मार्कास 13:32, 33, 34, 35, 36, 37
मार्कास 13:32 HSS
“वैसे उस दिन तथा उस समय के विषय में किसी को भी मालूम नहीं है—न स्वर्गदूतों को और न ही पुत्र को—परंतु मात्र पिता को ही यह मालूम है.”
मार्कास 13:33 HSS
अब इसलिये कि तुम्हें उस विशेष क्षण के घटित होने के विषय में कुछ भी मालूम नहीं है, सावधान रहो, सतर्क रहो.
मार्कास 13:34 HSS
यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी उस व्यक्ति की, जो अपनी सारी गृहस्थी अपने दासों को सौंपकर दूर यात्रा पर निकल पड़ा. उसने हर एक दास को भिन्न-भिन्न ज़िम्मेदारी सौंपी और द्वारपाल को भी सावधान रहने की आज्ञा दी.
मार्कास 13:35 HSS
“इसी प्रकार तुम भी सावधान रहो क्योंकि तुम यह नहीं जानते कि घर का स्वामी लौटकर कब आएगा—शाम को, आधी रात या भोर को मुर्गे की बांग के समय.
मार्कास 13:36 HSS
ऐसा न हो कि उसका आना अचानक हो और तुम गहरी नींद में पाए जाओ.
मार्कास 13:37 HSS
जो मैं तुमसे कह रहा हूं, वह सभी से संबंधित है: सावधान रहो.”





