प्रेरितों 2
2
पेन्तेकॉस्त पर्व पर पवित्र आत्मा का उतरना
1यहूदियों के पेन्तेकॉस्त पर्व#2:1 पेन्तेकॉस्त पर्व फ़सह के बाद का पचासवां दिन; यह वह दिन था जब यहूदी लोग फसल के पर्व मनाते थे. निर्ग 34:22; लेवी 23:15‑22 के दिन, जब शिष्य एक स्थान पर इकट्ठा थे, 2सहसा आकाश से तेज आंधी जैसी आवाज़ सारा घर फैल गई, जहां वे सब बैठे थे. 3तब उनके सामने ऐसी ज्वाला प्रकट हुई जिसका आकार जीभ के समान था, जो अलग होकर उनमें से प्रत्येक व्यक्ति पर जाकर ठहरती गई. 4वे सभी पवित्र आत्मा से भरकर पवित्र आत्मा द्वारा दी गई अन्य भाषाओं में बातें करने लगे.
5उस समय आकाश के नीचे के हर एक देश से आए श्रद्धालु यहूदी येरूशलेम में ही ठहरे हुए थे. 6इस कोलाहल को सुनकर वहां भीड़ इकट्ठा हो गई. वे सभी आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि वे सभी हर एक को अपनी निज भाषा में बातें करते हुए सुन रहे थे. 7अचंभित हो वे एक दूसरे से पूछ रहे थे, “क्या ये सभी गलीलवासी नहीं हैं? 8तब यह क्या हो रहा है, जो हममें से हर एक विदेशी इन्हें हमारी अपनी-अपनी मातृभाषा में बातें करते हुए सुन रहा है! 9पारथी, मादी, इलामी और मेसोपोतामियावासी, यहूदिया तथा कप्पादोकिया, पोन्तॉस तथा आसिया, 10फ़्रिजिया, पम्फ़ूलिया, मिस्र, और लिबियावासी, जो क्रेते के आस-पास है; रोमी के रहनेवाले 11यहूदी तथा दीक्षित यहूदी, क्रेती तथा अरबी, सभी अपनी-अपनी मातृभाषा में इनके मुख से परमेश्वर के चमत्कार के विषय में सुन रहे हैं!” 12चकित और घबराकर वे एक दूसरे से पूछ रहे थे, “यह क्या हो रहा है?”
13किंतु कुछ अन्य लोग ठट्ठा कर कह रहे थे, “इन्होंने कुछ अधिक मधु ही पी रखी है.”
भीड़ को पेतरॉस का संबोधन
14तब ग्यारह के साथ पेतरॉस ने खड़े होकर ऊंचे शब्द में कहना प्रारंभ किया: “यहूदियों तथा येरूशलेम निवासियो, आपके लिए इस विषय को समझना अत्यंत आवश्यक है; इसलिये मेरी बातों को ध्यानपूर्वक सुनिए: 15जैसा आप समझ रहे हैं, ये व्यक्ति नशे में नहीं हैं क्योंकि यह दिन का तीसरा ही घंटा है! 16वास्तव में, यह योएल भविष्यवक्ता द्वारा की गई इस भविष्यवाणी की पूर्ति है:
17“ ‘अंत के दिनों में, यह परमेश्वर की आवाज़ है,
मैं अपना आत्मा सब मनुष्यों पर उंडेलूंगा.
तुम्हारे बेटे और बेटियां भविष्यवाणी करेंगे,
तुम्हारे बुज़ुर्ग लोग स्वप्न देखेंगे,
तुम्हारे जवान दर्शन देखेंगे.
18मैं उन दिनों में अपने दास, और दासियों,
पर अपना आत्मा उंडेल दूंगा,
और वे भविष्यवाणी करेंगे.
19मैं ऊपर आकाश में अद्भुत चमत्कार
और नीचे पृथ्वी पर लहू,
आग और धुएं के बादल के अद्भुत चिह्न दिखाऊंगा.
20प्रभु के उस वैभवशाली और महिमामय दिन के
पूर्व सूर्य अंधेरा
और चंद्रमा लहू समान हो जाएगा.
21तथा हर एक, जो प्रभु का नाम पुकारेगा,
वह उद्धार प्राप्त करेगा.’#2:21 योए 2:28‑32
22“इस्राएली प्रियजन, ध्यान से सुनिए! नाज़रेथवासी#2:22 मत्ति 2:23 येशु को, जिन्हें आप जानते हैं, जिन्हें परमेश्वर ने आपके मध्य चमत्कार, आश्चर्यकर्म तथा चिह्नों के द्वारा प्रकट किया, 23परमेश्वर की निर्धारित योजना तथा पूर्व ज्ञान में आपके हाथों में अधर्मियों की सहायता से सौंप दिया गया कि उन्हें क्रूस पर चढ़ाकर मृत्यु दंड दिया जाए; 24किंतु परमेश्वर ने उन्हें मृत्यु के दर्द से छुड़ाकर मरे हुओं में से जीवित कर दिया क्योंकि यह असंभव था कि मृत्यु उन्हें अपने बंधन में रख सके. 25दाविद ने उनके विषय में कहा था:
“ ‘मैं सर्वदा प्रभु को निहारता रहा
क्योंकि वह मेरी दायीं ओर हैं,
कि मैं लड़खड़ा न जाऊं.
26इसलिये मेरा हृदय आनंदित और मेरी जीभ मगन हुई;
इसके अलावा मेरा शरीर भी आशा में बसेगा,
27क्योंकि आप न तो मेरी आत्मा को अधोलोक में छोड़ेंगे
और न अपने पवित्र जन के शव को सड़ने देंगे.
28आपने मुझ पर जीवन का मार्ग प्रकट कर दिया.
आप मुझे अपनी उपस्थिति में आनंद से भर देंगे.’#2:28 स्तोत्र 16:8‑11
29“प्रियजन, पूर्वज दाविद के विषय में यह बिलकुल सच है कि उनकी मृत्यु हुई तथा उनके शव को कब्र में भी रखा गया. वह कब्र आज भी वहीं है. 30इसलिये उनके भविष्यवक्ता होने के कारण तथा इसलिये भी कि उन्हें यह मालूम था कि परमेश्वर ने शपथ ली थी कि उन्हीं का एक वंशज सिंहासन पर बैठाया जाएगा, 31होनेवाली घटनाओं को साफ़-साफ़ देखते हुए दाविद ने येशु मसीह के पुनरुत्थान का वर्णन किया कि येशु मसीह न तो अधोलोक में छोड़ दिए गए और न ही उनके शव को सड़न ने स्पर्श किया. 32इन्हीं येशु को परमेश्वर ने मरे हुओं में से उठाकर जीवित किया. हम इस सच्चाई के प्रत्यक्ष साक्षी हैं. 33परमेश्वर की दायीं ओर सर्वोच्च पद पर बैठकर, पिता से प्राप्त पवित्र आत्मा लेकर उन्होंने हम पर उंडेल दिया, जो आप स्वयं देख और सुन रहे हैं. 34यद्यपि दाविद उस समय स्वर्ग नहीं पहुंचे थे तौभी उन्होंने स्वयं कहा था,
“ ‘प्रभु परमेश्वर ने मेरे प्रभु से कहा:
“मेरी दायीं ओर बैठे रहो
35मैं तुम्हारे शत्रुओं को
तुम्हारे अधीन करूंगा.”#2:35 स्तोत्र 110:1’
36“इसलिये सारा इस्राएल निश्चित रूप से यह जान ले कि इन्हीं येशु को, जिन्हें तुम लोगों ने क्रूसित किया, परमेश्वर ने प्रभु और मसीह पद से सम्मानित किया.”
37इस बात ने उनके हृदयों को छेद दिया. उन्होंने पेतरॉस और शेष प्रेरितों से जानना चाहा, “प्रियजन, अब हमारे लिए क्या करना सही है?”
38पेतरॉस ने उत्तर दिया, “मन फिराव कीजिए तथा आप में से हर एक येशु मसीह के नाम में पाप क्षमा का बापतिस्मा ले—आपको दान के रूप में पवित्र आत्मा मिलेगा; 39क्योंकि यह प्रतिज्ञा आपके, आपकी संतान और उन सबके लिए भी है, जो अभी दूर-दूर हैं तथा प्रभु परमेश्वर जिनको अपने पास बुलाने पर हैं.”
40पेतरॉस ने अनेक तर्क प्रस्तुत करते हुए उनसे विनती की, “स्वयं को इस टेढ़ी पीढ़ी से बचाए रखिए.” 41जितनों ने पेतरॉस के प्रवचन को स्वीकार किया, उन्होंने बापतिस्मा लिया. उस दिन लगभग तीन हज़ार व्यक्ति उनमें शामिल हो गए.
नए विश्वासियों की घनिष्ठ एकता
42वे सभी लगातार प्रेरितों की शिक्षा के प्रति समर्पित होकर, पारस्परिक संगति, प्रभु-भोज की क्रिया और प्रार्थना में लीन रहने लगे. 43प्रेरितों द्वारा किए जा रहे चमत्कार तथा अद्भुत चिह्न सभी के लिए आश्चर्य का विषय बन गए थे. 44मसीह के सभी विश्वासी घनिष्ठ एकता में रहने लगे तथा उनकी सब वस्तुओं पर सबका एक सा अधिकार था. 45वे अपनी संपत्ति बेचकर, जिनके पास कम थी उनमें बांटने लगे. 46हर रोज़ वे मंदिर के आंगन में एक मन हो नियमित रूप से इकट्ठा होते, भोजन के लिए एक दूसरे के घर में निर्मल भाव से आनंदपूर्वक सामूहिक रूप से भोजन करते 47तथा परमेश्वर का गुणगान करते थे. वे सभी की प्रसन्नता के भागी थे. परमेश्वर इनमें दिन-प्रतिदिन उनको मिलाते जा रहे थे, जो उद्धार प्राप्त कर रहे थे.
Nu geselecteerd:
प्रेरितों 2: HCV
Markering
Kopiëren
Vergelijk
Delen
Wil je jouw markerkingen op al je apparaten opslaan? Meld je aan of log in
Holy Bible, Hindi Contemporary Version™ | Copyright © 2016, 2019, 2026 by Biblica, Inc. | Used with permission. All rights reserved worldwide.