मत्तियाह 13:3-11
मत्तियाह 13:3-11 HCV
उन्होंने भीड़ से दृष्टांतों में अनेक विषयों पर चर्चा की. येशु ने कहा: “एक किसान बीज बोने के लिए निकले. बीज बोने में कुछ बीज तो मार्ग के किनारे गिरे, जिन्हें पक्षियों ने आकर चुग लिया. कुछ अन्य बीज पथरीली भूमि पर भी जा गिरे, जहां पर्याप्त मिट्टी नहीं थी. पर्याप्त मिट्टी न होने के कारण वे जल्दी ही अंकुरित भी हो गए. किंतु जब सूर्योदय हुआ, तब वे झुलस गए और इसलिये कि उन्होंने जड़ें ही नहीं पकड़ी थीं, वे मुरझा गए. कुछ अन्य बीज कंटीली झाड़ियों में जा गिरे और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा दिया. और कुछ बीज अच्छी भूमि पर गिरे और फल लाए. यह उपज जितना बोया गया था उससे सौ गुणी, साठ गुणी, तीस गुणी थी. जिनके सुनने के कान हों, वह सुन लें.” येशु के शिष्यों ने उनके पास आकर उनसे प्रश्न किया, “गुरुवर, लोगों को आप दृष्टांतों में ही शिक्षा क्यों देते हैं?” इसके उत्तर में येशु ने कहा, “स्वर्ग-राज्य के रहस्य जानने की क्षमता आप लोगों को तो प्रदान की गई है, पर उन्हें नहीं.


