मत्तियाह 6:19-21

मत्तियाह 6:19-21 MYG

“पृथ्वी पर अपने लिए पैसे इकठ्ठा मत करो जहाँ कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर देते हैं और चोर उसे चुरा लेते हैं। परंतु तुम परमस्वर्ग में अपने लिए आत्मिक धन इकठ्ठा करो जहाँ न तो कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर सकते हैं और न ही चोर उसे चुराते हैं। क्योंकि जहाँ तुम्हारा पैसे है, वहीं तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।

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मत्तियाह 6:19-21 - “पृथ्वी पर अपने लिए पैसे इकठ्ठा मत करो जहाँ कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर देते हैं और चोर उसे चुरा लेते हैं। परंतु तुम परमस्वर्ग में अपने लिए आत्मिक धन इकठ्ठा करो जहाँ न तो कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर सकते हैं और न ही चोर उसे चुराते हैं। क्योंकि जहाँ तुम्हारा पैसे है, वहीं तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।मत्तियाह 6:19-21 - “पृथ्वी पर अपने लिए पैसे इकठ्ठा मत करो जहाँ कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर देते हैं और चोर उसे चुरा लेते हैं। परंतु तुम परमस्वर्ग में अपने लिए आत्मिक धन इकठ्ठा करो जहाँ न तो कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर सकते हैं और न ही चोर उसे चुराते हैं। क्योंकि जहाँ तुम्हारा पैसे है, वहीं तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।मत्तियाह 6:19-21 - “पृथ्वी पर अपने लिए पैसे इकठ्ठा मत करो जहाँ कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर देते हैं और चोर उसे चुरा लेते हैं। परंतु तुम परमस्वर्ग में अपने लिए आत्मिक धन इकठ्ठा करो जहाँ न तो कीड़े और ज़ंग उसे बेकार कर सकते हैं और न ही चोर उसे चुराते हैं। क्योंकि जहाँ तुम्हारा पैसे है, वहीं तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।

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