1
हबकूक 1:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
बिधाता बोलअ इहअ, “देशा-देशा दैआ तम्हैं सोभ नदर, तेता भाल़ी हणैं तम्हैं रहैन ज़ुंण तेथ हंदअ आसा लागदअ। थारी ज़िऊंदी ज़िता ई करनै मुंह इहै नुआहरै काम कि तम्हां निं विश्वास ई हणअ कि इहअ बी आसा हंदअ लागअ।
አወዳድር
{{ጥቅስ}} ያስሱ
2
हबकूक 1:2
“ए बिधाता, हुंह केभै तैणीं रहूं ताखा लेर-पकार पाई मज़त मांगदअ लागी? ताह केभै तैणीं निं मेरी शुणनी? हुंह रहअ ज़ोरै-ज़ोरै बोल्दअ, ‘ज़ुल्म हुअ, ज़ुल्म हुअ!’ तूह निस्सअ हाम्हां बच़ाऊई आथी!
3
हबकूक 1:3
तंऐं किल्है रहैऊऐ मुखा ईंयां घोर उपद्रभ? बूरअ करनै आल़ै कदुष्ट मणछा लै तूह सज़ा किल्है निं दैंदअ? तूह किल्है दैआ इहअ हणैं? मणछ आसा नर्दैई हुऐ दै! सारै दी आसा ज़ुल्म अर उपद्रभ! हर ज़ैगा आसा झ़गल़ै अर काट-मार!
4
हबकूक 1:4
बधाने डअर निं रही ई आथी अर दालता दी निं नसाफ भेटदअ! कदुष्ट मणछै गोटै धर्मीं फेरा-फेर! नसाफ निं रहअ ई आथी।”