यिर्मयाह 20:14-18 - सभी संस्करणों की तुलना करें
यिर्मयाह 20:14-18 HINCLBSI (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
जिस दिन मैं पैदा हुआ, उस दिन को आग लग जाए। जिस दिन मेरी मां ने मुझे जन्म दिया, वह दिन युग-युग तक शापित हो। उस मनुष्य को धिक्कार है, जो मेरे पिता के पास यह खबर लाया था ‘आप को एक पुत्र उत्पन्न हुआ है’ और मेरे पिता को यह समाचार सुनाकर अत्यन्त आनन्दित किया था। मेरे जन्म की खबर लानेवाला मनुष्य सदोम और गमोरा नगरों की तरह मिट जाए जिनको प्रभु ने कठोरता से उलट-पुलट दिया था। वह हर क्षण तनाव का जीवन जीए; वह सबेरे चीख-पुकार सुने; दोपहर को उसके कानों में युद्ध की ध्वनि पड़े। तूने मुझे मां के पेट में ही क्यों न मार डाला? तब मेरी मां की कोख मेरी कबर बन जाती और मैं उसमें सदा पड़ा रहता। प्रभु, मैं अपनी मां के पेट से बाहर क्यों आया? क्या कष्ट और दु:ख का जीवन बिताने के लिए? क्या मैं अपमान और निन्दा में अपना जीवन बिताता रहूंगा?
यिर्मयाह 20:14-18 HINOVBSI (पवित्र बाइबिल OV (Re-edited) Bible (BSI))
स्रापित हो वह दिन जिसमें मैं उत्पन्न हुआ! जिस दिन मेरी माता ने मुझ को जन्म दिया वह धन्य न हो! स्रापित हो वह जन जिसने मेरे पिता को यह समाचार देकर उसको बहुत आनन्दित किया कि तेरे लड़का उत्पन्न हुआ है। उस जन की दशा उन नगरों की सी हो जिन्हें यहोवा ने बिन दया ढा दिया; उसे सबेरे तो चिल्लाहट और दोपहर को युद्ध की ललकार सुनाई दिया करे, क्योंकि उस ने मुझे गर्भ ही में न मार डाला कि मेरी माता का गर्भाशय ही मेरी क़ब्र होती, और मैं उसी में सदा पड़ा रहता। मैं क्यों उत्पात और शोक भोगने के लिये जन्मा और कि अपने जीवन में परिश्रम और दु:ख देखूँ, और अपने दिन नामधराई में व्यतीत करूँ?
यिर्मयाह 20:14-18 HHBD (Hindi Holy Bible)
श्रापित हो वह दिन जिस में मैं उत्पन्न हुआ! जिस दिन मेरी माता ने मुझ को जन्म दिया वह धन्य न हो! श्रापित हो वह जन जिसने मेरे पिता को यह समाचार देकर उसको बहुत आनन्दित किया कि तेरे लड़का उत्पन्न हुआ है। उस जन की दशा उन नगरों की सी हो जिन्हें यहोवा ने बिन दया ढा दिया; उसे सवेरे तो चिल्लाहट और दोपहर को युद्ध की ललकार सुनाई दिया करे, क्योंकि उसने मुझे गर्भ ही में न मार डाला कि मेरी माता का गर्भाशय ही मेरी क़ब्र होती, और मैं उसी में सदा पड़ा रहता। मैं क्यों उत्पात और शोक भोगने के लिये जन्मा और कि अपने जीवन में परिश्रम और दु:ख देखूं, और अपने दिन नामधराई में व्यतीत करूं?
यिर्मयाह 20:14-18 HERV (पवित्र बाइबल)
उस दिन को धिक्कार है जिस दिन मेरा जन्म हुआ। उस दिन को बधाई न दो जिस दिन मैं माँ की कोख में आया। उस व्यक्ति को अभिशाप दो जिसने मेरे पिता को यह सूचना दी कि मेरा जन्म हुआ है। उसने कहा था, “तुम्हारा लड़का हुआ है, वह एक लड़का है।” उसने मेरे पिता को बहुत प्रसन्न किया था जब उसने उनसे यह कहा था। उस व्यक्ति को वैसा ही होने दो जैसे वे नगर जिन्हें यहोवा ने नष्ट किया। यहोवा ने उन नगरों पर कुछ भी दया नहीं की। उस व्यक्ति को सवेरे युद्ध का उद्घोष सुनने दो, और दोपहर को युद्ध की चीख सुनने दो। तूने मुझे माँ के पेट में ही, क्यों न मार डाला तब मेरी माँ की कोख कब्र बन जाती, और मैं कभी जन्म नहीं ले सका होता। मुझे माँ के पेट से बाहर क्यों आना पड़ा जो कुछ मैंने पाया है वह परेशानी और दु:ख है और मेरे जीवन का अन्त लज्जाजनक होगा।
यिर्मयाह 20:14-18 IRVHIN (इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019)
श्रापित हो वह दिन जिसमें मैं उत्पन्न हुआ! जिस दिन मेरी माता ने मुझ को जन्म दिया वह धन्य न हो! श्रापित हो वह जन जिसने मेरे पिता को यह समाचार देकर उसको बहुत आनन्दित किया कि तेरे लड़का उत्पन्न हुआ है। उस जन की दशा उन नगरों की सी हो जिन्हें यहोवा ने बिन दया ढा दिया; उसे सवेरे तो चिल्लाहट और दोपहर को युद्ध की ललकार सुनाई दिया करे, क्योंकि उसने मुझे गर्भ ही में न मार डाला कि मेरी माता का गर्भाशय ही मेरी कब्र होती, और मैं उसी में सदा पड़ा रहता। मैं क्यों उत्पात और शोक भोगने के लिये जन्मा और कि अपने जीवन में परिश्रम और दुःख देखूँ, और अपने दिन नामधराई में व्यतीत करूँ?
यिर्मयाह 20:14-18 HCV (सरल हिन्दी बाइबल)
शापित हो वह दिन जिसमें मैंने जन्म लिया! जिस दिन मेरी माता ने मुझे जन्म दिया, उस दिन को धन्य न कहा जाए! शापित हों वह व्यक्ति जिन्होंने मेरे पिता को अत्यंत हर्षित कर दिया, जब उन्होंने उन्हें यह संदेश दिया, “आपके एक पुत्र पैदा हुए हैं!” उन संदेशवाहक की नियति वही हो जो उन नगरों की हुई थी, जिन्हें यहोवाह ने निर्ममता से नष्ट कर दिया था. उन्हें प्रातःकाल से ही पीड़ा की कराहट सुनाई देने लगी, तथा दोपहर में युद्ध की चेतावनी की वाणी. क्योंकि मेरे जन्म के पूर्व ही मेरी जीवन लीला उन्होंने समाप्त नहीं कर दी, कि मेरी माता ही मेरी कब्र हो जातीं, और मेरी माता स्थायी रूप से गर्भवती रह जातीं. मैं गर्भ से बाहर ही क्यों आ गया कि संकट और शोक देखूं, कि मेरे जीवन के दिन लज्जा में जिए जाएं?