यीशु मसीह के दृष्टांतनमूना

The Parables of Jesus

दिन 11 का 36

निष्फल पेड़
मत्ती व मरकुस में हम यीशु द्वारा एक निष्फल पेड़ को श्राप देने की समानांतर कहानियां देखते हैं, तथा लूका में एक समान दृष्टांत देखते हैं जहां एक मनुष्य एक पेड़ लगाता है जो उपयुक्त रीति से फल नहीं उत्पन्न करता। हालांकि ये तीनों विवरण एक ही कहानी के नहीं हैं, इन सभी में एक पेड़ का ज़िक्र किया गया है जिसे उपयुक्त रीति से फल उत्पन्न करना चाहिए परन्तु उसके पास प्रदर्शित करने के लिए कुछ नहीं है।

मत्ती व मरकुस के विवरणों में पेड़ पर पत्ते मौजूद हैं, अर्थात यह पेड़ दिखने में स्वस्थ प्रतीत होता है परंतु इसके बावजूद कोई फल नहीं उत्पन्न हो रहा। सुसमाचारों में अनेक अवसरों पर हमारा सामना अपने जीवन में फलदायक होने की एक चुनौती व अपेक्षा से होता है। हमें केवल मुरझा जाने से बचे रहना, या केवल स्वस्थ प्रतीत होना ही नहीं बल्कि वास्तव में अपने जीवन के द्वारा फल उत्पन्न करना है।

हमें खुद को जांच कर परखना चाहिए कि हम एक परिवर्तित जीवन के फल उत्पन्न कर रहे हैं या नहीं, चेले बनाने का फल, नष्ट हो रहे लोगों तक पहुंचने का फल इत्यादि।

इस योजना के बारें में

The Parables of Jesus

यह पाठ योजना आपको यीशु द्वारा सुनाये दृष्टांतों में से लेकर जायेगी, जिससे आप यह जान सकोगे कि उसके कुछ महान उपदेश आपके लिए कितना महत्त्व रखतें हैं! बहुत से दिनों की यह पठन योजना पाठकों को चिंतन-मनन करने का समय देती है और उन्हें वर्तमान से जोड़े रहती है और उन्हें यीशु के प्रेम तथा सामर्थ के द्वारा उत्साहित करती है!

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We would like to thank Trinity New Life Church for this plan. For more information, please visit: http://www.trinitynewlife.com/