मत्तियाह 24:1-8
मत्तियाह 24:1-8 HCV
येशु मंदिर से निकलकर जा रहे थे कि शिष्यों ने उनका ध्यान मंदिर की इमारतों की ओर आकर्षित किया. येशु ने उनसे कहा, “आप लोग यह मंदिर परिसर देख रहे हैं? सच तो यह है कि एक दिन इन भवनों का एक भी पत्थर दूसरे पर रखा न दिखेगा—हर एक पत्थर ज़मीन पर बिखरा होगा.” येशु ज़ैतून पर्वत पर बैठे हुए थे. इस एकांत में उनके शिष्य उनके पास आए और उनसे यह प्रश्न किया, “गुरुवर, हमें यह बताइए कि ये घटनाएं कब घटित होंगी, आपके आने तथा जगत के अंत का चिह्न क्या होगा?” येशु ने उन्हें उत्तर दिया, “इस विषय में सावधान रहिएगा कि कोई व्यक्ति आप लोगों को भरमाने न पाएं क्योंकि मेरे नाम में अनेक यह दावा करते आएंगे, ‘मैं ही मसीह हूं’ और इसके द्वारा अनेकों को भरमा देंगे. आप लोग युद्धों के विषय में तो सुनेंगे ही साथ ही उनके विषय में उड़ते-उड़ते समाचार भी. ध्यान रहे कि आप लोग इससे घबरा मत जाइएगा क्योंकि इनका होना अवश्य है—किंतु इसे ही अंत मत समझ लीजिएगा. राष्ट्र-राष्ट्र के तथा, राज्य-राज्य के विरुद्ध उठ खड़ा होगा. हर जगह अकाल पड़ेंगे तथा भूकंप आएंगे, किंतु ये सब घटनाएं प्रसववेदना का प्रारंभ मात्र होंगी.

