यदि इस समय आप लोगों को यहोवाह की सेवा करनी अच्छी नहीं लग रही है, तो आज ही यह निर्णय कर लीजिए कि आप लोग किनकी सेवा करेंगे; उन देवताओं की, जिनकी उपासना आप लोगों के पूर्वज फरात नदी के पार किया करते थे या अमोरियों के उन देवताओं की, जिनके देश में आप लोग अब रह रहे हैं. जहां तक मेरी और मेरे परिवार की बात है, हम तो यहोवाह ही की सेवा-वन्दना करेंगे.”