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1 राज़ै 3:9
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तूह दै मुल्है एही अक्ल कि हुंह तेरी परज़ा प्रैंदै राज़ करी सकूं अर तिन्नां लै नसाफ दैई सकूं अर मंऐं लोल़ी भलअ अर बूरअ परखी ज़ाणअ। नांईं ताह हुंह निं तेरी एतरी खास्सी परज़ो नसाफ करी सकदअ।”
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1 राज़ै 3:12
ज़िहअ बरदान तंऐं मांगअ, मुंह करनअ ताल्है तिहअ ई। मुंह दैणीं ताल्है अक्ल अर एही समझ़ कि ताह ज़िहअ अक्ली आल़अ नां आझ़ तैणीं कुंण हुअ अर नां आजू कुंण हणअ।
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1 राज़ै 3:11
बिधाता बोलअ तेऊ लै इहअ, “लाम्मी अमर, धन-माया अर दुशमणो बनाश छ़ाडी मांगी तंऐं मुखा आप्पू लै अक्ल ताकि तूह परज़ा लै नसाफ दैई सके
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1 राज़ै 3:13
ज़ुंण तंऐं मुखा नांईं बी मांगअ सह बी दैणअ मुंह ताल्है भरपूर। तूह हणअ सारी ज़िन्दगी सेठ अर सोभी करनअ तेरअ अदर अर तूह हणअ सोभी राज़ै का महान।
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1 राज़ै 3:14
ज़िहअ हुंह बोले ज़ै तूह तिहअ ई करे अर आपणैं बाब दाबेदा ज़िहै मेरअ बधान अर तेते सोभी बिधी मने, तै दैणीं मुंह ताल्है खास्सी अमर।”
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1 राज़ै 3:5
तैहा बैल़ी आअ बिधाता सुलैमाने सुपनै संघा पुछ़अ तेऊ का इहअ, “तूह मांग मुखा, ताह किज़ै बरदान लोल़ी? ज़िहअ तूह च़ाहा, तूह मांग मुखा तिहअ, ताह मुखा किज़ै लोल़ी?”
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1 राज़ै 3:7
हे परमेशर बिधाता, हुंह आसा तेरअ दास अर तंऐं बणाअं मेरै बाबे ज़ैगा हुंह राज़अ। पर हुंह आसा अज़ी लान्हअ अर मुखा निं अज़ी थोघै कि राज़ किहअ करै लागा करनअ।
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1 राज़ै 3:10
मालक बिधाता हुअ सुलैमाना लै खुश कि तेऊ मांगअ इहअ बरदान।
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1 राज़ै 3:6
सुलैमानै बोलअ, “मेरअ बाब दाबेद तेरअ दास त ताल्है शुचअ-पाक्कअ अर तेऊ किअ ज़िहअ तंऐं हुकम किअ तिहअ ई। तूह झ़ूरअ मेरै बाब राज़ै दाबेदा लै सदा, तेरी हुणाकार हुई एही कि तंऐं बणाअं मेरै बाबे ज़ैगा आजू हुंह राज़अ।
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1 राज़ै 3:8
हुंह आसा इधी तेरी छ़ांटी दी परज़ा जैंदरी, तिंयां आसा इहै खास्सै कि तिन्नां निं कुंण गणी सकदअ।
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