बधान 4:5-8

बधान 4:5-8 OSJ

“इहअ देश निं होर कोहै आथी ज़हा का इहअ महान धर्मीं बधान अर बिधी होए, ज़ुंण बिधाता मुल्है तम्हां का खोज़णा लै बोलअ। ज़हा देशा गिम्मी तम्हैं तेते मालक बणें, तैहा ज़ैगा मनै तम्हैं इना बधाना अर बिधी। बधान अर बिधी मनणा लै रहै शुचै-पाक्‍कै, ताकि होरी देशे लोगा का बी थोघ लागे कि तम्हां केतरी सुंबल़ी बुध आसा। एऊ बधान अर इना बिधी शूणीं बोल़णअ तिन्‍नां मणछा बी इहअ, ‘एऊ देशे लोगा भाल़ केही समझ़-बुध आसा!’ “अह ई गल्‍ल बणाआं हाम्हां होरी देशे लोगा का खास कि हाम्हां संघै आसा सह परमेशर बिधाता ज़ुंण हाम्हां संघै रहा अर ज़िधी बी हाम्हैं तेऊ का बोला, सह करा म्हारी मज़त।