अब तुम समस्त इस्राएल प्रदेश की जनता को एकत्र करो, और उनको मेरे पास कर्मेल पहाड़ पर भेजो। तुम रानी ईजेबेल के साथ राजसी भोजन करनेवाले अशेराह देवी के चार सौ और बअल देवता के साढ़े चार सौ नबियों को भी भेजना।’
अहाब ने समस्त इस्राएल प्रदेश के लोगों को कर्मेल पहाड़ पर भेजा। उसने नबियों को भी कर्मेल पहाड़ पर एकत्र किया। एलियाह लोगों के समीप आए। एलियाह ने उनसे कहा, ‘तुम कब तक दो नावों में पैर रखे रहोगे? यदि प्रभु ही ईश्वर है, तो उसका अनुसरण करो। यदि बअल देवता ईश्वर है, तो उसका अनुसरण करो।’ लोगों ने एलियाह को उत्तर नहीं दिया। एलियाह ने लोगों से फिर कहा, ‘मैं, केवल मैं, प्रभु का नबी, जीवित बचा हूं। बअल देवता के साढ़े चार सौ नबी यहां हैं। मुझे और इन नबियों को दो बैल दो। वे स्वयं एक बैल को चुनें। वे उसके टुकड़े-टुकड़े करें, और उन टुकड़ों को लकड़ी के ऊपर रखें। वे लकड़ी में आग नहीं सुलगाएंगे। मैं भी दूसरे बैल के साथ ऐसा ही करूंगा, और उसके टुकड़ों को लकड़ी के ऊपर रखूंगा। मैं भी लकड़ी में आग नहीं सुलगाऊंगा। तत्पश्चात् वे अपने ईश्वर के नाम की दुहाई दें। मैं भी प्रभु के नाम की दुहाई दूंगा। जो ईश्वर अग्नि के माध्यम से उत्तर देगा, वही सच्चा ईश्वर है।’ सब लोगों ने उत्तर दिया, ‘यह उत्तम बात है।’ एलियाह ने बअल देवता के नबियों से कहा, ‘तुम एक बैल को स्वयं चुन लो। तुम पहले बलि तैयार करो, क्योंकि तुम बहुत हो। तुम अपने ईश्वर के नाम की दुहाई दो। पर लकड़ी में आग मत सुलगाना।’ लोगों ने बअल देवता के नबियों को बैल दिया। नबियों ने उसको पकड़ा और उसकी बलि तैयार की। वे सबेरे से दोपहर तक बअल देवता के नाम की दुहाई देते रहे। वे यह कह रहे थे, ‘हे बअल देवता, हमें उत्तर दे!’ पर आवाज नहीं हुई। किसी ने उत्तर नहीं दिया। जो वेदी उन्होंने बनाई थी, उसके चारों ओर वे नाचते-कूदते रहे। एलियाह ने दोपहर को उनकी हंसी उड़ाई और यह कहा, ‘और जोर से पुकारो। वह तो ईश्वर है, मनन-चिन्तन कर रहा होगा, अथवा नित्यक्रिया में लगा होगा। सम्भवत: वह यात्रा पर गया है। कदाचित वह सो रहा है, उसको जगाना चाहिए।’ अत: वे जोर-जोर से पुकारने लगे। वे अपनी प्रथा के अनुसार अपना शरीर तलवार और बर्छी से गोदने लगे। उनके शरीर से रक्त बहने लगा। दोपहर बीत गया। वे संध्या समय तक, भेंट-बलि के अर्पण के समय तक प्रलाप करते रहे। तब भी आवाज नहीं हुई। किसी ने उत्तर नहीं दिया। किसी ने उन पर ध्यान नहीं दिया।
एलियाह ने सब लोगों से कहा, ‘मेरे समीप आओ।’ सब लोग उनके समीप आए। प्रभु की जो वेदी तोड़ दी गई थी, उसको एलियाह ने पुन: निर्मित किया। एलियाह ने याकूब के बारह पुत्रों के कुलों की संख्या के अनुसार बारह पत्थर लिये। उसी याकूब को प्रभु का यह वचन सुनाई दिया था, ‘अब से तेरा नाम इस्राएल होगा।’ एलियाह ने इन पत्थरों से प्रभु के नाम में एक वेदी निर्मित की। उन्होंने वेदी के चारों ओर एक गड्ढा खोदा जो आधा मीटर गहरा था। तब एलियाह ने लकड़ियाँ वेदी पर सजायीं। उन्होंने बैल की बलि की। उसके टुकड़े-टुकड़े किए, और उनको लकड़ियों पर रखा। एलियाह ने कहा, ‘चार घड़ों को पानी से भरो, और उसको अग्नि-बलि तथा लकड़ियों पर उण्डेल दो।’ लोगों ने ऐसा ही किया। एलियाह ने फिर कहा, ‘ऐसा ही दूसरी बार करो।’ उन्होंने दूसरी बार भी किया। एलियाह ने फिर कहा, ‘ऐसा ही तीसरी बार करो।’ उन्होंने तीसरी बार भी किया। पानी वेदी के चारों ओर बहने लगा। गड्ढा भी पानी से भर गया।
सन्ध्या समय, भेंट-बलि के अर्पण के समय, नबी एलियाह वेदी के समीप आए। उन्होंने कहा, ‘हे अब्राहम, इसहाक और याकूब के प्रभु परमेश्वर, आज यह सच्चाई सब लोगों को ज्ञात हो जाए कि इस्राएली राष्ट्र का परमेश्वर केवल तू है, और मैं तेरा सेवक हूं। ये लोग जान लें कि जो कुछ मैंने किया है, वह सब तेरे आदेश से किया है। उत्तर दे, हे प्रभु; मुझे उत्तर दे जिससे इन लोगों को मालूम हो जाए कि प्रभु, केवल तू परमेश्वर है, और तू ही उनके हृदय को बदलता है।’ तब प्रभु की अग्नि बरस पड़ी। उसने अग्नि-बलि की लकड़ियों को, पत्थरों और धूल को भस्म कर दिया। उसने गड्ढे के पानी को सुखा दिया। जब लोगों ने यह देखा अब उन्होंने मुंह के बल गिरकर प्रभु की वंदना की। वे पुकारने लगे, ‘निस्सन्देह, प्रभु ही ईश्वर है! प्रभु ही ईश्वर है!’ एलियाह ने लोगों से कहा, ‘बअल देवता के नबियों को पकड़ो। उनमें से एक नबी को भी भागने न देना।’ लोगों ने नबियों को पकड़ लिया। एलियाह उनको कीशोन नदी पर ले गए, और वहाँ उनका वध कर दिया।