मत्तियाह 14:22-27

मत्तियाह 14:22-27 HCV

इसके बाद येशु ने शिष्यों को तुरंत ही नाव में सवार होने के लिए इस उद्देश्य से विवश किया कि शिष्य उनके पूर्व ही दूसरी ओर पहुंच जाएं, जबकि वह स्वयं भीड़ को विदा करने लगे. भीड़ को विदा करने के बाद वह अकेले पर्वत पर चले गए कि वहां जाकर एकांत में प्रार्थना करें. यह रात का समय था और वह वहां अकेले थे. विपरीत दिशा में हवा तथा लहरों के थपेड़े खाकर नाव तट से बहुत दूर निकल चुकी थी. रात के अंतिम पहर में येशु जल सतह पर चलते हुए उनकी ओर आए. उन्हें जल सतह पर चलते देख शिष्य घबराकर कहने लगे, “दुष्टात्मा है यह!” और वे भयभीत हो चिल्लाने लगे. इस पर येशु ने उनसे कहा, “डरिये मत. साहस रखिए! मैं हूं!”

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