तब याकूब ने यह मन्नत मानी, “यदि परमेश्वर मेरे साथ रहकर इस यात्रा में मेरी रक्षा करे, और मुझे खाने के लिए रोटी, और पहनने के लिए वस्त्र दे, और मैं सकुशल अपने पिता के घर लौट आऊँ, तो यहोवा मेरा परमेश्वर ठहरेगा। यह पत्थर जिसका मैंने खंभा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा, और जो कुछ तू मुझे दे मैं उसका दशमांश तुझे दिया करूँगा।”