मत्तियाह पुस्तक की कुछ ज़रूरी बातें

पुस्तक की कुछ ज़रूरी बातें
प्राचीन परंपरा के अनुसार इस पुस्तक में मुक्‍तिदाता येशु के बारह प्रिय शिष्यों में से एक शिष्य मत्तियाह (मत्ती) ने उनके जीवन का वर्णन किया है। शिष्य मत्तियाह मुक्‍तिदाता येशु को यहूदियों के सबसे महान गुरु के रूप में प्रस्तुत करता है। मत्तियाह की पुस्तक में मुक्‍तिदाता येशु के प्रवचनों में से पांच शामिल हैं (5; 10; 13; 18; 23)। प्रत्येक प्रवचन गुरु के रूप में उनके शक्‍तिशाली अधिकार को दर्शाता है। ये शिक्षाएँ उस समय से गुरु येशु के सभी शिष्यों और उनके सत्संग के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गई हैं।
मत्तियाह इस बात को दिखाता है कि गुरु येशु वही मुक्‍तिदाता हैं जिनका यहूदी समाज के लोग बहुत समय से इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन मुक्‍तिदाता सिर्फ यहूदी लोगों के लिए नहीं, परंतु दुनिया के हर समाज के लोगों के लिए भी हैं (24:14; 25:32)। मुक्‍तिदाता येशु की वंशावली में, तीन महिलाओं का उल्लेख किया गया है जो यहुदी समाज से नहीं थीं (1:5,6)। प्रभुजी जन्म के समय पर्शिया देश से पंडित उनके दर्शन करने आए थे (2:1,2)। गुरु येशु के शुभ संदेश को फैलाने कार्य के द्वारा यहूदी लोगों के साथ-साथ रोम और सीरिया देश के लोगों को भी आशीर्वाद मिला (4:24; 8:5; 15:22)। और उनकी मृत्यु होने के तीन दिन बाद जब वह ज़िन्दा हो गए उन्होंने अपने शिष्यों को आज्ञा दी कि तुम यह शुभ संदेश दुनिया के हर समाज के लोगों को सुनाओ (28:19)।
मत्तियाह दिखाता है कि मुक्‍तिदाता येशु न सिर्फ अपने दिव्य ज्ञान द्वारा लोगों को उनकी कठिनाइयों के बारे में बताते, परंतु उन्हें समाधान भी देते हैं। मुक्‍तिदाता येशु के संदेशों को सुनें और उन पर अमल करके लाभ उठाएँ।
प्रार्थना - “हे परमात्मा, शिष्य मत्तियाह को मुक्‍तिदाता येशु के बारे में इस शुभ संदेश को बताने की प्रेरणा देने के लिए आपका धन्यवाद। यह आपकी कृपा है कि हमें अब गुरु येशु के चरणों में सीखने का यह अवसर प्राप्त हुआ है।”

हाइलाइट

कॉपी

तुलना

शेयर

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in