मत्तियाह 6:25-33
मत्तियाह 6:25-33 HCV
“यही कारण है कि मैं आप लोगों से कहता हूं कि अपने जीवन के विषय में चिंता मत करिए कि आप लोग क्या खाएंगे और क्या पिएंगे; और न ही शरीर के विषय में कि क्या पहनेंगे. क्या जीवन आहार से और शरीर वस्त्रों से अधिक कीमती नहीं? पक्षियों की ओर ध्यान दीजिए: वे न तो बीज बोते हैं, और न ही खलिहान में उपज इकट्ठा करते हैं. फिर भी आपके स्वर्गीय पिता उनका भरण-पोषण करते हैं. क्या आप लोग उनसे कहीं ज्यादा मूल्यवान नहीं? और आप लोगों में ऐसे व्यक्ति कौन हैं, जो चिंता के द्वारा अपनी आयु में एक क्षण की भी वृद्धि कर सकते हैं? “और वस्त्र आप लोगों की चिंता का विषय क्यों है? मैदान के फूलों का ध्यान तो करिये कि वे कैसे खिलते हैं. वे न तो परिश्रम करते हैं और न ही वस्त्र निर्माण. फिर भी मैं आप लोगों से यह कहता हूं कि शलोमोन की वेशभूषा का ऐश्वर्य किसी भी दृष्टि से इनके तुल्य नहीं था. यदि परमेश्वर घास का श्रृंगार इस सीमा तक करते हैं, जिसका जीवन थोड़े समय का है और जो कल आग में झोंक दिया जाएगा, तो क्या वह आप लोगों को कहीं अधिक सुशोभित न करेंगे? कैसा कमजोर है आप लोगों का विश्वास! इसलिए इस विषय में चिंता मत करिए, ‘हम क्या खाएंगे या क्या पिएंगे’ या ‘हमारे वस्त्रों का प्रबंध कैसे होगा?’ गैर-यहूदी ही इन वस्तुओं के लिए कोशिश करते रहते हैं. आपके स्वर्गीय पिता को यह मालूम है कि आपको इन सब की ज़रूरत है. सबसे पहले परमेश्वर के राज्य की और उनकी धार्मिकता की खोज करिये, और ये सभी वस्तुएं आपको दी जाएंगी.









