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लेबी बधान 26:12
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
मुंह करनी तम्हां जैंदरी हांढ-फेर दैई अर हुंह रहणअ सदा थारअ परमेशर अर तम्हैं हणैं सदा मेरी आपणीं परज़ा।
השווה
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लेबी बधान 26:4
तै बर्शाऊं तम्हां लै सरग ठीक बगती, ताकि थारी ज़िम्मीं दी बधिया पज़ैआ होए अर डाल़ा-बूटा दी राम्बल़ी फसल होए।
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लेबी बधान 26:3
“ज़ै तम्हैं मेरै बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊए अर तेते हुकम मने
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लेबी बधान 26:6
“थारै देशै दैणीं मुंह सुख-शांती, ज़ेभै तम्हैं सुत्ते तेभै निं तम्हां किछ़ू गल्ले डअर रहणीं। ज़ुंण ज़ीब तम्हां खाई-डरैऊई सका, तिंयां दरल़ाऊंणै मुंह तेऊ देशा का दूर अर थारै दुशमणा निं हुंह तम्हां मारनै दैंदअ।
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लेबी बधान 26:9
“मुंह करनी तम्हां लै झींण ताकि तम्हैं फल़े-फूले अर मुंह करनी तम्हां लै आपणीं करार पूरी।
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लेबी बधान 26:13
हुंह आसा थारअ परमेशर बिधाता, मंऐं आसा तम्हैं मिसर देशा का एते तैणीं आणै दै काढी कि थारै कैल़ै का गलामीओ जूँ पोर्ही निखल़े। मंऐं किऐ तम्हैं आज़ाद, ऐबै सका तम्हैं इज़ती संघै आज़रअ मूंड करी हांढी।
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लेबी बधान 26:11
“मुंह रहणअ सदा तम्हां जैंदरी अर तम्हां लै निं हुंह कधि पिठ फरेऊंदअ।
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लेबी बधान 26:1
“हुंह आसा थारअ परमेशर बिधाता! तम्हैं निं किज़ू मैहरै अर मुहुर्ती बणाईं तेता पूज़दै लागी।
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लेबी बधान 26:10
तम्हैं निं पिछ़ली सालो नाज़ खाई मुक्कणैं कि आजू जाणीं नऊंईं साले फसल खुडी कठा हई।
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लेबी बधान 26:8
मुंह दैणअ तम्हां लै इहअ बल कि थारै पांज़ा आदमी दरल़ाऊंणै तिन्नें शौ आदमी अर थारै शौआ आदमी पाणै तिन्नें दस हज़ार मारी।
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लेबी बधान 26:5
थारी दाख अर नाज़े साल-फसल हणीं एतरी खास्सी कि पिछ़लै निं तम्हैं खाई मुक्कणैं कि आजू जाणीं नऊंईं साल-फसल पाक्की। ज़िहअ तम्हैं च़ाहे तम्हां लै हणीं खाणां लै तिंयां सोभै गल्ला, तम्हैं रहणैं आपणैं देशै निहंचै बस्सी।
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लेबी बधान 26:7
तम्हां पाणै आपणैं दुशमण फेरा-फेर गोट दैई मारी
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लेबी बधान 26:2
बशैघै धैल़ीए करै कदर अर ज़ुंण मेरी पबित्र ज़ैगा आसा तेते लोल़ी तम्हां दी डअर हुई, किल्हैकि हुंह आसा बिधाता।
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