और जबकि आप स्वयं इन बातों का पालन करते हैं, उन पर उंगली उठा रहे हैं, जो इनका पालन करते हैं! क्या आप यह सोचते हैं कि आप परमेश्वर के दंड से बच जाएंगे? या इस सच्चाई को पहचाने बिना कि परमेश्वर की कृपा ही आपको मन फिराव करना सिखाती है, आपने परमेश्वर की दया, धीरज और सहनशीलता रूपी धन को तुच्छ समझा है?