Psalms 42:1-9

भजन संहिता 42:1-9 - जैसे हरिणी नदी के जल के लिये
हाँफती है,
वैसे ही, हे परमेश्‍वर, मैं तेरे लिये हाँफता हूँ।
जीवते ईश्‍वर, हाँ परमेश्‍वर, का मैं प्यासा हूँ,
मैं कब जाकर परमेश्‍वर को अपना मुँह
दिखाऊँगा?
मेरे आँसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं;
और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं,
तेरा परमेश्‍वर कहाँ है?
यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो
जाता है कि
मैं कैसे भीड़ के संग जाया करता था;
मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ
उत्सव करनेवाली भीड़ के बीच में परमेश्‍वर
के भवन को धीरे धीरे जाया करता था।
हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है?
तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है?
परमेश्‍वर पर आशा लगाए रह;
क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर
फिर उसका धन्यवाद करूँगा।
हे मेरे परमेश्‍वर; मेरा प्राण मेरे भीतर
गिरा जाता है,
इसलिये मैं यरदन के पास के देश से और
हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी
के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूँ।
तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर
जल, जल को पुकारता है;
तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब
गया हूँ।
तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्‍ति और
करुणा प्रगट करेगा;
और रात को भी मैं उसका गीत गाऊँगा,
और अपने जीवनदाता ईश्‍वर से
प्रार्थना करूँगा।
मैं ईश्‍वर से जो मेरी चट्टान है कहूँगा, “तू
मुझे भूल गया?
मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का
पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूँ?”

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हाँफती है, वैसे ही, हे परमेश्‍वर, मैं तेरे लिये हाँफता हूँ। जीवते ईश्‍वर, हाँ परमेश्‍वर, का मैं प्यासा हूँ, मैं कब जाकर परमेश्‍वर को अपना मुँह दिखाऊँगा? मेरे आँसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्‍वर कहाँ है? यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है कि मैं कैसे भीड़ के संग जाया करता था; मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करनेवाली भीड़ के बीच में परमेश्‍वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था। हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्‍वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूँगा। हे मेरे परमेश्‍वर; मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यरदन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूँ। तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूँ। तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्‍ति और करुणा प्रगट करेगा; और रात को भी मैं उसका गीत गाऊँगा, और अपने जीवनदाता ईश्‍वर से प्रार्थना करूँगा। मैं ईश्‍वर से जो मेरी चट्टान है कहूँगा, “तू मुझे भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूँ?”

भजन संहिता 42:1-9

Psalms 42:1-9