मत्तियाह 8:5-17
मत्तियाह 8:5-17 HCV
जब येशु ने कफ़रनहूम नगर में प्रवेश किया, तब एक शताधिपति ने आकर उनसे नम्रतापूर्वक निवेदन किया, “प्रभु, घर पर मेरे एक सेवक लकवा रोग से पीड़ित हैं और वह घोर पीड़ा में हैं.” येशु ने उन्हें आश्वासन दिया, “मैं आकर उन्हें चंगा करूंगा.” किंतु शताधिपति ने कहा, “नहीं प्रभु, नहीं, मैं इस योग्य नहीं कि आप मेरे घर आएं. आप केवल मुंह से कह दीजिए और मेरे वह सेवक स्वस्थ हो जाएंगे. मैं स्वयं बड़े अधिकारियों के अधीन हूं और सैनिक मेरे अधिकार में हैं. मैं किन्हीं एक को आदेश देता हूं, ‘जाइए!’ तो वह जाते हैं, और किन्हीं दूसरे को आदेश देता हूं, ‘इधर आईये!’ तो वह आते हैं. अपने सेवक से कहता हूं, ‘यह करिये!’ तो वह वही करते हैं.” यह सुनकर येशु आश्चर्यचकित रह गए. उन्होंने पीछे आ रही भीड़ से कहा, “यह सच है कि मैंने इस्राएल राष्ट्र में भी किन्हीं में ऐसा विश्वास नहीं देखा. मैं आप लोगों को सूचित करना चाहता हूं कि स्वर्ग-राज्य में अब्राहाम, यित्सहाक और याकोब के साथ भोज में शामिल होने के लिए पूर्व और पश्चिम दिशाओं से अनेकानेक लोग आकर संगति करेंगे, किंतु राज्य के वारिस बाहर अंधकार में फेंक दिए जाएंगे. वह स्थान ऐसा होगा जहां रोना और दांत पीसना होता रहेगा.” तब येशु ने शताधिपति से कहा, “जाइए, आपके लिए वैसा ही होगा जैसा आपका विश्वास है.” उसी क्षण वह सेवक चंगे हो गए. जब येशु पेतरॉस के घर पर आए, उन्होंने उनकी सास को बुखार से पीड़ित पाया. उन्होंने उनके हाथ का स्पर्श किया और वह बुखार से मुक्त हो गईं और उठकर उन सब की सेवा करने में जुट गईं. जब संध्या हुई तब लोग दुष्टात्मा से पीड़ित लोगों को उनके पास लाने लगे और येशु अपने वचन मात्र से उन्हें दुष्टात्मा से मुक्त और साथ ही रोगियों को स्वस्थ करते गए. यह भविष्यवक्ता यशायाह द्वारा की गई इस भविष्यवाणी की पूर्ति थी: “उन्होंने स्वयं हमारी दुर्बलताओं को अपने ऊपर ले लिया तथा हमारे रोगों को उठा लिया.”


