Regocijaos en el Señor siempre. Otra vez digo: ¡Regocijaos!
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चार दिन
चिंता किसी भी प्रारूप में कमज़ोर बना सकती है क्योंकि यह हमें असंतुलित करके भयभीत बना देती है। हालांकि यह कहानी का अन्त नहीं है, क्योंकि प्रभु यीशु में हमें परेशानियों से मुक्ति और जय पाने का अनुग्रह मिलता है। हम केवल इस पर जय ही नहीं पाते वरन पहले से बेहतर बन जाते हैं। इसके लिए परमेश्वर के वचन और सुनिश्चित करने वाली परमेश्वर की उपस्थिति का धन्यवाद दें।
पांच दिन
अगर डर का अस्तित्व नहीं हो, तो जीवन कैसा दिखाई देगा ? आप सपने कैसे देखेंगे ? आप क्या करेंगे ? आप कहां जाएंगे ? क्याआप जानते हैं निडर होना क्या होता है ? जब हम निडरता में जीते हैं तो लोग यीशु को ऐसा हमारे अंदर देखते हैं जैसा उन्होंने पहले कभीनहीं देखा |
7 दिन
जीवनदाता और सभी आशीषों पर अपनी निर्भरता पर विचार करते हुए डॉ.रमेश रिचर्ड के साथ हुए सात दिन बिताएं। वह RREACH के अध्यक्ष और डालास थियोलोजिकल सेमिनरी के आचार्य हैं ,जो पासबान के दृष्टिकोण को रखते हुए बताएंगे कि जीवन में कृतज्ञता का कैसे अभ्यास करना चाहिए। आइए हम अपने पास पाई जाने वाली चीज़ों और सभी ज़रूरी चीज़ों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद व उस पर भरोसा करें।
मत्ती १८:३ में यीशु मसीह ने कहाँ: “जब तक तुम बदल कर छोटे बच्चों जैसे नहीं बन जाते, तुम कभी स्वर्ग के राज्य में दाख़िल नहीं हो सकते।” इसका क्या मतलब है? इस एक-सप्ताह की पढ़ने की योजना में सात पहलुओं का ज़िक्र है, जिनमें हमे बच्चों जैसी सादगी, भरोसा और मासूमियत अपनाना चाहिए।
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