मत्तियाह 13:24-52

मत्तियाह 13:24-52 HCV

येशु ने उनके सामने एक अन्य दृष्टांत प्रस्तुत किया: “स्वर्ग-राज्य की तुलना उन व्यक्ति से की जा सकती है, जिन्होंने अपने खेत में उत्तम बीज का रोपण किया. जब उनके सेवक सो रहे थे, तब उनके एक शत्रु आए और गेहूं के बीज के मध्य जंगली बीज रोप कर चले गए. जब गेहूं के अंकुर फूटे और बालें आईं तब जंगली बीज के पौधे भी दिखाई दिए. “इस पर सेवकों ने आकर अपने स्वामी से पूछा, ‘स्वामी, आपने तो अपने खेत में उत्तम बीज रोपे थे! तो फिर ये जंगली पौधे कहां से आ गए?’ “स्वामी ने उत्तर दिया, ‘यह काम शत्रु का है.’ “तब सेवकों ने उनसे पूछा, ‘क्या आप चाहते हैं कि हम इन्हें उखाड़ फेंकें?’ “उन व्यक्ति ने उत्तर दिया, ‘नहीं, ऐसा न हो कि जंगली पौधे उखाड़ते हुए आप लोग गेहूं भी उखाड़ डालें. गेहूं तथा जंगली पौधों को कटनी तक साथ साथ बढ़ने दीजिए. उस समय मैं मज़दूरों को आज्ञा दूंगा, जंगली पौधे इकट्ठा कर उनकी पुलियां बांध दीजिए कि उन्हें जला दिया जाए किंतु गेहूं मेरे खलिहान में इकट्ठा कर दीजिए.’ ” येशु ने उनके सामने एक अन्य दृष्टांत प्रस्तुत किया: “स्वर्ग-राज्य एक राई के बीज के समान है, जिसे एक व्यक्ति ने अपने खेत में रोप दिया. यह अन्य सभी बीजों की तुलना में छोटा होता है किंतु जब यह पूरा विकसित हुआ तब खेत के सभी पौधों से अधिक बड़ा हो गया और फिर वह बढ़कर एक पेड़ में बदल गया कि आकाश के पक्षी आकर उसकी डालियों में बसेरा करने लगे.” येशु ने उनके सामने एक और दृष्टांत प्रस्तुत किया: “स्वर्ग-राज्य खमीर के समान है, जिसे एक स्त्री ने लेकर तीन माप आटे में मिला दिया और होते-होते सारा आटा खमीर बन गया, यद्यपि आटा बड़ी मात्रा में था.” येशु ने ये पूरी शिक्षाएं भीड़ को दृष्‍टांतों में दीं. कोई भी शिक्षा ऐसी न थी, जो दृष्टांत में न दी गई कि भविष्यवक्ता द्वारा की गई यह भविष्यवाणी पूरी हो जाए: “मैं दृष्‍टांतों में वार्तालाप करूंगा, मैं वह सब कहूंगा, जो सृष्टि के आरंभ से गुप्‍त हैं.” जब येशु भीड़ को छोड़कर घर के भीतर चले गए, तो उनके शिष्यों ने उनके पास आकर उनसे विनती की, “गुरुवर, हमें खेत के जंगली बीज का दृष्टांत समझा दीजिए.” येशु ने दृष्टांत की व्याख्या इस प्रकार की, “अच्छे बीज बोनेवाले वह व्यक्ति मानव-पुत्र हैं. खेत यह संसार है. अच्छा बीज राज्य की संतान हैं तथा जंगली बीज शैतान की संतान हैं. शत्रु, जिन्होंने जंगली बीज बोया है, शैतान है. कटनी इस युग का अंत तथा काटने के लिए निर्धारित मज़दूर स्वर्गदूत हैं. “इसलिये ठीक जिस प्रकार जंगली पौधे कटने के बाद आग में भस्म कर दिए जाते हैं, युग के अंत में ऐसा ही होगा. मानव-पुत्र अपने स्वर्गदूतों को भेजेंगे और वे उनके राज्य से उन सभी चीज़ों को निकाल देंगे जो पाप का कारण बनती हैं और उन सभी को जो बुराई करते हैं, और उन्हें आग के कुंड में झोंक देंगे, जहां लगातार रोना तथा दांतों का पीसना होता रहेगा. तब धर्मी अपने पिता के राज्य में सूर्य के समान चमकेंगे. जिनके सुनने के कान हों, वह सुन लें.” “स्वर्ग-राज्य खेत में छिपाए गए उस खजाने के समान है, जिसे एक व्यक्ति ने पाया और दोबारा छिपा दिया. आनंद में उन्होंने अपनी सारी संपत्ति बेचकर उस खेत को मोल ले लिया. “स्वर्ग-राज्य उन व्यापारी के समान है, जो अच्छे मोतियों की खोज में थे. एक कीमती मोती मिल जाने पर उन्होंने अपनी सारी संपत्ति बेचकर उस मोती को मोल ले लिया. “स्वर्ग-राज्य समुद्र में डाले गए उस जाल के समान है, जिसमें सभी प्रजातियों की मछलियां आ जाती हैं. जब वह जाल भर गया और खींचकर तट पर लाया गया, उन्होंने बैठकर अच्छी मछलियों को टोकरी में इकट्ठा कर लिया तथा निकम्मी को फेंक दिया. युग के अंत में ऐसा ही होगा. स्वर्गदूत आएंगे और दुष्टों को धर्मियों के मध्य से निकालकर अलग करेंगे तथा उन्हें आग के कुंड में झोंक देंगे, जहां रोना तथा दांतों का पीसना होता रहेगा. “क्या आप लोगों को अब यह सब समझ आया?” उन्होंने उत्तर दिया. “जी हां, प्रभु.” येशु ने उनसे कहा, “यही कारण है कि व्यवस्था के हर एक शिक्षक, जो स्वर्ग-राज्य के विषय में प्रशिक्षित होकर शिष्य बन चुके हैं, परिवार के प्रधान के समान हैं, जो अपने भंडार से नई और पुरानी हर एक वस्तु को निकाल लाते हैं.”