1
मत्तियाह 21:22
Muktidata Yeshu Granth
MYG
तुम प्रार्थना में विश्वास के साथ जो कुछ माँगोगे, वह तुम्हें मिलेगा।”
तुलना
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2
मत्तियाह 21:21
प्रभु येशु बोले, “मेरी बात ध्यान से सुनो, यदि तुम आस्था रखो और शक न करो, तो तुम इस पेड़ के साथ वैसा ही करोगे जैसा मैं ने किया, परंतु तुम इससे भी बढ़कर करोगे। तुम इस पहाड़ को आदेश दोगे, ‘उठ और समुद्र में कूद जा,’ तो यह भी हो जाएगा।
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3
मत्तियाह 21:9
प्रभु येशु के आगे और उनके पीछे चलने वाली भीड़ जयकारे लगा रही थी, “राजा दाविद के वंशज की जय हो! प्रभु परमात्मा के नाम से आने वाले का गुणगान हो! परमस्वर्ग में विराजमान परमात्मा की जय हो!”
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4
मत्तियाह 21:13
और उनसे कहा, “परमात्मा-ग्रंथ में कहा गया है, ‘मेरा मंदिर प्रार्थना का मंदिर कहलाएगा,’ पर तुमने तो उसे चोरों का अड्डा बना दिया है।”
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5
मत्तियाह 21:4-7
शिष्य गए और प्रभु येशु के आदेश के अनुसार काम किया। उन्होंने गधी और उसके बच्चे को लाकर उनकी पीठ पर कपड़े बिछा दिए और प्रभु येशु उन पर आराम से बैठ गए। इसलिए परमात्मा द्वारा किया गया यह वादा जैसा कि परमात्मा के प्रवक्ता ने कहा था, पूरा हुआ, “यरूशलम शहर के लोगों से कहो, ‘देखो, तुम्हारे राजा तुम्हारे पास आ रहे हैं। उनका मन कोमल है। वह गधी पर और गधी के बच्चे पर सवार हैं।’”
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6
मत्तियाह 21:42
प्रभु येशु ने उनसे कहा, “तो फिर परमात्मा-ग्रंथ में इस पद का क्या अर्थ है? ‘जिस पत्थर को भवन बनाने वालों ने बेकार समझा वह नींव का सबसे महत्वपूर्ण पत्थर बन गया। यह प्रभु परमात्मा की ओर से हुआ और हमारी दृष्टि में अद्भुत है।’
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मत्तियाह 21:43
“इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, परमात्मा का साम्राज्य तुमसे ले लिया जाएगा और अलग-अलग देश के उन लोगों को दे दिया जाएगा जो परमात्मा की आज्ञा मानते हैं।
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