज़पाल पिलातुसा का लागे, तेता लै समझ़ाऊंमै तेऊ हाम्हैं कि थारअ निं एथ किछ़ै कशूर आथी, ऐहा गल्‍लो फिकर निं तम्हैं करी।” तिन्‍नैं सपाही निंयैं ढब्बै अर ज़िहै तिंयां यहूदी सैणैं शगरेऊई तै डाहै दै, तिन्‍नैं खोज़ी होरी लोगा का तेही ई झ़ुठी गल्‍ला। अह गल्‍ल आसा आझ़ तैणीं बी यहूदी मांझ़ै सोभी एही ई समझ़ी दी।

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