रोमियों 12:9-20
रोमियों 12:9-20 HCV
प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा कीजिए; आदर्श के प्रति आसक्त रहिए; आपसी प्रेम में समर्पित रहिए; अन्यों को ऊंचा सम्मान दीजिए; आप लोगों उत्साह कभी कम न हो; आत्मिक उत्साह बना रहे; प्रभु की सेवा करते रहिए; आशा में आनंद, क्लेशों में धीरज तथा प्रार्थना में नियमितता बनाए रखिए; पवित्र संतों की सहायता के लिए तत्पर रहिए, आतिथ्य सत्कार करते रहिए. अपने सतानेवालों के लिए आप लोगों के मुख से आशीष ही निकले—आशीष—न कि शाप; जो आनंदित हैं, उनके साथ आनंद मनाइए तथा जो शोकित हैं, उनके साथ शोक; आप लोगों में आपस में मेल-भाव हो; आप लोगों की सोच में अहंकार न हो परंतु उन लोगों से मिलने-जुलने के लिए तत्पर रहिए, जो समाज की दृष्टि में छोटे हैं; स्वयं को ज्ञानवान मत समझिए. किसी के प्रति भी दुष्टता का बदला दुष्टता न हो; आप लोगों का स्वभाव सब की दृष्टि में सुहावना हो; यदि संभव हो तो यथाशक्ति सभी के साथ मेल बनाए रखिए. प्रियजन, आप लोग स्वयं बदला मत लीजिए—इसे परमेश्वर के क्रोध के लिए छोड़ दीजिए, क्योंकि पवित्रशास्त्र का लेख है: बदला लेना मेरा काम है, प्रतिफल मैं दूंगा. प्रभु का कथन यह भी है: “यदि आपके कोई शत्रु भूखे हैं, तो उन्हें भोजन कराइए, यदि वह प्यासे हैं, तो उन्हें पानी दीजिए; ऐसा करके आप उनके सिर पर अंगारों का ढेर लगा देंगे.”







