यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया॥
यूहन्ना 20 पढ़िए
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सभी संस्करणों की तुलना करें: यूहन्ना 20:29
5 दिन
यीशु मसीह के फ़िरसे जिंदा होने के बाद उसने पाँच बार अपने चेलों से अलग-अलग तरीक़ों से मुलाक़ात की। ये पाँच अनुभव यह दर्शाते हैं कि आज भी यीशु मसीह आपसे मिलना चाहता है और उसे इस पाँच दिन की पढ़ने की योजना से खोजें।
7 दिन
यीशु मसीह ने कहा, “धन्य हैं वे जो देखे बिना भी ईमान लाए।” बिना देखे यक़ीन लाना इस दुनिया के लिए, जो हर बात का सबूत माँगती है, वाक़ई एक ज़बरदस्त बदलाव लानेवाली सोच है। इस योजना में शामिल हो जाइए और अपने ‘बेपरवाह-ईमान के मसल्स’ को मज़बूत कीजिए।
8 दिन
RREACH (विश्व प्रसिद्ध सेवाकाई) के अध्यक्ष और डलास थियोलॉजिकल सेमिनरी के प्रोफेसर डॉ. रमेश रिचर्ड के साथ छह दिन बिताएं, जब वे मसीह के कार्य की मृत्यु की हत्या करने वाले के रूप में छान-बीन कर रहे हैं। हालांकि शारीरिक मृत्यु हम सब के लिए वास्तविक है, लेकिन यहाँ पर आशा है- अर्थात यीशु के नाम में अनन्त जीवन।
12 दिन
हमें क्रिसमस की सारी खुशियाँ पसंद हैं, लेकिन ईस्टर भी कम नहीं है। जो बैतलहम में आरम्भ हुआ था, वह गुलगुता में समाप्त होता हुआ प्रतीत हुआ, फिर भी वह वहाँ खत्म नहीं हुआ! यह बारह दिनों की ईस्टर योजना है, जिसमें अंतिम भोज, यीशु की मृत्यु, बीच के विश्राम के दिन और एक महिमामय पुनरागमन के महत्व पर मनन किया जाएगा।
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