मत्तियाह 5:1-8

मत्तियाह 5:1-8 HCV

जब येशु मसीह ने भीड़ को देखा तो वे पर्वत पर चले गए और जब वह बैठ गए तो उनके शिष्य उनके पास आए. येशु मसीह ने उन्हें शिक्षा देना प्रारंभ किया. उन्होंने कहा, “धन्य हैं वे, जो दीन आत्मा के हैं, क्योंकि स्वर्ग-राज्य उन्हीं का है. धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं. क्योंकि उन्हें शांति दी जाएगी. धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे ही पृथ्वी के उत्तराधिकारी होंगे. धन्य हैं वे, जिन्हें धार्मिकता की भूख और प्यास होती है, क्योंकि वे ही तृप्‍त किए जाएंगे. धन्य हैं वे, जो कृपालु हैं, क्योंकि उन्हीं पर कृपा की जाएगी. धन्य हैं वे, जिनके हृदय शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे.

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