मत्तय 18:12

मत्तय 18:12 VAHNT

तुमी काय समजता, जर कोण्या माणसाची शंभर मेंढरं हायत, अन् त्यातून एक हारपलं तर तो नव्याणवले सोडून जंगलात व पहाडावर जाऊन त्या हरपलेल्या मेंढराला नाई पाईन?

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मत्तय 18:12 - तुमी काय समजता, जर कोण्या माणसाची शंभर मेंढरं हायत, अन् त्यातून एक हारपलं तर तो नव्याणवले सोडून जंगलात व पहाडावर जाऊन त्या हरपलेल्या मेंढराला नाई पाईन?

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