मत्तियाह 13:10-16

मत्तियाह 13:10-16 HCV

येशु के शिष्यों ने उनके पास आकर उनसे प्रश्न किया, “गुरुवर, लोगों को आप दृष्‍टांतों में ही शिक्षा क्यों देते हैं?” इसके उत्तर में येशु ने कहा, “स्वर्ग-राज्य के रहस्य जानने की क्षमता आप लोगों को तो प्रदान की गई है, पर उन्हें नहीं. जिन व्यक्ति के पास है उन्हें और भी अधिक दिया जाएगा; जिन व्यक्ति के पास नहीं है, उनसे वह भी ले लिया जाएगा, जो उनके पास है.” यही कारण है कि मैं लोगों को दृष्‍टांतों में शिक्षा देता हूं: “क्योंकि वे देखते हुए भी कुछ नहीं देखते तथा सुनते हुए भी कुछ नहीं सुनते और न उन्हें इसका अर्थ ही समझ आता है. उनकी इसी स्थिति के विषय में भविष्यवक्ता यशायाह की यह भविष्यवाणी पूरी हो रही है: “ ‘आप लोग सुनते तो रहेंगे किंतु समझेंगे नहीं; आप लोग देखते तो रहेंगे किंतु आप लोगों को कोई ज्ञान न होगा; क्योंकि इन लोगों का मन-मस्तिष्क मंद पड़ चुका है. वे अपने कानों से ऊंचा ही सुना करते हैं. उन्होंने अपनी आंखें मूंद रखी हैं कि कहीं वे अपनी आंखों से देखने न लगें, कानों से सुनने न लगें तथा अपने हृदय से समझने न लगें और मेरी ओर फिर जाएं कि मैं उन्हें स्वस्थ कर दूं.’ धन्य हैं आप लोगों की आंखें क्योंकि वे देखती हैं और आप लोगों के कान क्योंकि वे सुनते हैं.