ऐईकाजे पयले तुमी माहापुरू चो राज आउर हुनचो धरम चो खोज करा तेबे ऐ सपाय तीजमन बले तुमके मिरून जायदे।
मत्ती 6 पढ़िए
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चार दिन
चिंता किसी भी प्रारूप में कमज़ोर बना सकती है क्योंकि यह हमें असंतुलित करके भयभीत बना देती है। हालांकि यह कहानी का अन्त नहीं है, क्योंकि प्रभु यीशु में हमें परेशानियों से मुक्ति और जय पाने का अनुग्रह मिलता है। हम केवल इस पर जय ही नहीं पाते वरन पहले से बेहतर बन जाते हैं। इसके लिए परमेश्वर के वचन और सुनिश्चित करने वाली परमेश्वर की उपस्थिति का धन्यवाद दें।
7 दिन
यीशु ने कई विषयों की शिक्षा दी - स्थायी आशीषें, व्यभिचार, प्रार्थना, और भी कई। आज लोगों के लिए इनका क्या अर्थ है? एक संक्षिप्त वीडियो यीशु की एक शिक्षा को संदर्भ सहित प्रतिदिन की योजना के साथ दर्शाता है।
मत्ती १८:३ में यीशु मसीह ने कहाँ: “जब तक तुम बदल कर छोटे बच्चों जैसे नहीं बन जाते, तुम कभी स्वर्ग के राज्य में दाख़िल नहीं हो सकते।” इसका क्या मतलब है? इस एक-सप्ताह की पढ़ने की योजना में सात पहलुओं का ज़िक्र है, जिनमें हमे बच्चों जैसी सादगी, भरोसा और मासूमियत अपनाना चाहिए।
दस दिन
इस क्रम में पहाड़ी उपदेशों को देखा जाएगा (मत्ती 5-7)। इससे पाठक को पहाड़ी उपदेश को बेहतर तरीके से समझने में सहायता मिलेगी और उससे जुड़ी बातों को रोज़मर्रा के जीवन में लागू करने की समझ भी प्राप्त होगी ।
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