दानिय्येल 6

6
दानिय्येल के खिलाफ षडयंत्र
1कुछ साल्‍लां कै बाद एक दिन दारा नै यो आच्छा लाग्या के अपणे राज्य कै उप्पर एक सौ बीस इसे अधिपति ठहराए, जो पूरे राज्य म्ह राज करण का हक राक्खै।#6:1 इस कहाँनी म्ह दारा वो दारा हो सकै सै जिसनै 522 ई. पू. तै 486 ई. पू. ताहीं राज करया। 2अर उनकै उप्पर उसनै तीन अध्यक्ष, जिन म्ह तै दानिय्येल एक था, इस करकै ठहराए, के वे उन अधिपतियाँ तै लेखा लिया करैं, अर इस रीति तै राजा का कुछ नुकसान ना होण पावै। 3जिब यो देख्या गया के दानिय्येल म्ह बढ़िया आत्मा रहवै सै, फेर उस ताहीं उन प्रधान अर अधिपतियाँ तै घणा मान-मर्यादा मिली; बलके राजा या भी सोच्या करदा के उसनै सारे राज्य कै उप्पर ठहरावै। 4फेर दुसरे अध्यक्ष अर राज्यपाल राज्य के काम कै बारै म्ह दानिय्येल कै खिलाफ दोष ढूँढ़ण लाग्गे; पर वो बिश्वासयोग्य था, अर उसके काम म्ह कोए भूल या दोष ना लिकड़या, अर वे इसा कोए अपराध या दोष ना पा सके। 5फेर वे माणस एक दुसरे तै कहण लाग्गे, “हम उस दानिय्येल के परमेसवर के नियम-कायदे नै छोड़ और किसे बारै म्ह उसकै खिलाफ कोए दोष ना पा सकागें।”
6फेर वे अध्यक्ष अर राज्यपाल राजा के धोरै जल्दबाजी तै आए, अर उसतै कह्या, “हे राजा दारा, तू युग-युग जिन्दा रहवै। 7राज्य के सारे प्रधानां नै, अर हाकिमां, अधिपतियाँ, न्यायियों, अर राज्यपालां नै आप्पस म्ह सलाह करी सै, के राजा इसा हुकम दे अर इसा कड़ा हुकम लिकाड़ै, के तीस दिन ताहीं जो कोए, हे राजा, तेरे ताहीं छोड़ किसे और माणस या देवता तै बिनती करै#6:7 कोए भी चाहे वो किसी भी बड़े पद पै हो, उरै खास मकसद दानिय्येल को बेजत करणा था पर उसकै खात्तर सारया के इनकार की जरूरत थी।, वो शेरां की माँद म्ह गेर दिया जावै। 8इस करकै इब हे राजा, इसा हुकम दे, अर इस चिट्ठी पै दस्तखत कर, जिसतै या बात मादियाँ अर फारसियां की अटल नियम-कायदे कै मुताबिक अदल-बदल ना हो सकै।” 9फेर दारा राजा नै उस आज्ञापत्र पै दस्तखत कर दिया।
शेरां की गुफा म्ह दानिय्येल
10जिब दानिय्येल नै बेरा लाग्या के उस चिट्ठी पै दस्तखत करया गया सै, फेर वो अपणे घर म्ह गया जिसकी ऊपरी कोठड़ी की खिड़कियाँ यरुशलेम की और खुली रहवै थी, अर अपणी रीति कै मुताबिक जिसा वो दिन म्ह तीन बार अपणे परमेसवर कै स्याम्ही घुटने टेककै प्रार्थना अर धन्यवाद करया करदा, उसे तरियां फेर भी करदा रह्या। 11फेर उन अधिकारियां नै जल्दबाजी तै आकै दानिय्येल ताहीं अपणे परमेसवर कै स्याम्ही बिनती करदे अर गिड़गिड़ान्दे होए पाया। 12फेर वे राजा कै धोरै जाकै, उसकी राज आज्ञा कै बारै म्ह उसतै कहण लाग्गे, “हे राजा, के तन्‍नै इस आज्ञापत्र पै दस्तखत न्ही करया के तीस दिन तक जो कोए तेरे ताहीं छोड़ किसे माणस या देवता तै बिनती करैगा, वो शेरां की माँद म्ह गेर दिया जावैगा?” राजा नै जवाब दिया, “हाँ, मादियाँ अर फारसियां के अटल नियम-कायदे के मुताबिक या बात पक्‍की सै।” 13फेर उननै राजा तै कह्या, “यहूदा राज्य के यहूदी गुलामां म्ह तै जो दानिय्येल सै, उसनै, हे राजा, ना तो तेरी ओड़ कुछ ध्यान दिया, अर ना तेरे दस्तखत करे होए आज्ञापत्र की ओड़; वो दिन म्ह तीन बार प्रार्थना करया करै सै।”
14या बात सुणकै, राजा घणा उदास होया, अर दानिय्येल ताहीं बचाण की योजना सोच्‍चण लाग्या; अर सूरज डूबण ताहीं उसनै बचाण की कोशिश करदा रह्या। 15फेर वे माणस राजा कै धोरै जल्दबाजी तै आकै कहण लाग्गे, “हे राजा, या याद राख, के मादियाँ अर फारसियां म्ह यो नियम-कायदे सै के जो-जो मनाही या हुकम राजा ठहरावै, वो न्ही बदल सकदा।”
16फेर राजा नै अपणे नौकरां ताहीं हुकम दिया, अर उननै दानिय्येल ल्याकै शेरां की माँद म्ह गेर दिया गया। उस बखत राजा नै दानिय्येल तै कह्या, “तेरा परमेसवर जिसकी तू लगातार उपासना करै सै, ओड़ै तेरे ताहीं बचावै!” 17फेर एक पत्थर ल्याकै#6:17 फेर एक पत्थर ल्याकै हो सकै सै के एक बड़ा समतल पत्थर शेर की गुफा नै ढाँप सकदा था अर बच लिकड़ण के खात्तर उसनै हटाणा दानिय्येल के खात्तर असंभव था। उस माँद के मुँह पै धरया गया, अर राजा नै उसपै अपणी अंगूठी तै, अर अपणे प्रधानां की अँगूठियाँ तै मुहर लगा दी के दानिय्येल कै बारै म्ह कुछ बदलण ना पावै।
दानिय्येल का शेरां तै बचाया जाणा
18फेर राजा अपणे महल म्ह बोहड़ गया, अर उस रात नै बिना खाणा खाए पड़या रह्या; अर उसके धोरै सुखविलास की कोए चीज न्ही पोहचाई गई, अर उसनै सारी रात नींद भी न्ही आई।
19भोर नै पौ फटते ही राजा उठ्या, अर शेरां की माँद की और फुर्ती तै चल्या गया। 20जिब राजा माँद कै धोरै आया, फेर शोक भरी आवाज तै चिल्‍लाण लाग्या अर दानिय्येल तै कह्या, “हे दानिय्येल, हे जिन्दा परमेसवर के दास, के तेरा परमेसवर जिसकी तू लगातार उपासना करै सै, तेरे ताहीं शेरां तै बच्या सक्या सै?” 21फेर दानिय्येल नै राजा तै कह्या, “हे राजा, तू युग-युग जिन्दा रहवै! 22मेरे परमेसवर नै अपणा दूत भेजकै शेरां के मुँह नै इसा बन्द कर राख्या सै के उननै मेरा कुछ भी नुकसान न्ही करया; इसका कारण या सै, के मै उसकै स्याम्ही निर्दोष पाया गया; अर हे राजा, तेरै स्याम्ही भी मन्‍नै कोए भूल न्ही करी।” 23फेर राजा नै घणाए खुश होकै#6:23 राजा नै घणाए खुश होकै दानिय्येल नै पूरी तरियां सुरक्षित देखकै राजा आनन्द तै भर गया, उसनै अपणे जगहां पै पुनः मान-मर्यादा आळा किया जा सकदा सै, अर राज्य म्ह फेर तै उपयोगी हो सकदा सै।, दानिय्येल ताहीं माँद म्ह तै लिकाड़ण का हुकम दिया। अंत म्ह दानिय्येल माँद म्ह तै लिकाड़या गया, अर उसपै नुकसान का कोए निशान ना पाया गया, क्यूँके वो अपणे परमेसवर पै बिश्वास राक्खै था।
दारा के जरिये परमेसवर का सम्मान
24फेर राजा नै हुकम दिया के जिन माणसां नै दानिय्येल की चुगली करी थी, वे अपणे-अपणे बाळकां अर जनानियाँ समेत ल्याकै शेरां के माँद म्ह गेर दिए जावै; अर वे माँद की पेंदी ताहीं भी ना पोहचे के शेरां नै उनपै झपटकै उनकी सारी हाड्डियाँ समेत उन ताहीं चबा लिया।
25फेर दारा राजा नै सारी पृथ्वी के रहण आळे देश-देश अर जात्ति-जात्ति के सारे माणसां, अर अलग-अलग भाषा बोलण आळयां कै धोरै या लिख्या, “थम सही-सलामत रहो! 26मै या हुकम दियुँ सूं के जड़ै-जड़ै मेरे राज्य का हक सै, ओड़ै के माणस दानिय्येल के परमेसवर कै स्याम्ही काँम्बदे अर थरथरान्दे रहवै, क्यूँके जिन्दा अर युगानुयुग ताहीं रहण आळा परमेसवर वोए सै; उसका राज्य अविनाशी अर उसकी प्रभुता सदा बणी रहवैगी। 27जिसनै दानिय्येल ताहीं शेरां तै बचाया सै, वोए बचाण अर छुड़ाण आळा सै; अर सुर्ग म्ह अर धरती पै निशानियां अर चमत्कारां का प्रगट करण आळा सै।”
28अर दानिय्येल, दारा अर कुस्रू फारसी, दोन्‍नु के राज्य के दिनां म्ह अपणे पद म्ह बढ़या अर सुख-चैन तै रह्या।

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