यूहन्ना 1
HIN2017
1
1आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था। 2यही आदि में परमेश्‍वर के साथ था। 3सब कुछ उसी के द्वारा उत्‍पन्‍न हुआ और जो कुछ उत्‍पन्‍न हुआ है, उसमें से कोई भी वस्‍तु उसके बिना उत्‍पन्‍न न हुई। 4उसमें जीवन था; और वह जीवन मुनष्‍यों की ज्‍योति थी। 5और ज्‍योति अन्‍धकार में चमकती है; और अन्‍धकार ने उसे ग्रहण न किया। 6एक मनुष्‍य परमेश्‍वर की ओर से आ उपस्‍थित हुआ जिसका नाम यूहन्‍ना था। 7यह गवाही देने आया, कि ज्‍योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्‍वास लाएँ। 8वह आप तो वह ज्‍योति न था, परन्‍तु उस ज्‍योति की गवाही देने के लिये आया था। 9सच्‍ची ज्‍योति जो हर एक मनुष्‍य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 10वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्‍पन्‍न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 11वह अपने घर में आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 12परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्‍हें परमेश्‍वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्‍वास रखते हैं: 13वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्‍छा से, न मनुष्‍य की इच्‍छा से, परन्‍तु परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुए हैं। 14और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। 15यूहन्‍ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिसका मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्‍योंकि वह मुझ से पहले था। 16क्‍योंकि उसकी परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्‍त किया अर्थात् अनुग्रह पर अनुग्रह। 17इसलिये कि व्‍यवस्‍था तो मूसा के द्वारा दी गई, परन्‍तु अनुग्रह और सच्‍चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुँची। 18परमेश्‍वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र** जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया। 19यूहन्‍ना की गवाही यह है, कि जब यहूदियों ने यरूशलेम से याजकों और लेवीयों को उससे यह पूछने के लिये भेजा, “तू कौन है?” 20तो उसने यह मान लिया, और इन्‍कार नहीं किया, परन्‍तु मान लिया कि मैं मसीह नहीं हूँ। 21तब उन्होंने उससे पूछा, “तो फिर कौन है? क्‍या तू एलिय्‍याह है?” उसने कहा, “मैं नहीं हूँ।” तो क्‍या तू वह भविष्‍यद्वक्‍ता है? उसने उत्तर दिया, “नहीं”। 22तब उन्होंने उससे पूछा, “फिर तू है कौन? ताकि हम अपने भेजनेवालों को उत्तर दें। तू अपने विषय में क्‍या कहता है?” 23उसने कहा, “जैसा यशायाह भविष्‍यद्वक्‍ता ने कहा है, ‘मैं जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्‍द हूँ कि तुम प्रभु का मार्ग सीधा करो’।” 24ये फरीसियों की ओर से भेजे गए थे। 25उन्होंने उससे यह प्रश्‍न पूछा, कि यदि तू न मसीह है, और न एलिय्‍याह, और न वह भविष्‍यद्वक्‍ता है, तो फिर बपतिस्‍मा क्‍यों देता है? 26यूहन्‍ना ने उनको उत्तर दिया, कि मैं तो जल से बपतिस्‍मा देता हूँ, परन्‍तु तुम्‍हारे बीच में एक व्यक्ति खड़ा है, जिसे तुम नहीं जानते। 27अर्थात् मेरे बाद आनेवाला है, जिस की जूती का बन्‍ध मैं खोलने के योग्‍य नहीं। 28ये बातें यरदन के पार बैतनिय्‍याह में हुई, जहाँ यूहन्‍ना बपतिस्‍मा देता था। 29दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेम्‍ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। 30यह वही है, जिसके विषय में मैं ने कहा था, कि एक पुरूष मेरे पीछे आता है, जो मुझ से श्रेष्‍ठ है, क्‍योंकि वह मुझ से पहले था। 31और मैं तो उसे पहिचानता न था, परन्‍तु इसलिये मैं जल से बपतिस्‍मा देता हुआ आया, कि वह इस्राएल पर प्रगट हो जाए।” 32और यूहन्‍ना ने यह गवाही दी, कि मैं ने आत्‍मा को कबूतर की नाई आकाश से उतरते देखा है, और वह उस पर ठहर गया। 33और मैं तो उसे पहिचानता नहीं था, परन्‍तु जिस ने मुझे जल से बपतिस्‍मा देने को भेजा, उसी ने मुझ से कहा, कि जिस पर तू आत्‍मा को उतरते और ठहरते देखे; वही पवित्र आत्‍मा से बपतिस्‍मा देनेवाला है। 34और मैं ने देखा, और गवाही दी है कि यही परमेश्‍वर का पुत्र है। 35दूसरे दिन फिर यूहन्‍ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे। 36और उसने यीशु पर जो जा रहा था, दृष्‍टि करके कहा, “देखो, यह परमेश्‍वर का मेम्‍ना है।” 37तब वे दोनों चेले उसकी सुनकर यीशु के पीछे हो लिए। 38यीशु ने मुड़कर और उनको पीछे आते देखकर उनसे कहा, “तुम किस की खोज में हो?” उन्होंने उससे कहा, “हे रब्‍बी, अर्थात् (हे गुरू), तू कहाँ रहता है?” 39उसने उनसे कहा, “चलो, तो देख लोगे।” तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्‍थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था। 40उन दोनों में से, जो यूहन्‍ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिए थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्‍द्रियास था। 41उसने पहले अपने सगे भाईं शमौन से मिलकर उससे कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात् मसीह मिल गया। 42वह उसे यीशु के पास लाया: यीशु ने उस पर दृष्‍टि करके कहा, “तू यूहन्‍ना का पुत्र शमौन है, तू केफा” अर्थात् पतरस कहलाएगा। 43दूसरे दिन यीशु ने गलील को जाना चाहा, और फिलिप्‍पुस से मिलकर कहा, “मेरे पीछे हो ले।” 44फिलिप्‍पुस तो अन्‍द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का निवासी था। 45फिलिप्‍पुस ने नतनएल से मिलकर उससे कहा, “जिसका वर्णन मूसा ने व्‍यवस्‍था में और भविष्‍यद्वक्‍ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।” 46नतनएल ने उससे कहा, “क्‍या कोई अच्‍छी वस्‍तु भी नासरत से निकल सकती है?” फिलिप्‍पुस ने उससे कहा, “चलकर देख ले।” 47यीशु ने नतनएल को अपनी ओर आते देखकर उसके विषय में कहा, “देखो, यह सचमुच इस्राएली है: इस में कपट नहीं।” 48नतनएल ने उससे कहा, “तू मुझे कहाँ से जानता है?” यीशु ने उसको उत्तर दिया, “उससे पहले कि फिलिप्‍पुस ने तुझे बुलाया, जब तू अंजीर के पेड़ के तले था, तब मैं ने तुझे देखा था।” 49नतनएल ने उसको उत्तर दिया, “हे रब्‍बी, तू परमेश्‍वर का पुत्र हे; तू इस्राएल का महाराजा है।” 50यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैं ने जो तुझ से कहा, कि मैं ने तुझे अंजीर के पेड़ के तले देखा, क्‍या तु इसी लिये विश्‍वास करता है? तु इस से बड़े बड़े काम देखेगा।” 51फिर उससे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि तुम स्‍वर्ग को खुला हुआ, और परमेश्वर के स्वर्गदूतों को मनुष्‍य के पुत्र के ऊपर उतरते और ऊपर जाते देखोगे।”

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