मत्तियाह 26:1-16
मत्तियाह 26:1-16 HCV
इस रहस्य के खुलने के बाद येशु ने शिष्यों को देखकर कहा, “यह तो आप लोगों को मालूम ही है कि दो दिन बाद फ़सह उत्सव है. इस समय मानव-पुत्र को क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए सौंप दिया जाएगा.” दूसरी ओर प्रधान पुरोहित और वरिष्ठ नागरिक कायाफ़स नामक महापुरोहित के घर के आंगन में इकट्ठा हुए. उन्होंने मिलकर येशु को छलपूर्वक पकड़कर उनकी हत्या कर देने का विचार किया. वे यह विचार भी कर रहे थे: “यह फ़सह उत्सव के अवसर पर न किया जाए—कहीं इससे लोगों में बलवा न भड़क उठे.” जब येशु बैथनियाह गांव में शिमओन के घर पर थे—वही शिमओन, जिन्हें पहले कोढ़ रोग हुआ था, एक स्त्री उनके पास संगमरमर के बर्तन में कीमती इत्र लेकर आई. उस इत्र को उन्होंने भोजन के लिए बैठे येशु के सिर पर उंडेल दिया. यह देख शिष्य क्रोधित हो गए, और उन्होंने पूछा, “यह बर्बादी क्यों? यह इत्र तो ऊंचे दाम पर बिक सकता था और प्राप्त धनराशि गरीबों में बांटी जा सकती थी.” इस विषय को जानकर येशु ने उन्हें झिड़कते हुए कहा, “आप लोग इन स्त्री को क्यों सता रहे हैं? इन्होंने तो मेरे हित में एक सराहनीय काम किया है. निर्धन आप लोगों के साथ हमेशा रहेंगे किंतु मैं आप लोगों के साथ हमेशा नहीं रहूंगा. मुझे मेरे अंतिम संस्कार के लिए तैयार करने के लिए इन्होंने यह इत्र मेरे शरीर पर उंडेला है. सच तो यह है कि सारे जगत में जहां कहीं यह सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, इन स्त्री के इस कार्य का वर्णन भी इसकी याद में किया जाएगा.” तब कारियोतवासी यहूदाह, जो बारह शिष्यों में से एक थे, प्रधान पुरोहितों के पास गए और उनसे विचार-विमर्श करने लगे, “यदि मैं येशु को पकड़वा दूं तो आप मुझे क्या देंगे?” उन्होंने उन्हें गिन कर चांदी के तीस सिक्के दे दिए. उस समय से यहूदाह येशु को पकड़वाने के लिए सही अवसर की ताक में रहने लगे.

