प्रेरितन के काम 7
7
स्तिफनुस कौ पिरचार
1तब महा पुरोहित ने स्तिफनुस ते कही, “का जे बात सही है?”
2बानें कही, “हे भईयाओ और बुजुर्गो मेरी बात सुनो। जब हमारौ पिता अब्राहम हारान में रैहबे ते पैहले जब मेसोपोटामिया में हतो, तब महिमा मय परमेस्वर ने बाय दरसन दये। 3और बाते कही कै, ‘तू अपने देस और अपने कुटुम्ब ते निकरकै बा देस में चलौ जा, जाय मैं तोय दिखाऊंगौ।’ 4तब बू कसदियन के देस ते निकर के हारान में जायकै रैहबे लगौ, और वाके पिता की मौत के बाद परमेस्वर ने बाय मांते जा देस में लायकें बसायौ जामें अब तुम रैहतो हो। 5परमेस्वर नें बाय कछु बिरासत नांय दयी य्हां तक कि पाम रखबे काजैऊ जगैह नांय दयी हती, पर जि प्रतिग्या करी कै, ‘मैं जा देस कूं, तेरे और तेरे बाद तेरे वंस के हात में कर दुंगो।’ बा समै बापै कोई बेटा नांय हतो। 6और परमेस्वर ने ज्यों कही, ‘कै तेरी सन्तान के लोग पराये देस में परदेसी हुंगे, और बे उन्हें गुलाम बनांगे, और चार सौ साल तक दुख दिंगे।’ 7फिर परमेस्वर ने कही, ‘जा जाति के बे गुलाम हुंगे, बाय मैं दन्ड दुंगो और जाके बाद बे निकरकें जा जगैह पै मेरी सेबा करिंगे।’ 8तब परमेस्वर नें अब्राहम ते खतना की बाचा बांधी। और जा हालत में इसहाक बाते पैदा भयौ और आठमें दिना वाकौ खतना करौ गयौ, और इसहाक ते याकूब और याकूब ते बारह कुलपति पैदा भए।
9“उन कुलपतिन ने यूसुफ ते जलन करकें बाय दास बनबे काजै मिस्र देस में जाने बारेन के हातन में बेच दयौ। पर परमेस्वर वाके संग हतो। 10और परमेस्वर नें यूसुफ कूं वाके सब दुख और कलेसन में ते छुड़ायकै मिस्र के राजा फिरौन के आगे किरपा और बुद्धि दयी, और बानें बाय मिस्र पै और अपने सबरे घर पै अधिकारी ठहरायौ। 11तब मिस्र और कनान के सबरे देसन में अकाल परौ, जाते भारी क्लेस भयी, और हमारे बाप-दादन कूं खाबे काजै नाज नांय मिलौ। 12जब याकूब ने जि सुनीं कै, मिस्र में नाज है, अपने बेटन कूं, हमारे पुरखन कूं पैहली बार भेजौ। 13और दूसरी यात्रा के मौके पै यूसुफ ने अपने भईयन के सामने अपने आपकूं पिरकट करौ और तब मिस्र के राजा फिरौन कूं यूसुफ की जाति मालूम है गई। 14तब यूसुफ ने अपने पिता याकूब और अपने सबरे कुटुम्ब कूं, जो पिचैत्तर आदमी हते, उनकूं मिस्र में बुलबायौ। 15याकूब मिस्र में गयौ मांपै बू और हमारे पुरखा मर गए। 16और बाद में उनकी लास सेकेम में लाई गयी और कबर में रखी गयी, जाय अब्राहम ने चांदी दैकें सेकेम में हमोर की सन्तान ते मोल लयौ हतो।
17“पर जब बा प्रतिग्या के पूरे हैबे कौ समै जौरे आयौ, जो परमेस्वर ने अब्राहम ते करौ हतो, तौ मिस्र में हमारे लोग बढ़ गए, और भौत है गए। 18जाके बाद मिस्र में दूसरौ राजा भयौ जो यूसुफ कूं नांय जानत हतौ। 19बानें हमारी जाति ते चतुराई करकें, हमारे बाप-दादन के संग इतनौ बुरौ बौहार करौ। कै उन्नै अपने बालक फैंकने परे के, बे जीबित नांय रहें।
20“बाई समै मूसा पैदा भयौ। बू परमेस्वर की नजर में भौत खूब सूरत हतौ, और बू तीन महीना तक अपने पिता के घर में पालौ गयौ। 21पर जब मूसा कूं घर के बाहर छोड़ दयौ गयौ तब बू फिरौन की बेटी कूं मिल गयौ, और अपनों बेटा मानकें पालौ। 22और मूसा कूं मिस्रीयों की सबरी बिद्या पढ़ाई गई, और बू बातन में और कामन में सामर्थी हतो।
23“जब मूसा चालीस साल कौ भयौ, तौ वाके मन में आयौ कै, ‘मैं अपने इसरायली भईयन ते मिलूं।’ 24और बानें एक इसरायली आदमी पै अन्याय होत भये देखकें वाकौ पछ लयौ और मिस्रीयों कूं मार मारकै वाकौ बदलौ लयौ। 25मूसा नें सोची कै, ‘मेरे भईया समझिंगे कै, परमेस्वर मेरे हातन ते उनकौ उद्धार करैगौ।’ पर बे बाय समझ नांय पाये। 26दूसरे दिना जब बिनमें ते दो इसरायली लोग आपस में लड़ रहे हते, तब बू बिनके जौरे गयौ, और बू जि कैहके बिनमें मेल करबे काजै समझायौ, ‘हे जबानों, तुमतौ भईया भईयाओ। एक दूसरे पै चौं अन्याय कर रयेऔ?’
27“पर बा आदमी नें जो अपने पड़ौसी के संग अन्याय कर रयौ हतो, बानें मूसा कूं धक्का मारते भये कही कै, ‘तोय कौनें हम पै हाकिम और न्यायी ठहराऔऐ? 28जैसे तैने कल बा मिस्री कूं मार डारौ। का तू बैसेई मोऊए मार डारबौ चाहतुऐ?’ 29मूसा नें जब जि बात सुनीं तौ बू मांते चलौ गयौ और मिद्यान देस में परदेसी के रूप में रहबे लगौ। म्हांपै वाके दो बेटा पैदा भए।
30“जब पूरे चालीस साल बीत गए, तब मूसा कूं सिने पहाड़ के पास बेहड़ में एक जलती भई झाड़ी की लपटन के बीच में एक सुरग दूत ने दरसन दये। 31मूसा ने बू दरसन देखकें अचम्भौ करौ, और जब देखबे के काजै जौरे आयौ, तौ पिरभू की जि अबाज आई, 32‘मैं तेरे बाप-दादन कौ, अब्राहम कौ, इसहाक कौ और याकूब कौ परमेस्वर हूं।’ तब तौ मूसा कांप उठौ, य्हां तक कै बाय देखबे कीऊ हिम्मत नांय रही।
33“तब पिरभू ने बाते कही, ‘अपने पामन ते जूती उतार लै, चौंकि जा जगैह तू खड़ौऐ, बू पबित्र धरती है। 34मैंनें मिस्र में अपने लोगन की दुर्दसा देखी है और उनकी आह और उनकौ रोयबौ सुन लयौऐ। जामारै मैं उन्नें छुड़ायबे के काजै उतरौऊं। अब आ, मैं तोय मिस्र में भेजुंगो।’
35“जाई मूसा कूं उन्नै जि कहिकें नांय अपनांयौ कै ‘तू कोऐ और कौने हम पै हाकिम और न्यायी ठहरायौए?’ बाई कूं परमेस्वर ने सुरग दूत के द्वारा, जाने बाय झाड़ी में दरसन दये हते हाकिम और छुड़ायबे बारौ ठहरायके बिनके जौरे भेजौ। 36जि बेई मूसा है जो मिस्र देस और लाल समुन्दर और बेहड़ में चालीस साल तक अदभुत काम और चिन्न दिखाय दिखायकें उन्नें निकार लायौ। 37जि बैई मूसा है, जाने इसरायलियन ते कही हती, ‘परमेस्वर तुमारे भईयन में ते तुमारे काजै मो जैसौ एक परमेस्वर की बात बतायबे बारौ भेजे।’ 38जि बैई है, जो बेहड़ में हमारे इसरायली बाप दादान के संग हतो और जाते सिने पहाड़ पै सुरग दूत ने बात करीं हतीं। बाई कूं परमेस्वर कौ जीबित वचन मिलौ, जाते बू बाय हम लोगन कूं सुनाबै।
39“पर हमारे बाप दादन्नें वाकी बात मानबौ न चाही, पर बाय हटायकै अपने मन मिस्र की ओर फेरैं। 40और बिन्नें हारून ते कही, ‘हमारे काजै ऐसौ देबता बना, जो हमें रस्ता दिखाबै। चौंकि जो मूसा हमें मिस्र देस ते निकार लायौ, हम नांय जानत कै वाकौ का भयौ।’ 41उन दिनन में उन्नें एक बछड़ा बनांयकें, वाकी मूरत के आगे बलि चढ़ाई और बे अपने हातन के कामन में मगन हैबे लगे। 42जामारै परमेस्वर ने बिनते मौंह मोड़ लयौ हतो। बिनें आकास की सक्तीन की पूजा करबे काजै छोड़ दयौ हतो। जैसौ कै परमेस्वर की ओर ते बात बतायबे बारेन की किताब में लिखौ भयौऐ,
“ ‘हे इसरायल के घराने,
का तुम बेहड़ में चालीस साल तक पसुबलि और अन्न बलि मेरे काजै चढ़ाबते रहे?
43तुम मोलेक के तम्बू और अपने देबता
रिफान देबता के तारे कूं अपने संग लै गये हते।
बिन मूरतीन कूंअऊं तुम लै गये जो तुमने दन्डबत करबे काजै बनाई हतीं।
जामारै मैं तुम लोगन कूं बेबीलोन देस ते निकारकें बाहर भेजुंगो।’
44“गबाही कौ तम्बू बीहड़न में हमारे बाप दादेन के संग हतो। मूसा कूं परमेस्वर ने जाके बारे में जि आदेस दयो, ‘जो तेने देखौऐ, आयकें वाके अनुसार जाय बना।’ 45बाई तम्बू कूं हमारे बाप दादे पैहले समै ते पायकें, यहोसू के संग ज्हां ले आऐ, जा समै उन्नें उन गैर यहुदिन कौ अधिकार पायौ जिनकूं परमेस्वर ने हमारे बाप-दादन के सामने ते निकार दयौ हतो, और बू तम्बू दाऊद राजा के समै तक रहौ। 46दाऊद पै परमेस्वर ने किरपा करी, जामारै बानें बिनती करी कै, ‘मैं याकूब के परमेस्वर के रैहबे काजै जि जगैह ठहराऊं।’ 47पर सुलेमान ने परमेस्वर के काजै भवन बनांयौ।
48“पर परम पिरधान, हात के बनाए घरन में नांय रैहतु, जैसी कै परमेस्वर की बात बतायबे बारेन ने कही हती,
49“ ‘पिरभू यौं कैहतुऐ,
सुरग मेरी राजगद्दी है
और धरती मेरे पामन की चौकी है,
मेरे काजै तुम कैसौ घर बनाओगे,
और मेरे आराम की कौन सी जगैह होगी?
50का जे सब चीज मेरे हात की बनाई भई नांय?’
51“अरे हठीले लोगो, तुम न तौ सुनबौ चांहत और नांय समझबौ चांहत। तुम सदां पबित्र आतमा कौ बिरोध करतौ। जैसौ तुमारे बाप दादा करते हते, बैसेई तुमऊं करतौ। 52तुमारे बाप-दादन ने, काऊ परमेस्वर की बात बतायबे बारेन कूं न छोड़ो जिनकूं न सतायौ होय। उन्नें तौ बू परमेस्वर की ओर ते बात बताबे बारेऊ कूंअऊं मार डारौ जिन्नें भौत पैहले तेई बा धरमी के आयबे के बारे में भविस्यबानी करी हती, और अब तुमऊ बा धरमी कूं धोखे ते पकरबाबे बारे और मार डारबे बारे भए। 53तुमने सुरग दूतन के द्वारा व्यबस्था तौ पाई, पर वाकौ पालन नांय करौ।”
स्तिफनुस की हत्या
54महा सभा के लोगन नें स्तिफनुस की बात सुनीं तौ बे आग बबूला हे गए और बापै दांत पीसबे लगे। 55पर बानें पबित्र आतमा ते भरकै सुरग के माऊं देखौ और परमेस्वर की महिमा कूं और ईसू कूं परमेस्वर की दाहिनी ओर ठाड़ौ देखकें कही, 56“देखौ, मैं सुरग कूं खुलौ भयौ, और मनुस्य के बेटा कूं परमेस्वर के सीदे हात की ओर ठाड़ौ भयौ देखतूं।”
57तब उन्नें बड़े अबाज ते चिल्लायकै अपने कान बन्द कर लए, और फिर बे सब मिलकै बापै झपटे। 58 बे दोस लगाबे बारे बाय घसीटत भये येरूसलेम नगर ते बाहर लाये। बिन्नें पत्थर मार करबे काजै अपनी लोई उतारकै साऊल नामके जबान के पामन में रखी। 59और जब बे स्तिफनुस पै पत्थर मार कर रये हते तब बू जि कैहकै पिराथना करत रहौ कै, “हे पिरभू ईसू, मेरी आतमा कूं ग्रहन कर।” 60फिर बू घुटने टेककै ऊंची अबाज ते चिल्लायौ, “हे पिरभू, जि पाप इन पै मत लगा।” जि कहिकें बानें अपने पिरान छोड़ दिये। साऊल वाकी हत्या में सहमत हतो।
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स्तिफनुस कौ पिरचार
1तब महा पुरोहित ने स्तिफनुस ते कही, “का जे बात सही है?”
2बानें कही, “हे भईयाओ और बुजुर्गो मेरी बात सुनो। जब हमारौ पिता अब्राहम हारान में रैहबे ते पैहले जब मेसोपोटामिया में हतो, तब महिमा मय परमेस्वर ने बाय दरसन दये। 3और बाते कही कै, ‘तू अपने देस और अपने कुटुम्ब ते निकरकै बा देस में चलौ जा, जाय मैं तोय दिखाऊंगौ।’ 4तब बू कसदियन के देस ते निकर के हारान में जायकै रैहबे लगौ, और वाके पिता की मौत के बाद परमेस्वर ने बाय मांते जा देस में लायकें बसायौ जामें अब तुम रैहतो हो। 5परमेस्वर नें बाय कछु बिरासत नांय दयी य्हां तक कि पाम रखबे काजैऊ जगैह नांय दयी हती, पर जि प्रतिग्या करी कै, ‘मैं जा देस कूं, तेरे और तेरे बाद तेरे वंस के हात में कर दुंगो।’ बा समै बापै कोई बेटा नांय हतो। 6और परमेस्वर ने ज्यों कही, ‘कै तेरी सन्तान के लोग पराये देस में परदेसी हुंगे, और बे उन्हें गुलाम बनांगे, और चार सौ साल तक दुख दिंगे।’ 7फिर परमेस्वर ने कही, ‘जा जाति के बे गुलाम हुंगे, बाय मैं दन्ड दुंगो और जाके बाद बे निकरकें जा जगैह पै मेरी सेबा करिंगे।’ 8तब परमेस्वर नें अब्राहम ते खतना की बाचा बांधी। और जा हालत में इसहाक बाते पैदा भयौ और आठमें दिना वाकौ खतना करौ गयौ, और इसहाक ते याकूब और याकूब ते बारह कुलपति पैदा भए।
9“उन कुलपतिन ने यूसुफ ते जलन करकें बाय दास बनबे काजै मिस्र देस में जाने बारेन के हातन में बेच दयौ। पर परमेस्वर वाके संग हतो। 10और परमेस्वर नें यूसुफ कूं वाके सब दुख और कलेसन में ते छुड़ायकै मिस्र के राजा फिरौन के आगे किरपा और बुद्धि दयी, और बानें बाय मिस्र पै और अपने सबरे घर पै अधिकारी ठहरायौ। 11तब मिस्र और कनान के सबरे देसन में अकाल परौ, जाते भारी क्लेस भयी, और हमारे बाप-दादन कूं खाबे काजै नाज नांय मिलौ। 12जब याकूब ने जि सुनीं कै, मिस्र में नाज है, अपने बेटन कूं, हमारे पुरखन कूं पैहली बार भेजौ। 13और दूसरी यात्रा के मौके पै यूसुफ ने अपने भईयन के सामने अपने आपकूं पिरकट करौ और तब मिस्र के राजा फिरौन कूं यूसुफ की जाति मालूम है गई। 14तब यूसुफ ने अपने पिता याकूब और अपने सबरे कुटुम्ब कूं, जो पिचैत्तर आदमी हते, उनकूं मिस्र में बुलबायौ। 15याकूब मिस्र में गयौ मांपै बू और हमारे पुरखा मर गए। 16और बाद में उनकी लास सेकेम में लाई गयी और कबर में रखी गयी, जाय अब्राहम ने चांदी दैकें सेकेम में हमोर की सन्तान ते मोल लयौ हतो।
17“पर जब बा प्रतिग्या के पूरे हैबे कौ समै जौरे आयौ, जो परमेस्वर ने अब्राहम ते करौ हतो, तौ मिस्र में हमारे लोग बढ़ गए, और भौत है गए। 18जाके बाद मिस्र में दूसरौ राजा भयौ जो यूसुफ कूं नांय जानत हतौ। 19बानें हमारी जाति ते चतुराई करकें, हमारे बाप-दादन के संग इतनौ बुरौ बौहार करौ। कै उन्नै अपने बालक फैंकने परे के, बे जीबित नांय रहें।
20“बाई समै मूसा पैदा भयौ। बू परमेस्वर की नजर में भौत खूब सूरत हतौ, और बू तीन महीना तक अपने पिता के घर में पालौ गयौ। 21पर जब मूसा कूं घर के बाहर छोड़ दयौ गयौ तब बू फिरौन की बेटी कूं मिल गयौ, और अपनों बेटा मानकें पालौ। 22और मूसा कूं मिस्रीयों की सबरी बिद्या पढ़ाई गई, और बू बातन में और कामन में सामर्थी हतो।
23“जब मूसा चालीस साल कौ भयौ, तौ वाके मन में आयौ कै, ‘मैं अपने इसरायली भईयन ते मिलूं।’ 24और बानें एक इसरायली आदमी पै अन्याय होत भये देखकें वाकौ पछ लयौ और मिस्रीयों कूं मार मारकै वाकौ बदलौ लयौ। 25मूसा नें सोची कै, ‘मेरे भईया समझिंगे कै, परमेस्वर मेरे हातन ते उनकौ उद्धार करैगौ।’ पर बे बाय समझ नांय पाये। 26दूसरे दिना जब बिनमें ते दो इसरायली लोग आपस में लड़ रहे हते, तब बू बिनके जौरे गयौ, और बू जि कैहके बिनमें मेल करबे काजै समझायौ, ‘हे जबानों, तुमतौ भईया भईयाओ। एक दूसरे पै चौं अन्याय कर रयेऔ?’
27“पर बा आदमी नें जो अपने पड़ौसी के संग अन्याय कर रयौ हतो, बानें मूसा कूं धक्का मारते भये कही कै, ‘तोय कौनें हम पै हाकिम और न्यायी ठहराऔऐ? 28जैसे तैने कल बा मिस्री कूं मार डारौ। का तू बैसेई मोऊए मार डारबौ चाहतुऐ?’ 29मूसा नें जब जि बात सुनीं तौ बू मांते चलौ गयौ और मिद्यान देस में परदेसी के रूप में रहबे लगौ। म्हांपै वाके दो बेटा पैदा भए।
30“जब पूरे चालीस साल बीत गए, तब मूसा कूं सिने पहाड़ के पास बेहड़ में एक जलती भई झाड़ी की लपटन के बीच में एक सुरग दूत ने दरसन दये। 31मूसा ने बू दरसन देखकें अचम्भौ करौ, और जब देखबे के काजै जौरे आयौ, तौ पिरभू की जि अबाज आई, 32‘मैं तेरे बाप-दादन कौ, अब्राहम कौ, इसहाक कौ और याकूब कौ परमेस्वर हूं।’ तब तौ मूसा कांप उठौ, य्हां तक कै बाय देखबे कीऊ हिम्मत नांय रही।
33“तब पिरभू ने बाते कही, ‘अपने पामन ते जूती उतार लै, चौंकि जा जगैह तू खड़ौऐ, बू पबित्र धरती है। 34मैंनें मिस्र में अपने लोगन की दुर्दसा देखी है और उनकी आह और उनकौ रोयबौ सुन लयौऐ। जामारै मैं उन्नें छुड़ायबे के काजै उतरौऊं। अब आ, मैं तोय मिस्र में भेजुंगो।’
35“जाई मूसा कूं उन्नै जि कहिकें नांय अपनांयौ कै ‘तू कोऐ और कौने हम पै हाकिम और न्यायी ठहरायौए?’ बाई कूं परमेस्वर ने सुरग दूत के द्वारा, जाने बाय झाड़ी में दरसन दये हते हाकिम और छुड़ायबे बारौ ठहरायके बिनके जौरे भेजौ। 36जि बेई मूसा है जो मिस्र देस और लाल समुन्दर और बेहड़ में चालीस साल तक अदभुत काम और चिन्न दिखाय दिखायकें उन्नें निकार लायौ। 37जि बैई मूसा है, जाने इसरायलियन ते कही हती, ‘परमेस्वर तुमारे भईयन में ते तुमारे काजै मो जैसौ एक परमेस्वर की बात बतायबे बारौ भेजे।’ 38जि बैई है, जो बेहड़ में हमारे इसरायली बाप दादान के संग हतो और जाते सिने पहाड़ पै सुरग दूत ने बात करीं हतीं। बाई कूं परमेस्वर कौ जीबित वचन मिलौ, जाते बू बाय हम लोगन कूं सुनाबै।
39“पर हमारे बाप दादन्नें वाकी बात मानबौ न चाही, पर बाय हटायकै अपने मन मिस्र की ओर फेरैं। 40और बिन्नें हारून ते कही, ‘हमारे काजै ऐसौ देबता बना, जो हमें रस्ता दिखाबै। चौंकि जो मूसा हमें मिस्र देस ते निकार लायौ, हम नांय जानत कै वाकौ का भयौ।’ 41उन दिनन में उन्नें एक बछड़ा बनांयकें, वाकी मूरत के आगे बलि चढ़ाई और बे अपने हातन के कामन में मगन हैबे लगे। 42जामारै परमेस्वर ने बिनते मौंह मोड़ लयौ हतो। बिनें आकास की सक्तीन की पूजा करबे काजै छोड़ दयौ हतो। जैसौ कै परमेस्वर की ओर ते बात बतायबे बारेन की किताब में लिखौ भयौऐ,
“ ‘हे इसरायल के घराने,
का तुम बेहड़ में चालीस साल तक पसुबलि और अन्न बलि मेरे काजै चढ़ाबते रहे?
43तुम मोलेक के तम्बू और अपने देबता
रिफान देबता के तारे कूं अपने संग लै गये हते।
बिन मूरतीन कूंअऊं तुम लै गये जो तुमने दन्डबत करबे काजै बनाई हतीं।
जामारै मैं तुम लोगन कूं बेबीलोन देस ते निकारकें बाहर भेजुंगो।’
44“गबाही कौ तम्बू बीहड़न में हमारे बाप दादेन के संग हतो। मूसा कूं परमेस्वर ने जाके बारे में जि आदेस दयो, ‘जो तेने देखौऐ, आयकें वाके अनुसार जाय बना।’ 45बाई तम्बू कूं हमारे बाप दादे पैहले समै ते पायकें, यहोसू के संग ज्हां ले आऐ, जा समै उन्नें उन गैर यहुदिन कौ अधिकार पायौ जिनकूं परमेस्वर ने हमारे बाप-दादन के सामने ते निकार दयौ हतो, और बू तम्बू दाऊद राजा के समै तक रहौ। 46दाऊद पै परमेस्वर ने किरपा करी, जामारै बानें बिनती करी कै, ‘मैं याकूब के परमेस्वर के रैहबे काजै जि जगैह ठहराऊं।’ 47पर सुलेमान ने परमेस्वर के काजै भवन बनांयौ।
48“पर परम पिरधान, हात के बनाए घरन में नांय रैहतु, जैसी कै परमेस्वर की बात बतायबे बारेन ने कही हती,
49“ ‘पिरभू यौं कैहतुऐ,
सुरग मेरी राजगद्दी है
और धरती मेरे पामन की चौकी है,
मेरे काजै तुम कैसौ घर बनाओगे,
और मेरे आराम की कौन सी जगैह होगी?
50का जे सब चीज मेरे हात की बनाई भई नांय?’
51“अरे हठीले लोगो, तुम न तौ सुनबौ चांहत और नांय समझबौ चांहत। तुम सदां पबित्र आतमा कौ बिरोध करतौ। जैसौ तुमारे बाप दादा करते हते, बैसेई तुमऊं करतौ। 52तुमारे बाप-दादन ने, काऊ परमेस्वर की बात बतायबे बारेन कूं न छोड़ो जिनकूं न सतायौ होय। उन्नें तौ बू परमेस्वर की ओर ते बात बताबे बारेऊ कूंअऊं मार डारौ जिन्नें भौत पैहले तेई बा धरमी के आयबे के बारे में भविस्यबानी करी हती, और अब तुमऊ बा धरमी कूं धोखे ते पकरबाबे बारे और मार डारबे बारे भए। 53तुमने सुरग दूतन के द्वारा व्यबस्था तौ पाई, पर वाकौ पालन नांय करौ।”
स्तिफनुस की हत्या
54महा सभा के लोगन नें स्तिफनुस की बात सुनीं तौ बे आग बबूला हे गए और बापै दांत पीसबे लगे। 55पर बानें पबित्र आतमा ते भरकै सुरग के माऊं देखौ और परमेस्वर की महिमा कूं और ईसू कूं परमेस्वर की दाहिनी ओर ठाड़ौ देखकें कही, 56“देखौ, मैं सुरग कूं खुलौ भयौ, और मनुस्य के बेटा कूं परमेस्वर के सीदे हात की ओर ठाड़ौ भयौ देखतूं।”
57तब उन्नें बड़े अबाज ते चिल्लायकै अपने कान बन्द कर लए, और फिर बे सब मिलकै बापै झपटे। 58 बे दोस लगाबे बारे बाय घसीटत भये येरूसलेम नगर ते बाहर लाये। बिन्नें पत्थर मार करबे काजै अपनी लोई उतारकै साऊल नामके जबान के पामन में रखी। 59और जब बे स्तिफनुस पै पत्थर मार कर रये हते तब बू जि कैहकै पिराथना करत रहौ कै, “हे पिरभू ईसू, मेरी आतमा कूं ग्रहन कर।” 60फिर बू घुटने टेककै ऊंची अबाज ते चिल्लायौ, “हे पिरभू, जि पाप इन पै मत लगा।” जि कहिकें बानें अपने पिरान छोड़ दिये। साऊल वाकी हत्या में सहमत हतो।
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