मत्तियाह 3

3
समर्पण-स्‍नान दाता योहन और उनका संदेश
लूकस 3:1-20; मरकुस 1:2-8; योहन 1:19-28
1बहुत साल बाद समर्पण-स्‍नान दाता योहन यहूदिया प्रदेश की सुनसान बंजर जगह में आए और वहाँ जमा हो रहे लोगों को यह संदेश सुनाने लगे। 2“अपने बुरे कर्मों से पश्‍चाताप करो, क्योंकि जो परमस्वर्ग में रहते है उनका शासन शुरू होने वाला है।”
3यह योहन वही व्यक्‍ति थे जिनके लिए परमात्मा के प्रवक्‍ता यशायाह ने कहा,
“सुनसान बंजर जगह में कोई ऊँची आवाज़ में पुकार रहा है,
‘प्रभु के आने के लिए रास्ते को तैयार करो
और हर बाधा को दूर करो।’”#3:3 यशायाह 40:3
4योहन ऊँट के बालों से बने कपड़े पहनते और कमर में चमड़े का बेल्ट बाँधते थे। टिड्डी और शहद उनका भोजन था। 5यरूशलम शहर, सारे यहूदिया प्रदेश और यरदन नदी के आसपास के सब क्षेत्रों से लोग उनके प्रवचन सुनने उनके पास आने लगे। 6लोगों ने अपने पापों को सबके सामने स्वीकार कर यरदन नदी में योहन से समर्पण-स्‍नान लेने लगे।
7जब योहन ने अनेक फरीसी धार्मिक पंथ और सदूकी धार्मिक पंथ के लोगों को समर्पण-स्‍नान लेने के लिए अपने पास आते देखा तब उनसे यह कहा, “ओ ज़हरीले साँपों के बच्चो! तुम लोगों को किसने परमात्मा के क्रोध से बचने का रास्ता बता दिया? 8अगर तुम लोग सच में परमात्मा के क्रोध से बचना चाहते हो तो अच्छे कर्म करो जिससे पता चले कि तुमने अपने बुरे कर्मों से पश्‍चाताप कर लिया है। 9इस धोखे में न रहना कि अब्राहम हमारे कुलपिता हैं इसलिए परमात्मा हमें दंड नहीं देंगे। मैं तुम लोगों से कहता हूँ कि परमात्मा इन पत्थरों से भी अब्राहम के लिए संतान पैदा कर सकते हैं। 10जैसे कुल्हाड़ी उन पेड़ों को काटती है जो अच्छे फल नहीं देते हैं, उसी तरह परमात्मा उन लोगों को आग से दंडित करने के लिए तैयार हैं जो अच्छे कर्म नहीं करते हैं।
11“मैं तो तुम लोगों को तुम्हारे बुरे कर्मों से पश्‍चाताप कराने के लिए पानी से समर्पण-स्‍नान देता हूँ, पर एक मुझसे अधिक शक्‍तिशाली आ रहे हैं और मैं तो इस योग्य भी नहीं कि उनकी जूतियाँ भी उठा सकूँ। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग का स्‍नान देंगे। 12इस तरह गेहूँ को भूसी से अलग कर देंगे। गेहूँ को अपने भंडार में इकट्ठा करेंगे, परंतु भूसी को उस आग में भस्म कर देंगे जो बुझेगी नहीं।”
परमस्वर्ग का खुल जाना
मरकुस 1:9-11; लूकस 3:21-22
13तब प्रभु येशु योहन से समर्पण-स्‍नान लेने के लिए गलील प्रदेश से उनके पास यरदन नदी के किनारे आए। 14किंतु योहन ने उनको रोका और यह कहा, “स्वयं मुझे आपसे समर्पण-स्‍नान लेने की ज़रूरत है, आप मेरे पास क्यों आए हैं?”
15प्रभु येशु ने उत्तर दिया, “अभी तो ऐसा ही होने दो, क्योंकि हमें जीवन का हर काम परमात्मा की आज्ञाओं के अनुसार करना है।” इस पर योहन उन्हें स्‍नान देने के लिए तैयार हो गए।
16जब प्रभु येशु समर्पण-स्‍नान लेकर जैसे ही पानी से निकले तो उनके लिए आकाश और परमस्वर्ग खुल गया, और प्रभु येशु ने परमात्मा की पवित्र आत्मा को सफेद कबूतर के समान उतरते और अपने ऊपर आते हुए देखा। 17तब परमस्वर्ग से परमात्मा की यह आवाज़ सुनाई दी, “यह मेरा प्रिय पुत्र है और इससे मैं बहुत खुश हूँ।”#3:17 यह मेरा प्रिय पुत्र है और इससे मैं बहुत खुश हूँ - ये वही शब्द हैं जिनका प्रयोग परमात्मा-ग्रंथ में इस्राएल के राजा के अभिषेक के लिए किया गया है (भजन शास्त्र 2:2) जो मुक्‍ति लाएगा और विश्‍व के सभी समाजों में न्याय स्थापित करेगा (यशायाह 42:1-4देखें)।

वर्तमान में चयनित:

मत्तियाह 3: MYG

हाइलाइट

कॉपी

तुलना

शेयर

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in