सफ़नियाह 3
3
यरूशलम का अंजाम
1उस सरकश, नापाक और ज़ालिम शहर पर अफ़सोस जो यरूशलम कहलाता है। 2न वह सुनता, न तरबियत क़बूल करता है। न वह रब पर भरोसा रखता, न अपने ख़ुदा के क़रीब आता है। 3जो बुज़ुर्ग उसके बीच में हैं वह दहाड़ते हुए शेरबबर हैं। उसके क़ाज़ी शाम के वक़्त भूके फिरनेवाले भेड़ीए हैं जो तुलूए-सुबह तक शिकार की एक हड्डी तक नहीं छोड़ते। 4उसके नबी गुस्ताख़ और ग़द्दार हैं। उसके इमाम मक़दिस की बेहुरमती और शरीअत से ज़्यादती करते हैं।
5लेकिन रब भी शहर के बीच में है, और वह रास्त है, वह बेइनसाफ़ी नहीं करता। सुबह बसुबह वह अपना इनसाफ़ क़ायम रखता है, हम कभी उससे महरूम नहीं रहते। लेकिन बेदीन शर्म से वाक़िफ़ ही नहीं होता।
6रब फ़रमाता है, “मैंने क़ौमों को नेस्तो-नाबूद कर दिया है। उनके क़िले तबाह, उनकी गलियाँ सुनसान हैं। अब उनमें से कोई नहीं गुज़रता। उनके शहर इतने बरबाद हैं कि कोई भी उनमें नहीं रहता। 7मैं बोला, ‘बेशक यरूशलम मेरा ख़ौफ़ मानकर मेरी तरबियत क़बूल करेगा। क्योंकि क्या ज़रूरत है कि उस की रिहाइशगाह मिट जाए और मेरी तमाम सज़ाएँ उस पर नाज़िल हो जाएँ।’ लेकिन उसके बाशिंदे मज़ीद जोश के साथ अपनी बुरी हरकतों में लग गए।” 8चुनाँचे रब फ़रमाता है, “अब मेरे इंतज़ार में रहो, उस दिन के इंतज़ार में जब मैं शिकार करने के लिए उठूँगा। #एक और मुमकिना तरजुमा : गवाही देने के लिए। क्योंकि मैंने अक़वाम को जमा करने का फ़ैसला किया है। मैं ममालिक को इकट्ठा करके उन पर अपना ग़ज़ब नाज़िल करूँगा। तब वह मेरे सख़्त क़हर का निशाना बन जाएंगे, पूरी दुनिया मेरी ग़ैरत की आग से भस्म हो जाएगी।
इसराईल के लिए नई उम्मीद
9लेकिन इसके बाद मैं अक़वाम के होंटों को पाक-साफ़ करूँगा ताकि वह आइंदा रब का नाम लेकर इबादत करें, कि वह शाना बशाना खड़ी होकर मेरी ख़िदमत करें। 10उस वक़्त मेरे परस्तार, मेरी मुंतशिर हुई क़ौम एथोपिया के दरियाओं के पार से भी आकर मुझे क़ुरबानियाँ पेश करेगी।
11ऐ सिय्यून बेटी, उस दिन तुझे शर्मसार नहीं होना पड़ेगा हालाँकि तूने मुझसे बेवफ़ा होकर निहायत बुरे काम किए हैं। क्योंकि मैं तेरे दरमियान से तेरे मुतकब्बिर शेख़ीबाज़ों को निकालूँगा। आइंदा तू मेरे मुक़द्दस पहाड़ पर मग़रूर नहीं होगी। 12मैं तुझमें सिर्फ़ क़ौम के ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को छोड़ूँगा, उन सबको जो रब के नाम में पनाह लेंगे। 13इसराईल का यह बचा हुआ हिस्सा न ग़लत काम करेगा, न झूट बोलेगा। उनकी ज़बान पर फ़रेब नहीं होगा। तब वह भेड़ों की तरह चरागाह में चरेंगे और आराम करेंगे। उन्हें डरानेवाला कोई नहीं होगा।”
14ऐ सिय्यून बेटी, ख़ुशी के नारे लगा! ऐ इसराईल, ख़ुशी मना! ऐ यरूशलम बेटी, शादमान हो, पूरे दिल से शादियाना बजा। 15क्योंकि रब ने तेरी सज़ा मिटाकर तेरे दुश्मन को भगा दिया है। रब जो इसराईल का बादशाह है तेरे दरमियान ही है। आइंदा तुझे किसी नुक़सान से डरने की ज़रूरत नहीं होगी।
16उस दिन लोग यरूशलम से कहेंगे, “ऐ सिय्यून, मत डरना! हौसला न हार, तेरे हाथ ढीले न हों। 17रब तेरा ख़ुदा तेरे दरमियान है, तेरा पहलवान तुझे नजात देगा। वह शादमान होकर तेरी ख़ुशी मनाएगा। उस की मुहब्बत तेरे क़ुसूर का ज़िक्र ही नहीं करेगी बल्कि वह तुझसे इंतहाई ख़ुश होकर शादियाना बजाएगा।”
18रब फ़रमाता है, “मैं ईद को तर्क करनेवालों को तुझसे दूर कर दूँगा, क्योंकि वह तेरी रुसवाई का बाइस थे। 19मैं उनसे भी निपट लूँगा जो तुझे कुचल रहे हैं। जो लँगड़ाता है उसे मैं बचाऊँगा, जो मुंतशिर हैं उन्हें जमा करूँगा। जिस मुल्क में भी उनकी रुसवाई हुई वहाँ मैं उनकी तारीफ़ और एहतराम कराऊँगा। 20उस वक़्त मैं तुम्हें जमा करके वतन में वापस लाऊँगा। मैं तुम्हारे देखते देखते तुम्हें बहाल करूँगा और दुनिया की तमाम अक़वाम में तुम्हारी तारीफ़ और एहतराम कराऊँगा।” यह रब का फ़रमान है।
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यरूशलम का अंजाम
1उस सरकश, नापाक और ज़ालिम शहर पर अफ़सोस जो यरूशलम कहलाता है। 2न वह सुनता, न तरबियत क़बूल करता है। न वह रब पर भरोसा रखता, न अपने ख़ुदा के क़रीब आता है। 3जो बुज़ुर्ग उसके बीच में हैं वह दहाड़ते हुए शेरबबर हैं। उसके क़ाज़ी शाम के वक़्त भूके फिरनेवाले भेड़ीए हैं जो तुलूए-सुबह तक शिकार की एक हड्डी तक नहीं छोड़ते। 4उसके नबी गुस्ताख़ और ग़द्दार हैं। उसके इमाम मक़दिस की बेहुरमती और शरीअत से ज़्यादती करते हैं।
5लेकिन रब भी शहर के बीच में है, और वह रास्त है, वह बेइनसाफ़ी नहीं करता। सुबह बसुबह वह अपना इनसाफ़ क़ायम रखता है, हम कभी उससे महरूम नहीं रहते। लेकिन बेदीन शर्म से वाक़िफ़ ही नहीं होता।
6रब फ़रमाता है, “मैंने क़ौमों को नेस्तो-नाबूद कर दिया है। उनके क़िले तबाह, उनकी गलियाँ सुनसान हैं। अब उनमें से कोई नहीं गुज़रता। उनके शहर इतने बरबाद हैं कि कोई भी उनमें नहीं रहता। 7मैं बोला, ‘बेशक यरूशलम मेरा ख़ौफ़ मानकर मेरी तरबियत क़बूल करेगा। क्योंकि क्या ज़रूरत है कि उस की रिहाइशगाह मिट जाए और मेरी तमाम सज़ाएँ उस पर नाज़िल हो जाएँ।’ लेकिन उसके बाशिंदे मज़ीद जोश के साथ अपनी बुरी हरकतों में लग गए।” 8चुनाँचे रब फ़रमाता है, “अब मेरे इंतज़ार में रहो, उस दिन के इंतज़ार में जब मैं शिकार करने के लिए उठूँगा। #एक और मुमकिना तरजुमा : गवाही देने के लिए। क्योंकि मैंने अक़वाम को जमा करने का फ़ैसला किया है। मैं ममालिक को इकट्ठा करके उन पर अपना ग़ज़ब नाज़िल करूँगा। तब वह मेरे सख़्त क़हर का निशाना बन जाएंगे, पूरी दुनिया मेरी ग़ैरत की आग से भस्म हो जाएगी।
इसराईल के लिए नई उम्मीद
9लेकिन इसके बाद मैं अक़वाम के होंटों को पाक-साफ़ करूँगा ताकि वह आइंदा रब का नाम लेकर इबादत करें, कि वह शाना बशाना खड़ी होकर मेरी ख़िदमत करें। 10उस वक़्त मेरे परस्तार, मेरी मुंतशिर हुई क़ौम एथोपिया के दरियाओं के पार से भी आकर मुझे क़ुरबानियाँ पेश करेगी।
11ऐ सिय्यून बेटी, उस दिन तुझे शर्मसार नहीं होना पड़ेगा हालाँकि तूने मुझसे बेवफ़ा होकर निहायत बुरे काम किए हैं। क्योंकि मैं तेरे दरमियान से तेरे मुतकब्बिर शेख़ीबाज़ों को निकालूँगा। आइंदा तू मेरे मुक़द्दस पहाड़ पर मग़रूर नहीं होगी। 12मैं तुझमें सिर्फ़ क़ौम के ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को छोड़ूँगा, उन सबको जो रब के नाम में पनाह लेंगे। 13इसराईल का यह बचा हुआ हिस्सा न ग़लत काम करेगा, न झूट बोलेगा। उनकी ज़बान पर फ़रेब नहीं होगा। तब वह भेड़ों की तरह चरागाह में चरेंगे और आराम करेंगे। उन्हें डरानेवाला कोई नहीं होगा।”
14ऐ सिय्यून बेटी, ख़ुशी के नारे लगा! ऐ इसराईल, ख़ुशी मना! ऐ यरूशलम बेटी, शादमान हो, पूरे दिल से शादियाना बजा। 15क्योंकि रब ने तेरी सज़ा मिटाकर तेरे दुश्मन को भगा दिया है। रब जो इसराईल का बादशाह है तेरे दरमियान ही है। आइंदा तुझे किसी नुक़सान से डरने की ज़रूरत नहीं होगी।
16उस दिन लोग यरूशलम से कहेंगे, “ऐ सिय्यून, मत डरना! हौसला न हार, तेरे हाथ ढीले न हों। 17रब तेरा ख़ुदा तेरे दरमियान है, तेरा पहलवान तुझे नजात देगा। वह शादमान होकर तेरी ख़ुशी मनाएगा। उस की मुहब्बत तेरे क़ुसूर का ज़िक्र ही नहीं करेगी बल्कि वह तुझसे इंतहाई ख़ुश होकर शादियाना बजाएगा।”
18रब फ़रमाता है, “मैं ईद को तर्क करनेवालों को तुझसे दूर कर दूँगा, क्योंकि वह तेरी रुसवाई का बाइस थे। 19मैं उनसे भी निपट लूँगा जो तुझे कुचल रहे हैं। जो लँगड़ाता है उसे मैं बचाऊँगा, जो मुंतशिर हैं उन्हें जमा करूँगा। जिस मुल्क में भी उनकी रुसवाई हुई वहाँ मैं उनकी तारीफ़ और एहतराम कराऊँगा। 20उस वक़्त मैं तुम्हें जमा करके वतन में वापस लाऊँगा। मैं तुम्हारे देखते देखते तुम्हें बहाल करूँगा और दुनिया की तमाम अक़वाम में तुम्हारी तारीफ़ और एहतराम कराऊँगा।” यह रब का फ़रमान है।
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