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मूल़ 32:28
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
तेऊ मर्धै बोलअ, “ऐबै निं ताह नाअं याकब रहणअ। किल्हैकि तंऐं ज़ित्तअ मणछ अर बिधाता दुही का मल्ल जुध। तैही पल़णअ तेरअ नाअं ऐबै इज़राईल।”
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मूल़ 32:26
तेखअ बोलअ तेऊ मर्धै, “राच च़ाल्ली भैई, मुंह दै ऐबै डेऊणैं!” याकबै दैनअ ज़बाब, “ज़ेभै तैणीं तूह मुल्है बर्गत निं दैए, तेभै तैणीं निं हुंह ताह छ़ाडदअ।”
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मूल़ 32:24
तेखअ डेऊअ याकब डेरै लै फिरी, संघा काटी तिधी राच एकी ज़ण्हैं। इहअ हुअ कि एक मर्ध आअ तेऊ सेटा, संघा रहअ तेऊ संघै राची भैणै तैणीं मल्ल जुधा करदअ लागी।
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मूल़ 32:30
तेखअ बोलअ याकबै, “मंऐं भाल़अ बिधाता आपणीं आछी पर तज़ी बी आसा हुंह ज़िऊंदअ!” तेऊ डाहअ तेखअ तैहा ज़ैगा नाअं पनीएल।
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मूल़ 32:25
ज़ांऊं तेऊ मर्धै ज़ाणअ कि हुंह निं एऊ का ज़िती सकदअ, तेऊ छ़ुंहीं याकबे ज़ांघे नस, संघा बधल़ूई तेऊए ज़ांघे नस।
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मूल़ 32:27
तेऊ बोलअ याकबा लै, “ताह नाअं किज़ै आसा?” याकबै दैनअ ज़बाब, “मुंह नाअं आसा याकब।”
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मूल़ 32:29
याकबै बोलअ इहअ, “ऐबै खोज़ तूह, ताह नाअं किज़ै आसा।” तेऊ बोलअ, “ताखा सच्च़ी निं थोघै कि हुंह कुंण आसा?” तेखअ दैनी तेऊ याकबा लै बर्गत।
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मूल़ 32:10
“ज़ुंण भलाई तंऐं मुंह संघै किई, हुंह नांईं त तेता जोगी आथी, ज़धू हुंह जरदण नदी पार डेऊअ त, तधू थिअ मेरै हाथै हांढणा लै सिधअ शोठअ, पर तंऐं दैनी मुल्है एही बर्गत कि भाल़ ऐबै आसा मुखा मणछा अर डागै-चैणें दूई बडै छ़ुंढ।
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मूल़ 32:32
इज़राईली निं आझ़काला बी ज़ांघे नसे ज़ोल़ा खांदै किल्है तेऊ मणछै छ़ुंहीं ती याकबे ज़ांघे नस।
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मूल़ 32:9
संघा किई याकबै बिधाता का एही प्राथणां, “हे बिधाता, तूह आसा सह ज़सरी च़ाकरी मेरअ दादू आबराम अर मेरअ बाब इसहाक करा त। तंऐं बोलअ आप्पै मुल्है कि आपणैं नातै-रिश्तैदारा सेटा लै डेऊ घअरा लै फिरी! तंऐं इहअ बी आसा बोलअ द कि तूह रहणअ मुंह संघै आप्पै।
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मूल़ 32:11
“ऐबै आसा ताखा मेरी एही अरज़, मालक, ज़ीबाण, तूह बच़ाऊ आझ़ मेरै भाई एसाबा का, मुंह लागअ हैल़अ कि तेऊ पाणै मुंह संघै मेरी बेटल़ी अर शोहरू-माठै बी मारी।