दाऊद और गोलियात की कहानी से सबक़नमूना

दाऊद और गोलियात की कहानी से सबक़

दिन 1 का 7

बाइबल का सबसे बड़ा कमज़ोर मग़र विजयी शख़्स।

जब मेरा भतीजा ऐक्सल लगभग ३ साल का था, तो उसका सबसे पसंदीदा खेल था अपने पिता के साथ ‘दाऊद और गोलियात की कहानी’ को दोहराना। उसका पिता गोलियात बनकर ज़ोर से गरजता — *“क्या मैं कोई कुत्ता हूँ, जो तू डंडों और पत्थरों के साथ मेरे ख़िलाफ़ आया है?” (१ शमूएल १७:४३) और ऐक्सल पूरे जोश से जवाब देता — *“तू मेरे ख़िलाफ़ तलवार लेकर आया है, लेकिन मैं ख़ुदावंद के नाम में तेरा सामना करने आया हूँ!” (१ शमूएल १७:४५) फ़िर वह एक पत्थर घुमाने का नाटक करता, और उसके पिता पूरे नाटकीय अंदाज़ में ज़मीन पर गिर पड़ते। यह देखकर ऐक्सल ख़ुशी से उछल पड़ता, ज़ोर-ज़ोर से हँसता और झूम उठता। वह इस कहानी को बार-बार दोहरा सकता था — न थकता, न रुकता, जैसे उसके छोटे से दिल में दाऊद का वही ईमान और हिम्मत धड़क रही हो।

मैं यह कहानी इस लिएबता रही हूँ क्योंकि इस हफ़्ते हम बाइबल की एक वही मशहूर कहानी पर नज़र डाल रहे हैं - दाऊद और गोलियात की।

इस कहानी में एक क़द और उम्र में छोटा सा चरवाहा लड़का, एक बड़ा ख़तरनाक़ और ऊँचा राक्षस का मुक़ाबला करताहै। वह उस राक्षस को महज़ एक गोफ़न और पत्थर से पराजित करता है और देखते ही देखते, पूरी इस्राएल की नज़रों में हीरो बन जाता है।

यह कहानी प्रेरणादायक है, क्योंकि हम सब अपनी ज़िंदगी में किसी न किसी राक्षस जैसे बड़े मुश्किलों का मुक़ाबला करते हैं। और जैसे ख़ुदा ने गोलियात को हराने में दाऊद की मदद की थी, वैसे ही वो आपके नामुमक़िन हालातों और चुनौतियों पर जीत हासिल करने में आपकी भी मदद करेगा।

बाइबल की हर कहानी में गहरी सच्चाई और सबक़ छिपे हैं।

मिसाल के तौर पर, जब गोलियात ने इस्राएल की सेनाओं को ललकारा (१ शमूएल १७:१०) तब दाऊद ने इसे यूँ समझा कि वो ज़िंदा ख़ुदा की सेनाओं को ललकार रहा है (१ शमूएल १७:२६)। गोलियात की इस ललकार से दाऊद को ग़ुस्सा आया। गोलियात महज़ इस्राएल के लोगों की बेइज़्ज़ती नहीं कर रहा था बल्कि यहोवा का मज़ाक उड़ा रहा था।

यहाँ पर दाऊद की ख़ुदा के प्रति जुनूनी मोहब्बत दिखाई देती है। उसकी ख़ुद की ज़िंदगी में कमज़ोरियाँ और ग़लतियाँ ज़रूर थी, लेकिन एक बात हमेशा साफ़ रही हैं कि, उसका दिल ख़ुदा के लिए बे-रोक मोहब्बत से भरा था और वही जुनूनी मोहब्बत उसे अज़ीम और दलेरी के काम करने के लिए प्रेरितकरती रही।

आओ मिलकर दुआ करें:

ऐ आसमानी पिता, क्या तू मेरा दिल भी उसी जुनूनी मोहब्बत और जोश से भर देगा, जैसे दाऊद का था? मैं भी इस क़द्र पहचानी जाऊँ, जैसे एक ऐसी शख़्स जो ख़ुदा से बेहद मोहब्बत करती है, और जो उन लोगों के ख़िलाफ़ खड़ी होती है जो ख़ुदा को ललकारतें हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

आप एक चमत्कार है।

जेनी मेंडीस

(*इस प्रोत्साहन के कुछ आयत मेरे अल्फ़ाज़ और अंदाज़ में लिखे गए हैं)

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पवित्र शास्त्र

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दाऊद और गोलियात की कहानी से सबक़

शायद यह हर बच्चे की पसंदीदा बाइबल कहानी है: दाऊद और गोलियात। इस कहानी में एक क़द और उम्र में छोटा सा चरवाहा लड़का, एक बड़ा ख़तरनाक़ और क़द में ऊँचा राक्षस का मुक़ाबला करता है। इसमें पसंद न करने जैसा क्या है? यह कहानी ज़रूर शानदार है, लेकिन इस जंग में सिर्फ़ एक हैरान करने वाला नतीजा ही नहीं, बल्कि उससे कहीं ज़्यादा गहरे सबक़ छुपे हैं।

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